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बिहार उपचुनाव में करेंगे बीजेपी के लिए प्रचार : चिराग पासवान

News Nation Bureau | Edited By : Pradeep Singh | Updated on: 30 Oct 2022, 06:48:05 PM
chirag paswan

चिराग पासवान (Photo Credit: News Nation)

नई दिल्ली:  

बिहार में एक बार फिर राजनीतिक समीकरण करवट ले रहा है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के एनडीए गठबंधन से अलग होने के बाद राज्य में भाजपा अकेली पड़ गई थी. लेकिन अब कुछ छोटे दल उसके साथ फिर से आले को तैयार हैं. इसकी शुरुआत चिराग पासवान करने जा रहे हैं. अभी वह एनडीए मे तो शामिल नहीं हुए हैं. लेकिन विधानसभा उपचुनाव में वह भाजपा उम्मीदवारों के समर्थन में प्रचार करने को तैयार हो गए हैं. चिराग पासवान ने रविवार को अपनी महत्वाकांक्षा को दरकिनार कर दिया और घोषणा की कि वह राज्य में दो विधानसभा क्षेत्रों के उपचुनावों में भगवा पार्टी के लिए प्रचार करेंगे.

चिराग पासवान, जो अपने दिवंगत पिता रामविलास पासवान द्वारा स्थापित लोक जनशक्ति पार्टी के एक अलग समूह के प्रमुख हैं, दिल्ली से आने पर यहां हवाई अड्डे पर पत्रकारों से बात कर रहे थे.

जमुई के 39 वर्षीय सांसद पत्रकारों से कहा, “लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) मोकामा और गोपालगंज के उपचुनाव में भाजपा के लिए प्रचार करेगी. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ शनिवार रात लंबी बैठक के बाद फैसला लिया गया है, जिनके साथ मैं काफी समय से संपर्क में हूं.

पासवान ने इस सवाल को टाल दिया कि क्या उन्होंने अपने चाचा पशुपति कुमार पारस के एनडीए से निष्कासन का आग्रह छोड़ दिया था, जिनके पिछले साल विद्रोह के कारण उनके पिता द्वारा स्थापित पार्टी में विभाजन हुआ था.

चिराग ने कहा, “मैं अभी केवल मोकामा और गोपालगंज के उपचुनाव के बारे में बोल रहा हूं. हमें किसी निर्णय पर पहुंचने में काफी समय लगा. अभियान समाप्त होने में महज दो दिन शेष हैं. हमारी पार्टी भाजपा उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित करने की पूरी कोशिश करेगी."

ऐसी अटकलें लगाई जा रही थीं कि पासवान, जिनके पिता ने अपनी मृत्यु तक केंद्रीय मंत्रिपरिषद में पद संभाला था, को भी अगले फेरबदल में मंत्री बनाने पर विचार किया जा सकता है, ताकि लोजपा को विभाजित करने के बाद पारस के कैबिनेट में प्रवेश करने पर उन्हें जो अपमान महसूस हुआ, उसे शांत किया जा सके. 

पासवान ने किसी भी "इनाम" का कोई सीधा संदर्भ नहीं दिया, जो उनके लिए इंतजार कर रहा हो सकता है, लेकिन कुछ संकेत यह कहते हुए छोड़ दिए कि "ऐसे कई बिंदु थे जिन पर मैंने शाह के साथ चर्चा की. उनके और हमारे सम्मानित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अगले महीना एक बैठक निर्धारित है."

उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ भी अपनी नाराजगी जारी रखी, जिनका जद (यू) आरोप लगाता रहा है कि 2020 के विधानसभा चुनावों में भाजपा द्वारा "चिराग मॉडल" का इस्तेमाल इसे कमजोर करने के लिए किया गया था.

उन्होंने कहा, 'मेरा हमेशा से मानना ​​रहा है कि नीतीश कुमार के पास मेरे गृह राज्य को पिछड़ेपन के दलदल से बाहर निकालने का विजन नहीं है. उनका 'सात निश्चय' कार्यक्रम एक छलावा है. पाइप से पानी और पक्की सड़कों जैसी बुनियादी जरूरतों को प्रगति के संकेतक के रूप में नहीं रखा जा सकता है", पासवान ने कहा, जिन्होंने तब अविभाजित लोजपा के अध्यक्ष के रूप में, उम्मीदवारों को मैदान में उतारकर जद (यू) की संख्या को गिरा दिया था, जिनमें से कई विधानसभा चुनाव में बीजेपी के बागी हैं.

उन्होंने कहा, “मेरा दृढ़ विश्वास है कि बिहार को बड़ा सोचने की जरूरत है. हमें आईटी क्षेत्र में शिक्षा और विकास का हब बनने की दिशा में काम करना चाहिए. यह मेरा बिहार फर्स्ट बिहारी फर्स्ट विजन था जिसका मुख्यमंत्री और उनकी पार्टी ने हमेशा अवमानना ​​किया है. मैं ऐसा कुछ नहीं कर सकता जिससे उनके सत्ता में बने रहने में मदद मिले." 

First Published : 30 Oct 2022, 06:48:05 PM

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