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नीतीश को विश्वासमत, लालू बोले- भोग का मतलब CM से ज्यादा कौन समझता है

बिहार में महज 14 घंटे के अंतराल के बाद चार साल पुराने साथियों को साथ लेकर फिर मुख्यमंत्री बने नीतीश कुमार ने शुक्रवार को विधानसभा में विश्वासमत हासिल कर लिया।

News Nation Bureau | Edited By : Jeevan Prakash | Updated on: 28 Jul 2017, 11:57:47 PM
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (फोटो-PTI)

highlights

  • नीतीश कुमार ने 131 वोटों के साथ हासिल किया विश्वास मत, विरोध में पड़े 108 वोट
  • नीतीश का लालू-तेजस्वी पर हमला, कहा-सत्ता लोगों की सेवा के लिए होती है न कि 'मेवा' के लिए
  • लालू यादव बोले, हां-हां..भोग का मतलब नीतीश से ज्यादा कौन समझता है

नई दिल्ली:

बिहार में महज 14 घंटे के अंतराल के बाद चार साल पुराने साथियों को साथ लेकर फिर मुख्यमंत्री बने नीतीश कुमार ने शुक्रवार को विधानसभा में विश्वासमत हासिल कर लिया। विश्वासमत प्रस्ताव के पक्ष में 131 और विरोध में 108 वोट पड़े।

मतदान से पहले नीतीश ने भ्रष्टाचार को लेकर राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) पर जमकर निशाना साधा। वहीं आरजेडी ने भी नीतीश कुमार को पुराने बयान याद दिलाये। आरजेडी प्रमुख लालू यादव ने पूछा कि संघ मुक्त भारत का नारा किसने दिया था?

जेडीयू-बीजेपी की नई सरकार के मुखिया ने विश्वासमत के पक्ष में कहा कि सत्ता लोगों की सेवा के लिए होती है न कि 'मेवा' के लिए।

मुख्यमंत्री ने कहा, 'हमने कई समस्याओं का सामना किया, बावजूद इसके गठबंधन धर्म का पालन करने का हरसंभव प्रयास किया। परंतु जब स्थिति खराब हो गई और जनता परेशान होने लगी तो इसके अलावे और कोई रास्ता नहीं था।'

नीतीश ने तेजस्वी की ओर मुखातिब होते हुए कहा कि उन्हें जनता ने एक परिवार की सेवा के लिए बहुमत नहीं दिया था।

सुशासन बाबू ने आक्रोशित अंदाज में अपने पूर्व सहयोगियों पर निशाना साधते हुए कहा, 'जनता का वोट काम करने के लिए मिला है। हमारी प्रतिबद्धता है जनता की सेवा करने, बिहार के विकास के प्रति है, किसी एक परिवार की सेवा करने के लिए नहीं है।'

लालू का पलटवार

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बयान 'सत्ता सेवा के लिए है, भोग और मेवा के लिए नहीं' पर राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के अध्यक्ष लालू प्रसाद ने पलटवार करते हुए कहा कि भोग का मतलब नीतीश से ज्यादा कोई नहीं समझ सकता।

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लालू प्रसाद ने नीतीश पर निशाना साधते हुए शुक्रवार को ट्वीट किया, 'हां-हां..भोग का मतलब नीतीश से ज्यादा कौन समझता है, जिसने विगत 12 साल में छह बार बिहार की सभी पार्टियों के साथ गठबंधन कर मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है।'

लालू ने कहा, 'नीतीश कुमार ने ही संघ मुक्त भारत का नारा दिया था।'

नवगठित सरकार को बहुमत साबित करने का मौका देने के लिए आहूत बिहार विधानसभा के एकदिवसीय विशेष सत्र की कार्यवाही शुरू होने से पहले सीढ़ियों पर नारे लिखे तख्तियां लिए खड़े आरजेडी और कांग्रेस के विधायकों ने नीतीश के खिलाफ नारे लगाए। तख्तियों पर लिखा था- मैं गद्दार कुमार हूं, कुर्सी कुमार हूं, धोखेबाज हूं वगैरह।

विपक्षी सदस्यों ने सदन के भीतर भी जमकर हंगामा किया। कार्यवाही के दौरान भी टोकाटोकी का दौर चलता रहा।

तेजस्वी ने नीतीश को बताया 'रणछोड़'

इसके बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंत्रिपरिषद के पक्ष में विधानसभा में विश्वासमत का प्रस्ताव पेश किया। प्रस्ताव पर चर्चा में भाग लेते हुए आरजेडी नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निशाना साधते हुए उन्हें 'रणछोड़' कहा।

उन्होंने कहा कि 'संघ मुक्त भारत' बनाने की बात कहने वाले नेता ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सामने घुटने टेक दिए। तेजस्वी ने कहा, 'नीतीश कुमार में अगर हिम्मत थी तो मुझे बर्खास्त क्यों नहीं किया? साजिश के तहत मुझे और मेरे परिवार को फंसाया गया।'

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तेजस्वी ने साफ कहा, 'मुझे नीतीश ने कभी भी इस्तीफा देने के लिए नहीं कहा। वे पहले से ही बीजेपी के साथ सेटिंग कर रहे थे और बहाना मेरा बनाया।'

विश्वासमत के पक्ष और विपक्ष में चर्चा के बाद मतदान शुरू हुआ। विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार चौधरी ने शुरू में ध्वनिमत से मतदान कराने की कोशिश की, लेकिन दोनों ओर से तेज आवाज में बोले जाने के कारण कुछ स्पष्ट नहीं हो सका। इसके बाद लॉबी डिवीजन तरकीब से मतदान कराया गया, जिसमें विश्वासमत के प्रस्ताव के पक्ष में 131 मत और विरोध में 108 मत पड़े। आरजेडी ने गुप्त मतदान का आग्रह किया था, जिसे ठुकरा दिया गया।

विधानसभा से बाहर निकलने के बाद बीजेपी नेता प्रेम कुमार ने कहा, 'यह पहले से ही तय था कि बिहार की जनता राजग के साथ है। आज पूरा परिवार खुश है।' उन्होंने विश्वास मत प्राप्त करने के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को बधाई दी।

विधानसभा के विशेष सत्र को लेकर सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध किए गए थे। विधानसभा की कार्यवाही का सीधा प्रसारण भी रोका गया।

नीतीश कुमार ने बुधवार को अचानक मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था और राजभवन चले गए थे। इसे महागठबंधन का टूटना समझा गया। 14 घंटे के भीतर गुरुवार को सुबह 10 बजे उन्होंने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। उन्होंने बीजेपी नीत राजग के अन्य दलों के सहयोग से सरकार बनाई, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री और हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (सेक्युलर) के अध्यक्ष और पार्टी के इकलौता विधायक जीतनराम मांझी भी शामिल हैं। पद से हटाए जाने के बाद नीतीश को पानी पी-पीकर कोसने वाले मांझी अब मंत्री बनेंगे।

बिहार की 243 सदस्यों वाली विधानसभा में बहुमत के लिए 122 विधायकों की जरूरत थी। राजग ने राज्यपाल को 131 विधायकों के समर्थन की सूची सौंपी थी। क्रॉस वोटिंग का अंदेशा था, मगर वैसा नहीं हुआ।

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(इनपुट IANS से)

First Published : 28 Jul 2017, 11:39:42 PM

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