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Gurugram Accident: हरियाणा के गुरुग्राम में हुए दर्दनाक हादसे ने निर्माण कार्यों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. रोजी-रोटी की तलाश में आए मजदूर निर्माणाधीन सोसाइटी में काम कर रहे थे, लेकिन बेसमेंट की खुदाई के दौरान अचानक मिट्टी धंसने से 9 मजदूरों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए. इस घटना ने एक बार फिर निर्माण स्थलों पर बरती जा रही लापरवाही को उजागर कर दिया है. सुरक्षा नियमों की अनदेखी, निगरानी की कमी और ठेकेदारों की लापरवाही के कारण मजदूरों की जान जोखिम में पड़ रही है, जिससे व्यवस्था की जिम्मेदारी पर भी बड़े सवाल उठने लगे हैं.
#WATCH | Haryana | Visuals from outside the residential society where several labourers are feared dead after a wall of an under-construction building collapsed last night in the Sidhrawali area of Gurugram pic.twitter.com/aZtZHQYXZA
— ANI (@ANI) March 10, 2026
निर्माण स्थलों पर बढ़ते हादसे
निर्माण स्थलों पर सुरक्षा में लापरवाही के कारण यह क्षेत्र मजदूरों के लिए धीरे-धीरे खतरनाक बनता जा रहा है. पिछले कुछ वर्षों में ऐसे कई हादसे सामने आए हैं, जिनमें 300 से अधिक मजदूरों की जान जा चुकी है. इनमें से अधिकांश घटनाएं बेसमेंट की खुदाई के दौरान मिट्टी ढहने के कारण हुई हैं. इन हादसों के बावजूद निर्माण कंपनियां और ठेकेदार सुरक्षा नियमों का पालन करने में गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं.
नियमों का पालन न होने से बढ़ता खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार, खुदाई के दौरान कई जरूरी सुरक्षा नियमों का पालन करना अनिवार्य होता है. नियम के मुताबिक:-
मिट्टी की खुदाई करते समय किनारों को 45 से 60 डिग्री के कोण पर ढालू बनाना चाहिए, ताकि मिट्टी अचानक न गिरे.
इसके अलावा किनारों पर लकड़ी या मजबूत घेरा लगाना जरूरी होता है, जिससे मिट्टी ढहने से रोका जा सके.
खुदाई वाली जगह के किनारे मिट्टी का ढेर नहीं लगाना चाहिए.
भारी मशीनों और अन्य सामान को भी गड्ढे के किनारे से दूर रखना चाहिए.
यदि आसपास पानी जमा हो जाए तो मिट्टी के ढहने का खतरा और बढ़ जाता है. ऐसे में सावधानी बरतनी चाहिए.
निगरानी व्यवस्था पर उठ रहे सवाल
आपको बता दें कि भवन निर्माण कार्यों की निगरानी की जिम्मेदारी श्रम विभाग से जुड़े औद्योगिक सुरक्षा एवं स्वास्थ्य निदेशालय की होती है. गुरुग्राम में संयुक्त निदेशक, उपनिदेशक और सहायक निदेशक स्तर के अधिकारी तैनात हैं, लेकिन इसके बावजूद सुरक्षा नियमों के पालन पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता. अक्सर हादसा होने के बाद जांच बैठा दी जाती है, लेकिन समय के साथ मामला ठंडा पड़ जाता है. अधिकांश श्रमिक आर्थिक रूप से कमजोर होते हैं, इसलिए उनके परिवार कानूनी लड़ाई भी नहीं लड़ पाते.
सुरक्षा के साथ हो रहा खिलवाड़
विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार ठेकेदार पैसे बचाने के चक्कर में सुरक्षा नियमों की अनदेखी कर देते हैं. इसका खामियाजा मजदूरों को अपनी जान देकर चुकाना पड़ता है. अगर समय रहते निर्माण स्थलों पर सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन कराया जाए, तो ऐसे दर्दनाक हादसों को काफी हद तक रोका जा सकता है.
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