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गुजरात सरकार (ये एआई इमेज है) Photograph: (GROK AI)
गंभीर बीमारियों का असर अक्सर पूरे परिवार पर पड़ता है और इसका सबसे बड़ा प्रभाव बच्चों की पढ़ाई पर दिखाई देता है. कई बार आर्थिक परेशानियों या सामाजिक परिस्थितियों के कारण बच्चों को स्कूल या कॉलेज छोड़ना पड़ जाता है. ऐसी ही समस्याओं को ध्यान में रखते हुए गुजरात सरकार ने सेरो पॉजिटिव इलनेस स्कीम शुरू की है. यह योजना साल 2009 में शुरू की गई थी और इसे सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग द्वारा संचालित किया जाता है. इस योजना का मुख्य उद्देश्य उन बच्चों की शिक्षा को जारी रखना है जो खुद HIV से प्रभावित हैं या जिनके माता-पिता इस बीमारी से जूझ रहे हैं. सरकार का लक्ष्य है कि बीमारी किसी भी बच्चे के भविष्य और शिक्षा के रास्ते में रुकावट न बने.
किन छात्रों को मिलता है योजना का लाभ
इस योजना का लाभ उन बच्चों को दिया जाता है जो HIV से प्रभावित हैं या जिनके माता-पिता में से कोई एक या दोनों इस बीमारी से प्रभावित हैं. इसके साथ ही छात्र का किसी मान्यता प्राप्त स्कूल या कॉलेज में पढ़ना जरूरी है. यह योजना पहली कक्षा से लेकर उच्च शिक्षा जैसे ग्रेजुएशन, प्रोफेशनल कोर्स और पोस्ट ग्रेजुएशन तक के छात्रों के लिए लागू है. सरकार इस योजना में विशेष रूप से अनाथ और बेसहारा बच्चों को प्राथमिकता देती है, ताकि वे आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद अपनी पढ़ाई जारी रख सकें.
स्कूल स्तर के छात्रों को मिलने वाली सहायता
स्कूल में पढ़ने वाले छात्रों के लिए सरकार ने अलग-अलग कक्षाओं के अनुसार आर्थिक सहायता तय की है. कक्षा 1 से 5 तक के छात्रों को यूनिफॉर्म के लिए ₹500 और सालाना ₹1,500 की अतिरिक्त सहायता दी जाती है. वहीं कक्षा 6 से 10 तक पढ़ने वाले छात्रों को ड्रेस के लिए ₹1,000 और ₹1,500 सालाना सहायता मिलती है. कक्षा 11 और 12 के छात्रों को फीस और किताबों के लिए ₹4,000 सालाना मिलते हैं. अगर छात्र होस्टल में रहकर पढ़ाई कर रहा है, तो उसे ₹10,000 तक की सहायता दी जाती है.
कॉलेज शिक्षा के लिए बढ़ी आर्थिक मदद
स्कूल के बाद कॉलेज की पढ़ाई अक्सर महंगी हो जाती है. इस वजह से योजना में कॉलेज छात्रों के लिए अधिक सहायता का प्रावधान किया गया है. ग्रेजुएशन जैसे B.A., B.Com. या B.Sc. कर रहे छात्रों को सालाना ₹6,000 की सहायता दी जाती है. यदि छात्र होस्टल में रहकर पढ़ाई करता है, तो यह राशि ₹12,000 तक हो जाती है. इस राशि का उपयोग फीस, किताबों और रहने के खर्चों को कम करने के लिए किया जाता है.
प्रोफेशनल कोर्स के छात्रों के लिए विशेष सहायता
इंजीनियरिंग, कानून, मैनेजमेंट और मेडिकल जैसे प्रोफेशनल कोर्स की फीस काफी ज्यादा होती है. ऐसे छात्रों को सरकार की ओर से अधिक आर्थिक सहायता दी जाती है. डे स्कॉलर छात्रों को सालाना ₹10,000 तक की सहायता दी जाती है, जबकि होस्टल में रहने वाले छात्रों को ₹16,000 तक की मदद मिलती है. इस राशि में किताबों, फीस और होस्टल से जुड़े खर्च शामिल होते हैं ताकि छात्र बिना आर्थिक दबाव के अपनी पढ़ाई जारी रख सकें.
पोस्ट ग्रेजुएशन के छात्रों के लिए भी सहायता
जो छात्र अपनी पढ़ाई को आगे बढ़ाकर M.Sc., M.Phil., LLM, MBA या M.Ed. जैसे कोर्स कर रहे हैं, उन्हें भी इस योजना के तहत आर्थिक सहायता मिलती है. इन छात्रों को भी सालाना ₹10,000 से लेकर ₹16,000 तक की सहायता प्रदान की जाती है, जिससे वे अपनी मास्टर डिग्री पूरी कर सकें.
आवेदन के लिए जरूरी दस्तावेज?
योजना का लाभ लेने के लिए कुछ जरूरी दस्तावेज जमा करना अनिवार्य है. इसमें छात्र और माता-पिता का आधार कार्ड, जन्म प्रमाण पत्र, सिविल सर्जन द्वारा जारी मेडिकल सर्टिफिकेट, पिछली कक्षा की मार्कशीट, राशन कार्ड और स्कूल छोड़ने का प्रमाण पत्र शामिल हैं.
अप्लाई करने का प्रोसेस?
इस योजना के लिए आवेदन प्रक्रिया ऑफलाइन है. इच्छुक छात्र या उनके अभिभावक अपने जिले के जिला समाज सुरक्षा अधिकारी या जिला बाल सुरक्षा अधिकारी के कार्यालय में जाकर आवेदन कर सकते हैं. वहां से आवेदन फॉर्म प्राप्त करके उसमें आवश्यक जानकारी भरनी होती है और सभी जरूरी दस्तावेजों की प्रतियां लगाकर फॉर्म जमा करना होता है.
शिक्षा को रोकने नहीं देगी बीमारी
गुजरात सरकार की सेरो पॉजिटिव इलनेस स्कीम उन बच्चों के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है जिनकी शिक्षा बीमारी के कारण प्रभावित हो सकती है. यह योजना न केवल आर्थिक सहायता देती है बल्कि यह संदेश भी देती है कि हर बच्चे को शिक्षा का समान अधिकार है. सही जानकारी और समय पर आवेदन के जरिए कई बच्चे अपने सपनों को पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं.
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