बिहार के शिक्षकों का हाल, आधे से ज्यादा गुरू जी पढ़ाने ही नहीं जाते, अब हुआ ये बड़ा आदेश

15 अगस्त के बाद प्राथमिक मध्य एवं उच्च विद्यालय में छात्रों की संख्या यदि कम रहती है तो प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी जिम्मेदार होंगे. जांच के क्रम में यदि दोषी पाए जाते हैं तो प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी का वेतन रोक दिया जाएगा.

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Shailendra Shukla
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बिहार के स्कूलों से गायब रहते हैं गुरू जी( Photo Credit : प्रतीकात्मक तस्वी)

बिहार में शिक्षकों द्वारा ड्यूटी करने में जमकर लापरवाही बरती जाती है. आलम ये हैं कि राज्य के आधे से ज्यादा टीचर बिना स्कूल आए ही सैलरी ले रहे हैं. दरअसल, शिक्षा विभाग द्वारा एक और आदेश जारी किया गया है जिसमें स्कूलों से गायब रहनेवाले शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई का जिम्मा जिला शिक्षा पदाधिकारी को सौंपा गया है. वहीं, 15 अगस्त के बाद प्राथमिक मध्य एवं उच्च विद्यालय में छात्रों की संख्या यदि कम रहती है तो प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी जिम्मेदार होंगे. जांच के क्रम में यदि दोषी पाए जाते हैं तो प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी का वेतन बंद किया जाएगा. माध्यमिक शिक्षा निदेशक कन्हैया श्रीवास्तव ने सभी जिला शिक्षा पदाधिकारी को पत्र जारी किया है.

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क्या लिखा है पत्र में? 

कन्हैया प्रसाद श्रीवास्तव, निदेशक (मा. शि.) के द्वारा सभी जिलों के जिला शिक्षा पदाधिकारियों को निर्देशित पत्र में लिखा गया है कि  राज्य के अंदर जिलों में हो रहे विद्यालयों के निरीक्षण से संबंधित प्रतिवेदनों की समीक्षा के क्रम में यह परिलक्षित हुआ है कि प्राथमिक, मध्य और माध्यमिक / उच्च माध्यमिक विद्यालयों में छात्रोपस्थिति में अपेक्षित सुधार हो रहा है. फिर भी यह तथ्य भी प्रकाश में आया है कि प्रखण्ड मुख्यालय जहाँ प्रखण्ड शिक्षा पदाधिकारी का कार्यालय अवस्थित है तथा उनकी प्रतिदिन की गतिविधियाँ जहाँ संचालित होती हैं, वहीं के कतिपय विद्यालयों में अभी भी उपस्थिति 50 प्रतिशत से कम है, जो विभाग के लिए चिन्ता का विषय है.

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पत्र में आगे लिखा गया है कि प्रतिवेदनों के विश्लेषण से यह भी स्पष्ट होता है कि प्रखण्ड शिक्षा पदाधिकारियों द्वारा अपने कार्यालय के इर्द-गिर्द अर्थात प्रखण्ड मुख्यालय में अवस्थित प्राथमिक से माध्यमिक स्तर तक के विद्यालयों में गुणात्मक निरीक्षण नहीं किया जा रहा है जिससे अपेक्षित परिणाम सामने नहीं आ रहे हैं.

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पत्र के बिंदु संख्या 02 में लिखा गया है कि  यह भी उल्लेखनीय है कि प्रखण्ड शिक्षा पदाधिकारियों के कार्यालयों के सुदृढ़ीकरण एवं निरीक्षण हेतु उन्हें पर्याप्त सुविधाएँ मुहैया करा दी गयी हैं. फिर भी, प्रखण्ड शिक्षा पदाधिकारियों द्वारा गुणात्मक निरीक्षण नहीं करना एवं कम-से-कम प्रखण्ड मुख्यालय अवस्थित विद्यालयों में छात्रोपस्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं होने के लिए प्रखण्ड शिक्षा पदाधिकारियों को जिम्मेवारी से मुक्त नहीं किया जा सकता है.

पत्र के विंदु संख्या 03 में लिखा गया है कि ऐसी स्थिति में, सम्पूर्ण तथ्यों पर सम्यक विचारोपरान्त निदेश दिया जाता है कि प्रखण्ड मुख्यालय में अवस्थित प्राथमिक, मध्य एवं माध्यमिक / उच्च माध्यमिक विद्यालयों में छात्रोपस्थिति 50 प्रतिशत से कम रहने की स्थिति में वहाँ प्रखण्ड शिक्षा पदाधिकारी की कार्य के प्रति लापरवाही मानते हुए उनका वेतन तत्काल प्रभाव से स्थगित रखने की कार्रवाई करना सुनिश्चित किया जाए.

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इसके अलावा पत्र के आखिरी विंदु संख्या 04 में लिखा गया है कि दिनांक 15.08.2023 के बाद प्रखण्ड के किसी भी प्राथमिक, मध्य एवं माध्यमिक / उच्च माध्यमिक विद्यालयों में 50 प्रतिशत से कम उपस्थिति रहने पर संबंधित प्रखण्ड शिक्षा पदाधिकारियों का वेतन स्थगित करते हुए उनके विरूद्ध कार्य के प्रति घोर लापरवाही एवं आदेश की अवहेलना का आरोप गठित करते हुए कारण पृच्छा करें तथा उक्त के आधार पर विभागीय कार्यवाही का प्रस्ताव विभाग को देना सुनिश्चित करेंगे.

IAS केके पाठक के कमान संभालने के बाद लिए जा रहे कड़े निर्णय

बता दें कि जब से शिक्षा विभाग के एसीएस के पद पर आईएएस केके पाठक की तैनाती बिहार सरकार द्वारा की गई है तभी से लगातार शिक्ष विभाग में एक के बाद एक धड़ाधड़ निर्णय लिए जा रहे हैं. 

HIGHLIGHTS

  • शिक्षा विभाग ने जारी किया एक और अहम आदेश
  • जिला शिक्षा पदाधिकारियों के लिए जारी किया गया आदेश
  • कोई भी शिक्षक ना मिले अनुपस्थित
  • प्रखंड शिक्षा प्रसार अधिकारी की जवाबदेही होगी तय
  • शिक्षक ड्यूटी से नदारद मिले तो BEO का कटेगा वेतन

Source : News State Bihar Jharkhand

Education Department of Bihar Education Department Bihar Education Department IAS KK pathak
      
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