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गुजरात सरकार योजना Photograph: (Grok AI)
गुजरात सरकार के कृषि, किसान कल्याण एवं सहकारिता विभाग द्वारा शुरू की गई “Scheme for Supply of Improved Seeds for Fodder” का मुख्य उद्देश्य गौशाला, पंजरापोल और इसी प्रकार की संस्थाओं को उन्नत किस्म के चारा बीज उपलब्ध कराना है. यह योजना विशेष रूप से चरागाह भूमि यानी गौचर भूमि पर पौष्टिक हरे चारे की खेती को प्रोत्साहित करती है, जिससे पशुओं के स्वास्थ्य और उत्पादन क्षमता में वृद्धि हो सके.
किन बीजों का मिलेगा लाभ
इस योजना के अंतर्गत विभिन्न प्रकार के उन्नत चारा बीज किट उपलब्ध कराए जाएंगे. मक्का के लिए अधिकतम 10 किट दिए जाएंगे, जिनमें प्रत्येक किट 5 किलोग्राम की होगी. ज्वार के लिए अधिकतम 50 किट, प्रत्येक 5 किलोग्राम की व्यवस्था है. जई के लिए अधिकतम 5 किट और लूसर्न के लिए अधिकतम 20 किट दिए जाएंगे, जिसमें प्रत्येक किट 2 किलोग्राम की होगी. यह वितरण संस्थाओं की आवश्यकता और पात्रता के आधार पर किया जाएगा.
पात्रता शर्तें क्या है?
इस योजना का लाभ केवल वही पंजरापोल और संस्थाएं ले सकेंगी, जो चैरिटी एक्ट के अंतर्गत पंजीकृत हों. इसके साथ ही आवेदक के पास स्वयं की भूमि या वैध लीज पर ली गई भूमि का दस्तावेज होना आवश्यक है, जहां चारा उत्पादन किया जा सके.
आवेदन प्रक्रिया क्या है?
आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन रखी गई है. आवेदक को I-Khedut पोर्टल पर जाकर योजना के लिए आवेदन करना होगा. पोर्टल के होम पेज पर ‘Schemes’ विकल्प में जाकर ‘Animal Husbandry Schemes’ का चयन करना होगा. इसके बाद संबंधित योजना पर ‘Apply’ बटन पर क्लिक कर नया आवेदन भरना होगा. आवेदन में सुधार के लिए ‘Update Application’ विकल्प भी उपलब्ध है. आवेदन पूरा होने के बाद उसे कन्फर्म करना अनिवार्य है.
आवेदन के बाद की प्रक्रिया
ऑनलाइन आवेदन के बाद उसका प्रिंट आउट निकालकर 30 दिनों के भीतर संबंधित बोर्ड में जमा कराना होगा. इस प्रिंट आउट पर संबंधित जिले के GGVB नोडल अधिकारी के हस्ताक्षर और मुहर होना आवश्यक है. साथ ही आवेदन में मांगे गए सभी दस्तावेज संलग्न करने होंगे. आवेदक I-Khedut पोर्टल के माध्यम से अपने आवेदन की स्थिति भी देख सकता है.
आवश्यक दस्तावेज क्या क्या लगेंगे?
योजना के लिए आवेदन करते समय भूमि से जुड़े 7/12, 8-A और 6-अधिकार की प्रतियां अनिवार्य हैं. यदि भूमि लीज पर ली गई है तो लीज एग्रीमेंट की प्रति देनी होगी. इसके अलावा ग्राम पंचायत के तलाटी द्वारा जारी जल संसाधन उपलब्धता प्रमाण पत्र भी आवश्यक है. विभाग द्वारा आवश्यकता अनुसार अन्य दस्तावेज भी मांगे जा सकते हैं.
पशुधन विकास को मिलेगा बढ़ावा
यह योजना राज्य में पशुधन पोषण सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है. हरे और पौष्टिक चारे की उपलब्धता से पशुओं का स्वास्थ्य बेहतर होगा, दुग्ध उत्पादन में वृद्धि होगी और गौशाला एवं पंजरापोल की कार्यक्षमता को मजबूती मिलेगी.
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