News Nation Logo

नीति आयोग के सवाल पर रेलवे ने कहा, 3 साल में ‘अतिक्रमण, अप्रिय हादसों’ में हुई 29-30 हजार मौत

रेलवे के पिछले वित्त वर्ष में शून्य मौत के दावे पर नीति आयोग द्वारा सवाल उठाए जाने के बाद रेलवे ने बृहस्पतिवार को कहा कि बीती तीन वर्षों के दौरान उसके परिसरों में “अतिक्रमण और अन्य अप्रिय घटनाओं” में करीब 29-30 हजार लोगों की मौत हुई.

Bhasha | Updated on: 20 Aug 2020, 07:49:21 PM
Indian Railway

प्रतीकात्मक फोटो। (Photo Credit: फाइल फोटो)

दिल्ली:

रेलवे के पिछले वित्त वर्ष में शून्य मौत के दावे पर नीति आयोग द्वारा सवाल उठाए जाने के बाद रेलवे ने बृहस्पतिवार को कहा कि बीती तीन वर्षों के दौरान उसके परिसरों में “अतिक्रमण और अन्य अप्रिय घटनाओं” में करीब 29-30 हजार लोगों की मौत हुई. नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अमिताभ कांत द्वारा रेलवे के दावों को संज्ञान में लेने और आंकड़ों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने के बाद रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष वी के यादव की तरफ से यह स्पष्टीकरण आया.

यह भी पढ़ें- व्यापार के अवसरों को एक्सप्लोर करेंगे उत्तर प्रदेश और फ्रांस

कांत ने कहा था कि मुंबई उपनगरीय खंड पर ही प्रतिवर्ष हजारों मौत होती हैं. नीति आयोग के सीईओ ने एक पत्र में यादव को कहा, “मैं आपका ध्यान इस तथ्य की तरफ आकृष्ट करना चाहूंगा कि इन मौतों में से बहुत सी ट्रेन से या प्लेटफॉर्म से पटरी पर गिरने से होती हैं. इसलिये उन्हें राष्ट्रीय रेल संरक्षण कोष के दायरे से बाहर नहीं रखा जाना चाहिए.

यह भी पढ़ें- 'ट्रेजेडी क्वीन' मीना कुमारी की जिंदगी पर बनेगी वेब सीरीज

आदर्श रूप से उन्हें आधिकारिक रूप से दर्ज करना चाहिए.” यादव ने बृहस्पतिपार को एक प्रेस वार्ता में कहा कि रेलवे सभी मौतों का हिसाब रखता है जो उसके परिसर में होती हैं. इन्हें तीन अलग शीर्षकों- परिणामी दुर्घटनाएं, अतिक्रमण और अप्रिय घटनाओं- में दर्ज किया जाता है. उन्होंने कहा, “यह सच है कि 20109-20 में परिणामी दुर्घटनाएं वास्तव में शून्य रहीं और इस साल भी.” उन्होंने कहा, “बीते तीन वर्षों में 29 से 30 हजार लोगों की मौत या तो अतिक्रमण या अप्रिय घटनाओं के कारण हुई.” उन्होंने कहा कि यह आंकड़ा हम नीति आयोग को देंगे.’’

LIVE TV NN

NS

NS

First Published : 20 Aug 2020, 07:49:21 PM

For all the Latest States News, Delhi & NCR News, Download News Nation Android and iOS Mobile Apps.