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बिहार की राजनीति में गुरुवार को उस समय हलचल तेज हो गई जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की खबर के बाद जनता दल (यू) के कार्यकर्ताओं का गुस्सा फूट पड़ा. राजधानी पटना में स्थित पार्टी के प्रदेश कार्यालय में दिनभर हंगामा, नारेबाजी और तोड़फोड़ का माहौल बना रहा.
वीरचंद पटेल पथ स्थित जदयू मुख्यालय में सैकड़ों की संख्या में कार्यकर्ता जुट गए और मुख्यमंत्री के फैसले का विरोध करते हुए भावुक नारे लगाने लगे. कई कार्यकर्ता यह कहते नजर आए कि नीतीश कुमार को बिहार छोड़कर संसद नहीं जाना चाहिए.
‘नीतीश बिहार के हैं’ के नारों से गूंजा पार्टी कार्यालय
जैसे ही यह खबर फैली कि जनता दल यूनाइटेड के नेता नीतीश कुमार राज्यसभा जाने का मन बना चुके हैं, पार्टी समर्थकों में बेचैनी बढ़ गई. दोपहर करीब 12 बजे से ही बड़ी संख्या में कार्यकर्ता पार्टी मुख्यालय पहुंचने लगे.
गूंजने लगे ये नारे
कार्यालय परिसर में “नीतीश कुमार बिहार के हैं”, “हम उन्हें कहीं नहीं जाने देंगे” और “जान दे देंगे लेकिन नीतीश को नहीं जाने देंगे” जैसे नारे गूंजने लगे. कार्यकर्ताओं का कहना था कि उन्होंने वर्षों तक संघर्ष करके नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री बनाया है और अब उन्हें राज्य की राजनीति छोड़ने नहीं दिया जाएगा.
प्रदर्शन के दौरान तोड़फोड़ और हंगामा
नारेबाजी के बीच कुछ कार्यकर्ता आक्रोशित हो गए और कार्यालय परिसर में तोड़फोड़ शुरू कर दी. प्रदर्शनकारियों ने अंदर रखे फर्नीचर को उलट दिया, टेबल और कुर्सियां तोड़ीं और पोस्टर-बैनर फाड़ दिए.
इस दौरान कार्यकर्ताओं ने वहां रखे बर्तनों और प्लेटों को भी फेंक दिया. बताया जा रहा है कि कार्यालय में एक भोज की व्यवस्था की गई थी, जिसे केंद्रीय राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर की ओर से नामांकन के बाद कार्यकर्ताओं के लिए रखा गया था. आक्रोशित भीड़ ने उस बफे काउंटर को भी नुकसान पहुंचाया.
पार्टी के वरिष्ठ नेताओं पर भी फूटा गुस्सा
प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं का गुस्सा पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं पर भी दिखाई दिया. कई समर्थकों ने केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह, कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और मंत्री विजय कुमार चौधरी के खिलाफ नारेबाजी की.
प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि पार्टी के कुछ नेता मिलकर संगठन को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं. इसी दौरान विधान पार्षद संजय कुमार उर्फ गांधी जी के साथ भी धक्का-मुक्की की घटना सामने आई.
प्रदेश अध्यक्ष को भी झेलना पड़ा विरोध
हंगामे की सूचना मिलने के बाद जदयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाह पार्टी कार्यालय पहुंचे. लेकिन वहां मौजूद कार्यकर्ताओं का गुस्सा उनके सामने भी शांत नहीं हुआ.
कुछ प्रदर्शनकारी उनकी गाड़ी के आगे लेट गए और विरोध जताने लगे. सुरक्षाकर्मियों की मदद से किसी तरह उन्हें कार्यालय के अंदर ले जाया गया. अंदर पहुंचने के बाद उन्होंने कार्यकर्ताओं को समझाने की कोशिश की और कहा कि उनकी भावनाओं से मुख्यमंत्री को अवगत कराया जाएगा.
मुख्यमंत्री आवास के बाहर भी प्रदर्शन
इसी तरह का प्रदर्शन मुख्यमंत्री आवास के बाहर भी देखने को मिला. सुबह से ही बड़ी संख्या में कार्यकर्ता वहां जमा हो गए थे. पटना, नालंदा और बेगूसराय सहित कई जिलों से आए समर्थक नीतीश कुमार के समर्थन में नारे लगा रहे थे.
पुलिस बार-बार भीड़ को हटाने की कोशिश करती रही, लेकिन कुछ देर बाद कार्यकर्ता फिर वहां पहुंचकर विरोध जताने लगे. इस दौरान एक मंत्री की गाड़ी को भी प्रदर्शनकारियों ने रोक लिया, जिसे पुलिस ने हस्तक्षेप कर सुरक्षित बाहर निकलवाया.
पार्टी नेतृत्व के लिए चुनौतीपूर्ण स्थिति
नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की खबर के बाद जदयू के भीतर पैदा हुई यह नाराजगी पार्टी नेतृत्व के लिए चुनौती बनती दिखाई दे रही है. फिलहाल पार्टी के वरिष्ठ नेता स्थिति को संभालने की कोशिश कर रहे हैं और कार्यकर्ताओं को शांत करने का प्रयास जारी है.
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा बिहार की राजनीति में और ज्यादा चर्चा का विषय बन सकता है.
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