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लोकसभा चुनाव

बीजेपी ने CAA के खिलाफ वामदलों के 'बिहार बंद' को फ्लॉप करार दिया

बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि जनता ने वामदलों का साथ नहीं दिया, क्योंकि नागरिकता कानून किसी भारतीय के खिलाफ नहीं है.

Updated on: 20 Dec 2019, 10:07 AM

पटना:

भारतीय जनता पार्टी ने नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के खिलाफ वामदलों के 'बिहार बंद' को फ्लॉप करार दिया है. राज्य के उपमुख्यमंत्री और बीजेपी के दिग्गज नेता सुशील कुमार मोदी ने कहा कि जनता ने वामदलों का साथ नहीं दिया, क्योंकि नागरिकता कानून किसी भारतीय के खिलाफ नहीं है. उन्होंने ट्विटर के जरिए कहा कि लालू प्रसाद के भ्रष्टाचार और कुशासन का लंबे समय तक साथ देने के कारण बिहार में वामपंथियों का जनाधार तो 20 साल पहले खत्म हो चुका है, इसलिए इनके बिहार बंद के दौरान कुछ स्थानों पर तोड़फोड़ के अलावा हर जगह शांति रही. बंद फ्लॉप रहा.

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सुशील कुमार मोदी ने सवाल उठाते हुए अपने ट्वीट में लिखा, 'भारत के कम्युनिस्टों को मुसलमानों की इतनी ही चिंता है तो इन लोगों ने चीन के उइगर मुसलमानों के उत्पीड़न और उन्हें यातना शिविर में डाले जाने के खिलाफ कभी कोई धरना-प्रदर्शन क्यों नहीं किया? भारत सरकार ने पाकिस्तान सहित किसी भी देश के मुसलमानों को नागरिकता देने के कानून में कोई बदलाव नहीं किया है. गायक अदनान सामी सहित 566 पाकिस्तानी मुसलमानों को भारत की नागरिकता दी गई है.' उन्होंने आगे कहा, 'मुस्लिम समुदाय को गुमराह कर कामरेड हिंसा और तोड़फोड़ करा रहे हैं. बिहार ऐसी राजनीति की कब्र खोद चुकी है.'

आरजेडी द्वारा नीतीश कुमार को विश्वासघाती बताए जाने पर बीजेपी नेता ने पलटवार करते हुए कहा, 'कामरेडों ने चारा घोटाला से लेकर दलितों के नरसंहार और माल-मिट्टी-जमीन घोटाले तक पर चुप्पी साध कर लालू प्रसाद का हमेशा बचाव करते हुए खुद ही अपने पांव काट लिए हैं. यह विडम्बना ही है कि दूसरों को विश्वासघाती बताने वाले लालू प्रसाद ने न लोकसभा चुनाव में वामपंथियों का समर्थन किया, न बिहार बंद में साथ दिया.' सुशील मोदी ने कहा, '1962 के चीनी आक्रमण का समर्थन करने वालों ने भारतीय इतिहास और दलितों-पिछड़ों के साथ जो छल किया, उसका परिणाम वे भुगत रहे हैं.'

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गौरतलब है कि गुरुवार को वामदलों ने सीएए के विरोध में बिहार में बंद का आह्वान किया. इस दौरान राज्य के कई जिलों में इसका व्यापक असर देखने को मिला. जगह-जगहों पर लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया. कई जिलों में ट्रेनें रोक दी गईं, जबकि कई स्थानों पर सड़कें जाम कर दी गईं. कई इलाकों में बंद समर्थकों द्वारा उत्पात भी मचाया गया. बंद को जन अधिकार पार्टी के अलावा महागठबंधन में शामिल कांग्रेस, रालोसपा, वीआईपी और हम ने समर्थन दिया. लेकिन आरजेडी ने इस बंद से खुद को अलग रखा.