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दिल्ली सरकार Photograph: (ANI)
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अगुवाई में मंगलवार को हुई वित्त व्यय समिति की बैठक में एक ऐतिहासिक फैसला लिया गया. सरकार ने नजफगढ़ नाले के साथ करीब 61 किलोमीटर लंबी सड़क बनाने के प्रोजेक्ट को हरी झंडी दे दी है. इस पूरे काम पर करीब 453.95 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है.
इस प्रोजेक्ट के तहत झटीकरा ब्रिज से छावला ब्रिज तक नाले के एक तरफ और छावला से बसईदारापुर तक नाले के दोनों तरफ सड़कों का जाल बिछाया जाएगा. इस पूरे कॉरिडोर की कुल लंबाई 60.77 किमी होगी.
सफर होगा आसान?
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि इस सड़क का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि दिल्ली की मुख्य सड़कों पर गाड़ियों का दबाव कम होगा. इससे लोगों के सफर का समय बचेगा, पेट्रोल-डीजल कम खर्च होगा और गाड़ियों से निकलने वाले धुएं में भी कमी आएगी. यह रास्ता दिल्ली के अंदर आने-जाने के लिए एक नया और बेहतरीन विकल्प साबित होगा.
इन बड़े रास्तों से होगी सीधी कनेक्टिविटी
- यह कॉरिडोर दिल्ली की लगभग सभी प्रमुख सड़कों को आपस में जोड़ देगा.
- इनर और आउटर रिंग रोड: बसईदारापुर और केशोपुर के पास इन प्रमुख सड़कों से सीधा जुड़ाव होगा.
- नजफगढ़ और पंखा रोड: ककरोला और विकासपुरी के पास कनेक्टिविटी मिलेगी.
- एयरपोर्ट और द्वारका एक्सप्रेसवे: धूलसिरस के पास UER-II से जुड़ने के कारण एयरपोर्ट जाना बहुत आसान हो जाएगा.
इन इलाकों के लोगों को मिलेगा फायदा
इस सड़क के बनने से उत्तम नगर, विकासपुरी, नजफगढ़, बिजवासन, छावला, द्वारका, निलोठी, पश्चिम विहार और राजौरी गार्डन जैसे इलाकों में रहने वाले लाखों लोगों की जिंदगी आसान हो जाएगी. साथ ही, यह हरियाणा के गुरुग्राम (सेक्टर 104 और 110) के साथ दिल्ली के संपर्क को और मजबूत करेगा.
रियाली और आधुनिक सुविधाओं का संगम
यह सिर्फ एक सड़क नहीं होगी, बल्कि इसे एक 'ग्रीन कॉरिडोर' के रूप में विकसित किया जाएगा. पैदल चलने, जॉगिंग और साइकिल चलाने के लिए अलग रास्ते होंगे. बेहतर स्ट्रीट लाइट, साइनबोर्ड और पानी की निकासी (ड्रेनेज) का पुख्ता इंतजाम होगा ताकि बारिश में पानी न भरे. सड़क के किनारे बड़े पैमाने पर पेड़-पौधे लगाए जाएंगे और लैंडस्केपिंग की जाएगी.
कब तक बनकर होगा तैयार?
सरकार ने इस प्रोजेक्ट के लिए एक टाइमलाइन तय की है. मार्च-अप्रैल 2026 में कागजी कार्यवाही और टेंडर का काम पूरा होगा. मई 2026 में सड़क बनाने का काम शुरू हो जाएगा. नवंबर 2027 में इस प्रोजेक्ट को पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. इस बैठक में सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण मंत्री प्रवेश साहिब सिंह भी मौजूद थे. प्रोजेक्ट को तकनीकी समिति और बाढ़ नियंत्रण बोर्ड से पहले ही हरी झंडी मिल चुकी है.
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