साहित्य अकादमी में आयोजित हुआ तथागत सम्मान समारोह, दो साहित्यकार हुए सम्मानित

नई दिल्ली के साहित्य अकादेमी सभागार में आयोजित समारोह में केरल के वरिष्ठ हिन्दी साहित्यकार ए. अरविंदाक्षन और अरुणाचल प्रदेश की युवा कवयित्री जमुना बीनी को तथागत साहित्य सम्मान प्रदान किया गया. यह सम्मान प्रख्यात साहित्यकार रामदरश मिश्र की स्मृति में दिया गया.

नई दिल्ली के साहित्य अकादेमी सभागार में आयोजित समारोह में केरल के वरिष्ठ हिन्दी साहित्यकार ए. अरविंदाक्षन और अरुणाचल प्रदेश की युवा कवयित्री जमुना बीनी को तथागत साहित्य सम्मान प्रदान किया गया. यह सम्मान प्रख्यात साहित्यकार रामदरश मिश्र की स्मृति में दिया गया.

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Ravi Prashant
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Tathagat Sahitya Samman

तथागत साहित्य सम्मान Photograph: (तथागत ट्रस्ट)

नई दिल्ली के साहित्य अकादमी सभागार में 24 जनवरी 2026 को एक शानदार समारोह का आयोजन किया गया. इस खास मौके पर केरल के सीनियर लेखक ए. अरविंदाक्षन और अरुणाचल प्रदेश की युवा कवयित्री जमुना बीनी को उनके बेहतरीन योगदान के लिए तथागत साहित्य सम्मान से नवाजा गया.

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सम्मान के पीछे का मकसद

कार्यक्रम की शुरुआत बहुत ही खूबसूरत रही. महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' की सरस्वती वंदना पर एक कथक डांस पेश किया गया. इस परफॉर्मेंस ने समारोह में आए सभी लोगों का मन मोह लिया और पूरे माहौल को साहित्यिक रंग में रंग दिया. तथागत ट्रस्ट के संरक्षक एन.पी. सिंह ने अपने संबोधन में बताया कि यह सम्मान मशहूर साहित्यकार रामदरश मिश्र की याद में दिया जाता है. उन्होंने कहा कि ट्रस्ट का मुख्य मकसद उत्तर और दक्षिण भारत की भाषाओं और संस्कृतियों को एक-दूसरे के करीब लाना है. इसके साथ ही उन्होंने ट्रस्ट की सामाजिक और एजुकेशनल एक्टिविटीज के बारे में भी जानकारी दी.

दिग्गज साहित्यकारों ने रखे विचार

इस मौके पर अनामिका, ओम निश्चल, अशोक वाजपेयी और चंद्रकांता जैसे बड़े विद्वान मौजूद रहे. इन लेखकों ने सम्मानित होने वाले दोनों रचनाकारों के काम की तारीफ की. उन्होंने कहा कि आज के दौर में इनकी रचनाएं हिंदी साहित्य के लिए एक बड़ी धरोहर हैं.

समाज का आईना दिखाती रचनाएं

समारोह में ए. अरविंदाक्षन की किताब ‘धड़कनों के भीतर जाकर’ और जमुना बीनी के कविता संग्रह ‘जब आदिवासी गाता है’ की खूब चर्चा हुई. वक्ताओं ने कहा कि जमुना की कविताओं में आदिवासी समाज की चेतना है, तो अरविंदाक्षन के काम में इंसानी भावनाओं की गहराई. ये किताबें समाज की सच्चाई को बहुत ही मजबूती से पेश करती हैं.

संस्कृति को जोड़ने की पहल

इस आयोजन को केवल एक अवॉर्ड फंक्शन के रूप में नहीं, बल्कि भारतीय साहित्य को आपस में जोड़ने वाले एक पुल की तरह देखा गया. जानकारों का कहना है कि ऐसे आयोजनों से अलग-अलग भाषाओं और संस्कृतियों के बीच संवाद बढ़ता है और पूरे भारतीय साहित्य को एक नई ऊर्जा मिलती है.

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