News Nation Logo
Breaking
पहले बड़े मंगल के मौके पर लखनऊ में बजरंगबली के मंदिरों पर दर्शनार्थियों की भीड़ मैरिटल रेप का मामला SC पहुंचा, याचिकाकर्ता खुशबू सैफी ने दिल्ली HC के फैसले को SC में चुनौती दी मुंबई : कार्तिक चिदंबरम और उनसे जुडे ठिकानों पर सीबीआई की छापेमारी दिल्ली : कुतुबमीनार के कुव्वुतुल इस्लाम मस्जिद मामले की याचिका पर साकेत कोर्ट में सुनवाई टली मथुरा जिला अदालत में एक और याचिका, शाही ईदगाह मस्जिद को सील करने की मांग दाऊद के करीबी और 1993 मुंबई धमाकों के वॉन्टेड आरोपियों को गुजरात ATS ने पकड़ा हरिद्वार हेट स्पीच मामला : जितेंद्र नारायण सिंह त्यागी उर्फ़ वसिम रिज़वी को 3 महीने की अंतरिम जमानत जम्मू : म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन में गैर कानूनी लाउडस्पीकर बैन के प्रस्ताव के पारित होने पर हंगामा चिंतन शिविर के बाद हरियाणा कांग्रेस की कोर टीम आज शाम राहुल गांधी से करेगी मुलाकात वाराणसी कोर्ट में आज ज्ञानवापी सर्वे रिपोर्ट पेश नही होगी, तीन दिन का और समय मांगा जाएगा राजस्थान : पुलिस कांस्टेबल भर्ती में 14 मई की द्वितीय पारी की परीक्षा दोबारा ली जाएगी जम्मू कश्मीर : राजौरी इलाके के कई वन क्षेत्रों में भीषण आग, बुझाने में जुटे फायर टेंडर्स
Banner

यहां खुद नाव चलाकर स्कूल जाने को मजबूर हैं बच्चे, सोया है जिला प्रशासन

जिला मुख्यालय से 20 किलोमीटर दूर मखवा गांव नदी के दोनों किनारे बसा है. स्कूल के दूसरे किनारे पर बसे होने के कारण रोज 100 से ज्यादा बच्चे रोजाना नदी पार कर नाव से पढ़ने जाते हैं.

कन्हैया कुमार झा | Edited By : Yogesh Bhadauriya | Updated on: 01 Aug 2019, 10:52:26 AM
नाव चलाकर स्कूल जाते बच्चे

पटना/बेगूसराय:  

बिहार के बेगूसराय में जान जोखिम में डालकर बच्चे नदी के बढ़े जल स्तर के बीच नाव की सवारी कर स्कूल जाने को विवश हैं. जिला मुख्यालय से 20 किलोमीटर दूर मखवा गांव नदी के दोनों किनारे बसा है. स्कूल के दूसरे किनारे पर बसे होने के कारण रोज 100 से ज्यादा बच्चे रोजाना नदी पार कर नाव से पढ़ने जाते हैं. बच्चे और परिजन डरे रहते हैं कि कही कोई बड़ा हादसा ना हो जाए. ये स्कूली बच्चे वीरपुर प्रखंड के मखवा उत्क्रमित मध्य विद्यालय के छात्र हैं, मखवा गांव नदी के दोनों किनारे बसा हुआ है. मध्य विद्यालय मखवा नदी के उत्तरी भाग में है इस वजह से दक्षिण भाग के लगभग सवा सौ बच्चे रोजाना खुद से नाव चला कर या नाविक के द्वारा नाव चलावाकर स्कूल पहुंचते हैं.

यह भी पढ़ें- बिहार : मधुबनी चित्रकला और सुजनी कला की शिल्पी कर्पूरी देवी पंचतत्व में विलीन

बताया जा रहा है कि हर साल, साल के 3 महीने नदी में जलस्तर बढ़े रहने की वजह से बच्चे जान जोखिम में डालकर स्कूल जाने को मजबूर हैं क्योंकि स्कूल जाने का और कोई रास्ता नहीं है. वहीं 1 घाट से नाविक मौजूद नहीं होने के कारण बच्चे खुद नाव चला कर नदी के उस पार जाते हैं. छात्रों ने बताया कि उन्हें डर भी लगता है लेकिन पढ़ना जरूरी है इसलिए नाव से वह स्कूल जाने को मजबूर हैं.

स्कूल के प्रधानाध्यापक मनोज कुमार ठाकुर भी मानते हैं कि बच्चे जान जोखिम में डालकर और डर के साए में स्कूल आने को विवश हैं. प्रधानाध्यापक ने कहा कि साल के 3 महीने नदी में जलस्तर बहुत बढ़ा रहता है. इस बीच परिजनों की देखरेख में बच्चे को नाव से स्कूल भेजा जाता है और फिर विद्यालय खत्म होने के बाद शिक्षकों की देखरेख में बच्चों को नाव से घर भेजा जाता है.

प्रधानाध्यापक ने जिला प्रशासन का ध्यान खीचते हुए कहा कि पढ़ने की ललक और साधन विहीन बच्चे जान को जोखिम में डालकर नाव से रोजाना स्कूल आते हैं. छोटी नाव में दर्जनों बच्चे सवार होते हैं जिला प्रशासन को इस पर ध्यान देना चाहिए नहीं तो कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है.

First Published : 01 Aug 2019, 10:49:23 AM

For all the Latest States News, Bihar News, Download News Nation Android and iOS Mobile Apps.