'स्टार्टअप इंडिया' के 10 साल: पेटीएम से लेकर ग्रो, जीरोधा तक; इन कंपनियों ने देश में बदली आम आदमी की सोच

'स्टार्टअप इंडिया' के 10 साल: पेटीएम से लेकर ग्रो, जीरोधा तक; इन कंपनियों ने देश में बदली आम आदमी की सोच

'स्टार्टअप इंडिया' के 10 साल: पेटीएम से लेकर ग्रो, जीरोधा तक; इन कंपनियों ने देश में बदली आम आदमी की सोच

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IANS
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'स्टार्टअप इंडिया' के 10 साल: पेटीएम से लेकर ग्रो, जीरोधा तक; इन कंपनियों ने देश में बदली आम आदमी की सोच

(source : IANS) ( Photo Credit : IANS)

नई दिल्ली, 16 जनवरी (आईएएनएस)। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना स्टार्टअप इंडिया के 10 साल शुक्रवार को पूरे हो गए हैं। इस स्कीम ने देश में स्टार्टअप इकोसिस्टम में जान फूंकने का काम किया है और इसके जरिए कई ऐसी कंपनियां आई हैं, जिन्होंने उन क्षेत्रों को ऑनलाइन लाने का काम किया, जिन्हें पहले केवल ऑफलाइन ही किया जाता था।

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पेटीएम और फोनपे देश के उन कुछ चुनिंदा स्टार्टअप्स में से एक हैं, जिसने पिछले एक दशक में इंटरनेट के जरिए वित्तीय उपकरणों को आम आदमी तक पहुंचने का काम किया है। इन स्वेदेशी ऐप्स ने देश की अर्थव्यवस्था को नकद से ऑनलाइन हस्तांतरित करने में अहम भूमिका निभाई है। मौजूदा समय में यूपीआई सिस्टम में इन दोनों ऐप्स के पास एक बड़ी हिस्सेदारी है। यह ऐप्स लोन आदि की भी सुविधाएं देते हैं, जिसके कारण ऑनलाइन लोन लेना काफी आसान हो गया है।

जीरोधा और ग्रो, देश में स्टॉक ब्रोकिंग को आम आदमी तक कम लागत में पहुंचाने का श्रेय इन दोनों ऐप्स को जाता है। इन्होंने डिस्काउंट ब्रोकिंग मॉडल अपनाकर आधुनिक टेक्नोलॉजी के माध्यम से स्टॉक ब्रोकिंग को आसान बनाया। कोरोना के बाद इन ऐप्स की लोकप्रियता में तेजी से इजाफा हुआ। हालांकि, कई बार स्टॉक मार्केट के घंटों के दौरान इन ऐप्स पर लोगों को मुश्किलों का भी सामना करना पड़ा है।

अर्बन कंपनी और यस मैडम भी ऐसे ही स्टार्टअप हैं, इन स्टार्टअप ने सैलून जैसी सुविधा को ऑनलाइन लाने का काम किया है। अर्बन कंपनी के जरिए आप बड़े शहरों में आसानी से इलेक्ट्रिशियन और कई छोटे कामों के लिए वर्कर्स को बुला सकते हैं। वहीं, यस मैडल फिलहाल केवल सैलून और मेकअप से जुड़ी सुविधाएं देती है।

एस्ट्रोटॉक भी एक ऐसा ही स्टार्टअप है, जिसने एस्ट्रोलॉजी से जुड़े सेक्टर को औपचारिक क्षेत्र में लाने का काम किया है। यह एस्ट्रोलॉजी से जुड़ी सर्विसेज ऑनलाइन उपलब्ध कराता है। वहीं, स्कैपअंकल, कबाड़ को बेचने की ऑनलाइन सुविधा देता है।

--आईएएनएस

एबीएस/

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