दिल्ली का किंडरगार्टन  कैसे बना 4 साल के मासूम के लिए कथित यातना केंद्र? बच्चे को अंधेरे बंद कमरे में बंद करने का आरोप!

परिजनों के आरोप हैं कि बच्चे को उसी स्कूल के एक हिस्से में अंधेरे कमरे यानी “डार्क रूम” में बंद किया जाता था.

परिजनों के आरोप हैं कि बच्चे को उसी स्कूल के एक हिस्से में अंधेरे कमरे यानी “डार्क रूम” में बंद किया जाता था.

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Vishal Pandey
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Representative image (Credit-Pexels)

राजधानी दिल्ली के चाणक्य पुरी स्थित एक प्राइवेट किंडरगार्टन ओ ग्राहंडाएर  बेबी डू  पर 4 साल के मासूम बच्चे के साथ कथित प्रताड़ना और लापरवाही के गंभीर आरोप लगे हैं. यह मामला उस वक्त सुर्खियों में आया जब बच्चे की मां  ने दावा किया कि उनके बेटे को स्कूल के ही एक “डार्क रूम” में बंद किया जाता था और उसके शरीर व चेहरे पर बार-बार चोट के निशान दिखाई देते थे.

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परिवार के मुताबिक बच्चे का एडमिशन साल 2023 में करवाया गया था, तब उसकी उम्र महज 2.5 साल थी. अब बच्चा 4  साल का हो चुका है. माता-पिता का कहना है कि शुरुआती दिनों से ही उन्हें बच्चे के व्यवहार में बदलाव नजर आने लगा था, वह डरा-सहमा रहता था, किंडरगार्टन जाने से घबराता था और कई बार स्कूल से लौटने के बाद बच्चा अचानक रोने लगता था.

जानिए बच्चे के ऊपर चोट के निशान पर प्ले स्कूल का जवाब

परिवार का आरोप है कि कई बार बच्चे के हाथ, पैर और चेहरे पर चोट के निशान होते थे. जब भी उन्होंने प्ले स्कूल प्रशासन से सवाल किया तो उन्हें हमेशा बताया गया कि “बच्चे खेलते हैं, गिर जाते हैं, इसलिए चोट लग जाती है.”माता-पिता का आरोप है कि उन्हें यह जवाब संतोषजनक नहीं लगा. परिवार का दावा है कि चोटों के निशान और बच्चे के अंदर डर को देखते हुए उन्हें लगा कि मामला सिर्फ खेलते समय लगी मामूली चोट का नहीं है बल्कि इससे ज्यादा का है.

स्कूल प्रशासन पर बच्चे को ‘डार्क रूम’ में बंद करने का गंभीर आरोप

परिजनों के आरोप हैं कि बच्चे को उसी स्कूल के एक हिस्से में अंधेरे कमरे यानी “डार्क रूम” में बंद किया जाता था. परिवार का आरोप है कि बच्चे को जब स्कूल से वापस लेकर आते थे तब वह हमेशा डरा हुआ रहता था जिससे हमें लगता था की कुछ तो गलत हो रहा है. 


प्ले स्कूल ने CCTV फुटेज दिखाने से किया इनकार, जांच कर रही दिल्ली पुलिस पर भी उठे सवाल

परिजनों का दावा है कि परिवार ने स्कूल से कई बार CCTV फुटेज दिखाने के लिए कहा लेकिन हर बार किसी न किसी बहाने से CCTV फुटेज नहीं दिखाई गई. बता दें यह पूरा मामला दिल्ली के तुगलक रोड थाने का है. परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने उनके कई बार कहने के बावजूद इस मामले में FIR दर्ज नहीं की. परिजनों का आरोप है कि दिल्ली पुलिस इस पूरे मामले में लापरवाही बरत रही है.  

NCPCR के डीएम को भेजे गए नोटिस के बाद नई दिल्ली DM ने बनाई जांच कमेटी

इस पूरे मामले में परिवार ने राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) में शिकायत की. इस शिकायत के बाद एनसीपीसीआर ने इस केस में संज्ञान लिया और नोटिस जारी किया. इसके बाद नई दिल्ली के जिला मजिस्ट्रेट (DM) ने मामले की जांच के लिए एक कमेटी का गठन किया है. बता दें यह कमेटी स्कूल परिसर, सुरक्षा व्यवस्था, CCTV रिकॉर्ड, स्टाफ की भूमिका और बच्चे के साथ हुए कथित व्यवहार की जांच करेगी. रिपोर्ट के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की रूपरेखा तय की जाएगी.

अभी तक स्कूल की तरफ से कोई जवाब नहीं आया

न्यूज नेशन ने  ओ ग्राहंडाएर  बेबी डू के प्रबंधन से संपर्क कर उनका पक्ष जानने की कोशिश की लेकिन खबर लिखे जाने तक उनकी ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली. स्कूल प्रबंधन का पक्ष सामने आने के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर साफ हो पाएगी.

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