गुजरात के मछुआरों की चमकेगी किस्मत, मछली सुरक्षित रखने के लिए बनेंगे हाई-टेक आइस प्लांट

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत गुजरात में न्यूनतम 20 टन क्षमता के आइस प्लांट और स्टोरेज यूनिट के निर्माण के लिए वित्तीय सहायता दी जा रही है. इसका उद्देश्य मछली को स्वस्थ और स्वच्छ अवस्था में संरक्षित कर बेहतर आपूर्ति और अधिक आय सुनिश्चित करना है.

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत गुजरात में न्यूनतम 20 टन क्षमता के आइस प्लांट और स्टोरेज यूनिट के निर्माण के लिए वित्तीय सहायता दी जा रही है. इसका उद्देश्य मछली को स्वस्थ और स्वच्छ अवस्था में संरक्षित कर बेहतर आपूर्ति और अधिक आय सुनिश्चित करना है.

author-image
Ravi Prashant
New Update
PMMSY

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना Photograph: (Grok AI)

गुजरात सरकार के कृषि, किसान कल्याण और सहकारिता विभाग द्वारा लागू की जा रही प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना का एक महत्वपूर्ण घटक न्यूनतम 20 टन क्षमता के आइस प्लांट और स्टोरेज यूनिट का निर्माण है. यह योजना राज्य में मत्स्य भंडारण और कोल्ड चेन अवसंरचना को सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है. योजना का उद्देश्य मछली को लंबे समय तक स्वस्थ और स्वच्छ अवस्था में सुरक्षित रखना है ताकि उपभोक्ताओं तक गुणवत्तापूर्ण उत्पाद पहुंच सके और मछुआरों व विक्रेताओं को बेहतर मूल्य प्राप्त हो.

Advertisment

गुजरात में समुद्री मत्स्य उत्पादन की स्थिति

गुजरात देश के अग्रणी समुद्री मत्स्य उत्पादक राज्यों में शामिल है. अरब सागर से लगती लंबी तटरेखा के कारण यहां बड़े पैमाने पर समुद्री मछली का उत्पादन होता है. इसके बावजूद राज्य का निर्यात संभावनाओं के अनुरूप नहीं हो पा रहा है. इसका प्रमुख कारण अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप भंडारण और कोल्ड चेन सुविधाओं की कमी है. मछली के उचित तापमान पर संरक्षण के अभाव में गुणवत्ता प्रभावित होती है, जिससे निर्यात में बाधाएं आती हैं.

योजना का उद्देश्य और आवश्यकता

इस योजना का मुख्य उद्देश्य कोल्ड स्टोरेज और आइस प्लांट के आधुनिकीकरण को बढ़ावा देना है. मछली को पकड़ने के बाद यदि सही तापमान और स्वच्छ वातावरण न मिले तो उसकी गुणवत्ता तेजी से गिरती है. न्यूनतम 20 टन क्षमता की भंडारण सुविधा से मछली को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकेगा. इससे न केवल स्थानीय बाजार में बल्कि अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी गुणवत्ता युक्त मछली की आपूर्ति संभव होगी.

परिवहन और मार्केटिंग में सुधार

योजना के अंतर्गत केवल आइस प्लांट और स्टोरेज ही नहीं बल्कि इंसुलेटेड वाहन, आइस बॉक्स युक्त तीन पहिया वाहन, ई-रिक्शा और लाइव फिश वेंडिंग सेंटर जैसी सुविधाओं को भी बढ़ावा दिया जा रहा है. इन संसाधनों के माध्यम से मछली को उत्पादन स्थल से उपभोक्ता तक स्वच्छ और सुरक्षित तरीके से पहुंचाया जा सकेगा. इससे उपभोक्ताओं को ताजा और स्वास्थ्यकर मछली मिलेगी और विक्रेताओं की आय में भी वृद्धि होगी.

वित्तीय सहायता और इम्प्लिमेंटेशन

योजना के तहत लाभार्थियों को आइस प्लांट और स्टोरेज यूनिट के निर्माण के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है. इस परियोजना में कुल लागत का 60 प्रतिशत योगदान भारत सरकार और 40 प्रतिशत योगदान राज्य सरकार द्वारा दिया जाता है. योजना का क्रियान्वयन राज्य सरकारों के मत्स्य आयुक्त के माध्यम से किया जा रहा है ताकि लाभ सीधे पात्र हितधारकों तक पहुंच सके.

मछुआरों और अर्थव्यवस्था को लाभ

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना का यह घटक मछुआरों, व्यापारियों और मत्स्य क्षेत्र से जुड़े उद्यमियों के लिए लाभकारी साबित होगा. बेहतर भंडारण और परिवहन सुविधाओं से अपव्यय कम होगा, आय बढ़ेगी और राज्य की समुद्री अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी. साथ ही, गुजरात को वैश्विक मत्स्य बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाने में भी यह योजना महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी.

ये भी पढ़ें- दुग्ध व्यवसाय को बढ़ावा, गुजरात सरकार की 1 से 20 मिल्क एनिमल फार्म योजना

gujarat
Advertisment