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निर्भया के दोषियों की चाल नाकाम, दिल्ली HC ने कहा- हम फांसी पर रोक नहीं लगा पाएंगे

निर्भया के दोषियों ने आखिरी समय में फांसी से बचने के लिए नई चाल चली है, जिसे दिल्ली हाई कोर्ट ने फेल कर दिया है.

Updated on: 20 Mar 2020, 01:18 AM

नई दिल्ली:

निर्भया (Nirbhaya Case) के दोषियों ने आखिरी समय में फांसी से बचने के लिए नई चाल चली है, जिसे दिल्ली हाई कोर्ट ने फेल कर दिया है. दोषी पवन (Pawan) के वकील एपी सिंह ने दिल्ली हाई कोर्ट में पटियाला हाउस कोर्ट के आदेश को चुनौती दी है. दिल्ली हाई कोर्ट ने साफ कहा कि हम फांसी पर रोक नहीं लगा पाएंगे. एडवोकेट एपी सिंह (AP Singh) ने दिल्ली हाई कोर्ट में दलील देते हुए कहा कि ट्रायल कोर्ट ने हमारी याचिका पेंडिंग रहते हुए भी डेथ वारंट पर रोक नहीं लगाई है. इस पर कोर्ट ने कहा कि ये कैसी याचिका है. इसमें कोई डेट की लिस्ट नहीं है, पक्षकार किनको बनाया गया, उसका कोई ब्यौरा नहीं है. आपको ऐसी याचिका दाखिल करने की इजाजत कैसे मिल गई.

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इसके बाद तिहाड़ जेल की ओर से राहुल मेहरा ने कहा कि हमें तो इस बात की भी जानकारी नहीं है कि याचिकाकर्ता कौन है. याचिका में सिर्फ लिख दिया गया है- पवन और बाकी लोगों की ओर से. अदालत दोषियों के वकील से उनकी याचिका दायर करने की तारीख और बाकी जानकारी मांग रही है. इस पर वकील राहुल मेहरा ने कहा कि याचिका सुनवाई लायक नहीं है. सारे कानूनी राहत के विकल्प खत्म चुके हैं.

दोषी पवन के एपी सिंह ने मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट का हवाला देते हुए अर्जी दायर की. उन्होंने कहा कि उस वक्त सतेंद्र जैन डिल्ली के गृह मंत्री की हैसियत नहीं थी. कोर्ट ने ऐतराज जाहिर किया. कहा- चुनाव आयोग का यहां कोई लेना-देना नहीं है. आपके सारे विकल्प खत्म हो चुके हैं. आपका केस अंतिम पड़ाव को पार कर चुका है. अब हम फिर से आपके केस को रिव्यु नहीं करने जा रहे हैं. हम डेथ वारंट पर रोक नहीं लगाने जा रहे हैं.

एपी सिंह ने आगे कहा कि अभी भी याचिका लम्बित हैं. पवन गुप्ता ने कड़कड़डूमा कोर्ट में मंडोली जेल में पुलिसकर्मियों की पिटाई को लेकर याचिका दायर की है. कोर्ट ने उस पर ATR मांगी है. उसके शरीर पर 14 टांके आए हैं. ठीक है, वो फांसी की सजा पाया शख्स है, पर इस मामले में वो पीड़ित है. ये नाइंसाफी होगी. अगर इस मामले में बिना इंसाफ किए फांसी पर लटका दिया जाए. उसे आरोपी पुलिस कर्मियों की शिनाख्त करने दे.

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वकील एपी सिंह बोले- मेरे किसी भी मुवक्किल का कोई पुराना आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है

एपी सिंह ने कहा कि मेरे किसी भी मुवक्किल का कोई पुराना आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है. उन्होंने कहा कि इस मामले में जिस गवाह की गवाही को आधार बनाया ( लडक़ी का दोस्त) वो खुद विश्वनीय नहीं है. अजित अंजुम के ट्वीट के हवाला दिया. कहा- उसने पैसे लेकर इंटरव्यू दिए हैं, लेकिन मीडिया ने इसलिए ये सब उजागर नहीं किया, क्योंकि उन्हें सच सामने आने पर ट्रायल प्रभावित होने का अंदेशा था.

जस्टिस मनमोहन ने कहा- हम आपकी सहायता नहीं कर पाएंगे

जस्टिस मनमोहन ने कहा कि हम आपकी सहायता नहीं कर पाएंगे अगर आप ऐन वक्त पर ऐसी निरर्थक बातें करेंगे. आपके पास सिर्फ 5-6 घंटे का वक्त है. अगर कोई ज़रूरी बात है तो उसे कहिए. जज ने कहा कि आप समझने की कोशिश कीजिए. सिर्फ महत्वपूर्ण तथ्य है तो ही रखिए. आपके मुवक्किल की ईश्वर से मुलाकात होने में अब ज्यादा वक्त नहीं बचा है. आप ऐन मौके पर आए हैं. अब तो कुछ महत्वपूर्ण बात रखिए.

एसपी सिंह बोले- कोरना वायरस की वजह से मैं बहुत असहाय महसूस कर रहा हूं

वकील ने कहा कि कोरना वायरस की वजह से मैं बहुत असहाय महसूस कर रहा हूं. मैं महत्वपूर्ण दस्तावेजों की फोटो कॉपी नहीं करवा पाया. दिल्ली सरकार के वकील राहुल मेहरा ने कहा कि कोरना वायरस ने इन्होंने एक वजह फांसी की सज़ा पर रोक लगाने के कारण में भी गिनाई है. एपी सिंह बार-बार पुरानी दलीलें दोहरा रहे हैं. कह रहे हैं कि दो हफ्ते का वक्त दे दीजिए. सारे महत्वपूर्ण दस्तावेजों की फोटो कॉपी मैं जमा करा दूंगा. आज मुझे वक्त नहीं मिल पाया.

इस पर जस्टिस मनमोहन ने कहा- हम आपको यूं सिस्टम से खेलने की इजाजत नहीं दे सकते हैं पिछले ढाई साल से आप क्या कर रहे थे. जिन चीजों पर सुप्रीम कोर्ट फैसला दे चुका है, उनका हम रिव्यु नहीं कर सकते हैं. कोई नई बात हो तो कहिए.

एपी सिंह ने फिर पवन के नाबालिग होने का दावा किया. कहा- स्कूल सर्टिफिकेट देखिए. तय हो जाएगा कि वो बालिग है या नहीं. कोर्ट ने फिर दोहराया- इस दलील को भी SC खारिज कर चुका है. एपी सिंह ने कहा- लेकिन ये किसी की ज़िंदगी का सवाल है. जल्दबाजी में किया न्याय, इंसाफ तो नहीं हो सकता है. आप 1-2 दिन के लिए सुनवाई टाल दीजिए. जज ने कहा कि ये चौथा डेथ वारंट है. इसकी कोई तो अहमियत होनी चाहिए.

दिल्ली सरकार के वकील राहुल मेहरा ने कहा कि HC भी इसलिए अहमियत दे रहा है क्योंकि ये चार लोगो की ज़िंदगी का मसला है और हम भी इंसानी ज़िंदगी की अहमियत समझते हैं, लेकिन दूसरे पक्ष को कोई तो गम्भीर बात कहनी चाहिए.

अब दोषियों की ओर से दूसरे वकील ने बोलना शुरू किया है. उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ने दया याचिका खारिज करते हुए सभी तथ्यों पर गौर नहीं किया है. वकील शम्स ख्वाजा ने हाई कोर्ट में दिसंबर 2019 की मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि राष्ट्रपति पहले ही मीडिया को बयान दे चुके हैं कि रेपिस्ट किसी माफी के हकदार नहीं है. वो पहले ही अपना मन बना चुके थे.

कोर्ट ने कहा कि आप ऐसे बहस कर रहे हैं, जैसे मामला पहली बार अदालत में आया हो. आखिरी वक्त आ चुका है. अब सिर्फ ज़रूरी बात रखिए. वर्ना ऐसे तो सुनवाई साढ़े पांच बजे के बाद भी होती रहेगी.