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गोत्र क्या है? नेहरू और गांधी को कैसे मिला उपनाम, क्या फिरोज गांधी ने हिन्दुत्व को अपनाया था?

जानकारों का कहना है कि गोत्र एक वंशावली है. इससे किसी भी व्यक्ति की पीढ़ियों तक की वंशावली का पता लगाया जा सकता है. इसी कारण शादी विवाह में गोत्र को काफी अहमियत दी जाती है और समान गोत्र में शादी को लेकर सामाजिक प्रतिबंध भी है.

Written By : साजिद अशरफ | Edited By : Kuldeep Singh | Updated on: 01 Apr 2021, 03:10:45 PM
mamata rahul

गोत्र क्या है? नेहरू और गांधी को कैसे मिला उपनाम? (Photo Credit: न्यूज नेशन)

नई दिल्ली:

पश्चिम बंगाल चुनाव में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपना गोत्र बताकर चुनाव गर्मा दिया है. ममता बनर्जी के गोत्र के बयान के बाद केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह और एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने ममता बनर्जी पर जवाबी हमला किया. ममता बनर्जी ने चुनाव के दौरान अपना गोत्र शांडिल्य बताया.  ऐसे में लोगों के मन में सवाल है कि आखिर गोत्र क्या होता है. जानकारों का कहना है कि गोत्र एक वंशावली है. इससे किसी भी व्यक्ति की पीढ़ियों तक की वंशावली का पता लगाया जा सकता है. इसी कारण शादी विवाह में गोत्र को काफी अहमियत दी जाती है और समान गोत्र में शादी को लेकर सामाजिक प्रतिबंध भी है.

गोत्र क्या है?
प्रसिद्ध इतिहासकार एएल बाशम के मुताबिक ‘गोत्र’ शब्द असल में गोशाला से निकला है और इसका पहली बार इस्तेमाल अथर्व वेद में हुआ. अपनी किताब ‘द वंडर दैट वाज़ इंडिया’ में बाशम लिखते हैं- ‘सारे ब्राह्मण ऋषियों में से एक या पौराणिक सिद्ध पुरुषों के वंशज माने जाते हैं जिनसे उनके गोत्र के नाम पड़े.’ बाशम के मुताबिक एक ही गोत्र में शादियां प्रतिबंधित हैं क्योंकि एक ही गोत्र के लोग समान पूर्वजों के वंशज माने जाते हैं. 
 
नेहरूओं को कैसे उनका उपनाम मिला और उनका गोत्र क्या है?
पंडित मोती लाल नेहरू के पूर्वज कौल ब्राह्मण थे और कश्मीर के रहने वाले थे. कश्मीर में कौल ब्राह्मणों का गोत्र दत्तात्रेय है. 1716 में उनके पूर्वज पंडित राज कौल दिल्ली में शिफ्ट हो गए और नहर के किनारे बने एक घर में रहने लगे. लोगों ने उन्हें नेहरू बुलाना शुरू कर दिया. नेहरू यानि नहर के किनारे रहने वाले. बाद में उन्होंने कौल हटा दिया और उपनाम के तौर पर बस नेहरू ही इस्तेमाल करने लगे.

राहुल गांधी के दादा फिरोज गांधी का धर्म क्या था?
फिरोज जहांगीर घांडी (इंदिरा गांधी के पति और राहुल गांधी के दादा) का जन्म पारसी परिवार में 12 सितंबर 1912 को मुंबई के तहमुलजी नरीमन अस्पताल में हुआ था. स्वीडन के पत्रकार बर्टिल फाल्क की फिरोज गांधी पर लिखी बायोग्राफी ‘फिरोज- द फॉरगॉटेन गांधी’ के मुताबिक फिरोज के पिता जहांगरी फेरदून घांडी भरूच, गुजरात के मरीन इंजीनियर थे. वो पारसी समुदाय के धार्मिक व्यक्ति थे. फिरोज उनकी पांचवीं और अंतिम संतान थे. जब वो कुछ ही महीने के थे तो उनकी रिश्तेदार शिरीन कमिस्सेरियट ने उन्हें गोद ले लिया. शिरीन डॉक्टर थीं और इलाहाबाद में रहती थीं. शिरीन अविवाहित  थीं लेकिन उन्होंने फिरोज को अपने बेटे की तरह पाला.  रामचंद्र गुहा ने अपनी किताब ‘इंडिया ऑफ्टर गांधी’ में लिखा है कि फिरोज ने महात्मा गांधी से प्रभावित होकर स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ने के बाद अपने उपनाम को ‘घांडी’ से ‘गांधी’ में बदल लिया.

क्या फिरोज गांधी ने हिन्दुत्व को अपनाया था?
विनोद मेहता की किताब ‘द संजय स्टोरी’ के मुताबिक ‘फिरोज ने हिन्दुत्व को हिन्दू कानूनों को लेकर रूढ़िवादी विचारों को संतुष्ट करने के लिए अपनाया था, साथ ही किसी संभावित कानूनी आपत्ति से बचने के लिए उन्होंने ऐसा किया. दोनों ने कश्मीर में छोटे हनीमून के बाद सिविल मैरिज भी की.’ मेहता ने अपनी किताब में ये तक कहा, अन्य बायोग्राफर्स और ऑब्ज़र्वर्स ने भी ये पुष्टि की है कि फिरोज ने धर्म परिवर्तन किया और सिविल मैरिज का रास्ता अपनाया. हालांकि किताब के मुताबिक जब इंदिरा गांधी से फिरोज के धर्म परिवर्तन के बारे में पूछा गया था उन्होंने ज़ोर देकर खंडन करते हुए कहा था- ‘निश्चित रूप से नहीं.’ कई लोगों का तर्क है की अगर कोई व्यक्ति हिन्दुत्व को अपनाता भी है तो उसे गोत्र नहीं मिलता. इसलिए फिरोज गांधी के हिन्दुत्व को अपनाने के बाद भी हिन्दू परंपरा के मुताबिक उन्हें कभी गोत्र नहीं मिला.’

राहुल गांधी ने ने बताया - उनका गोत्र दत्तात्रेय है

2  नवंबर 2018  - बीजेपी ने राहुल गांधी से अपना गोत्र पूछा. बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने  कहा, 'वर्ष 2014 के पिछले लोकसभा चुनावों में जबर्दस्त हार के बाद कांग्रेस में गठित एके एंटनी समिति की रिपोर्ट में कहा गया था कि पार्टी खुद को 'मुस्लिमों की पार्टी' के रूप में दिखाती है और दल को अपनी सियासी स्थिति में सुधार के लिये हिंदुओं के वोट की भी चिंता करनी होगी. एंटनी समिति की इस रिपोर्ट के बाद से राहुल फैंसी ड्रेस हिंदुत्व का लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं. वह हिंदुओं को भ्रमित करने के लिये शर्ट के ऊपर जनेऊ पहनने की कोशिश कर रहे हैं. खुद को जनेऊधारी ब्राह्मण के रूप में पेश करने वाले राहुल से हम मांग करते हैं कि वह अपना गोत्र बतायें.'

राहुल ने कहा - उनका गोत्र दत्तात्रेय है
26  नवंबर 2018  को राहुल गांधी राजस्थान में चुनाव प्रचार के बीच पुष्कर मंदिर में पूजा-अर्चना के लिए पहुंचे. पूजा कराने वाले पुजारी के मुताबिक “ राहुल गांधी ने बताया कि उनका गोत्र दत्तात्रेय है. दत्तात्रेय कौल हैं और कौल कश्मीरी ब्राह्म्ण होते हैं.” राहुल के गोत्र खुलासे के बाद  गिरिराज सिंह ने अपने ट्वीट में फिल्म ‘जॉली एलएलबी’ की एक क्लिप को भी अपलोड किया. इस क्लिप में एक मुस्लिम किरदार ‘ब्राह्मण पुजारी’ का फ़र्जी वेश धरे हुए होता है लेकि गोत्र पूछे जाने पर उसका झूठ पकड़ा जाता है. कई बीजेपी समर्थकों ने राहुल पर निशाना साधते हुए कहा- राहुल दत्तात्रेय गोत्र से कैसे हो सकते हैं जबकि उनके दादा (फिरोज़ गांधी) हिन्दू नहीं थे. हिन्दू परंपरा में किसी शख्स को उसका गोत्र पिता से विरासत में मिलता है.

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First Published : 01 Apr 2021, 03:07:56 PM

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