/newsnation/media/media_files/2026/03/05/nitish-kumar-may-move-to-rajya-sabha-samrat-choudhary-nityanand-rai-lead-race-for-bihar-cm-2026-03-05-10-29-22.jpg)
बिहार में गुरुवार को बड़ा सियासी उलटफेर देखने को मिल सकता है. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यसभा सांसद के रूप में दिल्ली जाने का मन बना लिया है, ऐसे में अब बिहार का नया मुख्यमंत्री भाजपा से हो सकता है. कहा जा रहा है कि नीतीश कुमार कल केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की मौजूदगी में पटना में नॉमिनेशन फाइल करेंगे. 16 मार्च को राज्यसभा का चुनाव होना है और इसी दिन नतीजे आएंगे.
अब प्रदेश का नया मुखिया कौन होगा, इसको लेकर पांच नाम सबसे आगे चल रहे हैं. बिहार का नए सीएम के रूप में सम्राट चौधरी सबसे प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं. दूसरे नंबर पर नित्यानंद राय तो तीसरे नंबर पर दिलीप जायसवाल का नाम सबसे आगे है. चौथे नंबर पर विजय सिन्हा तो पांचवें नंबर पर संजीव चौरसिया का नाम चर्चाओं में है.
चलिए अब आपको एक-एक करके इन तीनों नेताओं के पॉलिटिकल करियर की जानकारी देते हैं-
सीएम की रेस में पहला नाम- सम्राट चौधरी
16 नवंबर 1968 को मुंगेर के लखनपुर गांव में सम्राट चौधरी का जन्म हुआ था. उनके पिता शकुनी चौधरी राजनीति के दिग्गज रहे हैं. वे छह बार विधायक तो एक बार सांसद चुने गए थे. वहीं उनकी मां पार्वती देवी तारापुर से विधायक रहीं थीं. उन्होंने शुरुआती शिक्षा गांव से पूरी की और उच्च शिक्षा मदुरै कामराज विश्वविद्यालय से प्राप्त की.
सम्राट का राजनीतिक सफर
सम्राट ने 1990 में राजनीति में कदम रखा. मई 1999 में उन्होंने राबड़ी देवी की सरकार में पहली बार मंत्री का पद संभाला था. साल 2000 और साल 2010 में परबत्ता विधानसभा सीट से वे विधानसभा पहुंचे. सम्राट मूल रूप से राजद और जदयू से जुड़े हुए थे. 2014 में वे 13 राजद विधायकों के साथ भाजपा में शामिल हो गए थे. उन्होंने इसके बाद 2 जून 2014 को जीतन राम मांझी की सरकार में नगर विकास और आवास मंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की.
सीएम की रेस में दूसरा नाम- नित्यानंद राय
नित्यानंद राय ने बीते लोकसभा चुनावों में अपनी सीट बरकरार रखी. उन्होंने राजद उम्मीदवार आलोक कुमार मेहता को 60 हजार से अधिक वोटों से मात दी. साल 2000 से लेकर सांसद चुने जाने तक वे हाजीपुर विधानसभा सीट से लगातार विधायक चुने गए. बिहार में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में भी उन्होंने काम किया. उन्होंने पार्टी का आधार मजबूत करने में अहम काम किया.
नित्यानंद राय बिहार की राजनीति में भाजपा के प्रमुख यादव चेहरों में से एक हैं. उन्हें पार्टी ने विशेष रूप से राजद (RJD) के पारंपरिक यादव वोट बैंक में सेंध लगाने और ओबीसी मतदाताओं को भाजपा से जोड़ने के लिए एक मजबूत विकल्प के रूप में पेश किया है.
सीएम की रेस में तीसरा नाम- दिलीप जायसवाल
3 दिसंबर 1963 को बिहार के खगड़िया जिले के गोगरी में डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल का जन्म हुआ था. दिलीप कुमार जायसवाल कलवार जाति (अत्यंत पिछड़ा वर्ग) से आते हैं. खास बात है कि इन पर कोई आपराधिक मामला नहीं है. दिलीप 22 से अधिक वर्षों तक बिहार भाजपा के प्रदेश कोषाध्यक्ष भी रहे हैं. वे नीतीश सरकार में मंत्री पद भी संभाल चुके हैं. जयसवाल पहली बार वे 2009 में पूर्णिया, अररिया और किशनगंज के स्थानीय प्राधिकरण से विधान परिषद चुने गए थे. वे बिहार भाजपा के अध्यक्ष भी हैं.
सीएम की रेस में चौथा नाम- विजय सिन्हा
विजय कुमार सिन्हा आज बिहार की राजनीति के सबसे प्रभावशाली चेहरों में शामिल हैं. 5 जून 1967 को जन्में सिन्हा छात्र राजनीति से बिहार के उपमुख्यमंत्री तक के पद तक पहुंचे. विजय कुमार सिन्हा साधारण परिवार से जुड़े हैं. सिन्हा साल 2017 में श्रम संशाधन मंत्री बने थे. कौशल विकास और श्रमिक हितों से जुड़ी योजनाओं पर उन्होंने काम किया था. वे इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और बिहार के डिप्टी सीएम बने थे.
सीएम की रेस में पांचवा नाम- संजीव चौरसिया
पाचंवा नाम जो बिहार के नए सीएम के लिए सबसे आगे है, वह है संजीव चौरसिया का. 2025 में बिहार विधानसभा में भाजपा उम्मीदवार के रूप में उन्होंने दीघा निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ा था और जीत दर्ज किया था. संजीव पीएचडी कर चुके हैं.
/newsnation/media/agency_attachments/logo-webp.webp)
Follow Us