बर्फ से ढंके ग्रीनलैंड पर क्यों कब्जा करना चाहते हैं राष्ट्रपति ट्रंप, जहां रहते हैं सिर्फ 57 हजार लोग

वेनेजुएला पर सैन्य कार्रवाई और राष्ट्रपति मादुरो की गिरफ्तारी के बाद देश में सत्ता परिवर्तन से ट्रंप बेहद उत्साहित है. यही वजह है कि अब वे दूसरे देशों पर भी कब्जा करने की धमकी दे रहे हैं. इनमें ग्रीनलैंड का नाम भी शामिल है.

वेनेजुएला पर सैन्य कार्रवाई और राष्ट्रपति मादुरो की गिरफ्तारी के बाद देश में सत्ता परिवर्तन से ट्रंप बेहद उत्साहित है. यही वजह है कि अब वे दूसरे देशों पर भी कब्जा करने की धमकी दे रहे हैं. इनमें ग्रीनलैंड का नाम भी शामिल है.

author-image
Suhel Khan
New Update
donald trump greenland

बर्फ से ढंके ग्रीनलैंड पर क्यों कब्जा करना चाहते हैं राष्ट्रपति ट्रंप Photograph: (White House/Social Media)

अमेरिका ने बीते शुक्रवार उत्तर अमेरिकी देश वेनेजुएला पर सैन्य कार्रवाई कर राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को गिरफ्तार कर लिया. उसके बाद अमेरिकी सैनिक उन्हें न्यूयॉर्क लेकर चले गए. इस ऑपरेशन में अमेरिकी सैनिकों को सिर्फ 30 मिनट का वक्त लगा. अपने इस अभियान की सफलता के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने कई और देशों को धमकी देना शुरू कर दिया. जो उनकी विस्तारवादी नीति की ओर सीधा इशारा करती है.

Advertisment

क्योंकि ट्रंप ने साफ कर दिया है कि वे अब ग्रीनलैंड पर अपने देश का सिस्सा बनाना चाहते हैं. पिछले दिनों ट्रंप ने कहा कि, हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से ग्रीनलैंड बेहद महत्वपूर्ण है. यही नहीं उन्होंने ग्रीनलैंड पर कब्जे का विरोध करने वाले डेनमार्क को लेकर भी कह दिया, डेनमार्क ऐसा नहीं कर पाएगा. ट्रंप ने कहा कि हम लगभग दो महीने में ग्रीनलैंड के बारे में सोचेंगे.

पहले भी ग्रीनलैंड को खरीदने की इच्छा जता चुके हैं ट्रंप

ये कोई पहला मौका नहीं है जब ट्रंप ने सीधे तौर पर ग्रीनलैंड पर कब्जे करने की बात कही हो. इससे पहले भी ट्रंप ग्रीनलैंड को खरीदने की बात कर चुके हैं. एक इंटरव्यू के दौरान ट्रंप ने कहा था कि हमें ग्रीनलैंड की जरूरत है, हमें यह रक्षा के लिए चाहिए. तब ट्रंप की इस टिप्पणी की दुनियाभर में निंदा हुई थी. इसके साथ ही डेनमार्क के स्वायत्त क्षेत्र के पीएम जेन्स-फ्रेडरिक नील्सन ने ट्रंप को चेतावनी देते हुए कहा था कि अब बहुत हो गया.
ट्रंप अपने पहले कार्यकाल के दौरान भी इस द्वीप को लेकर अपनी दिलचस्पी बयां कर चुके हैं. 2019 में ट्रंप में ग्रीनलैंड को खरीदने की बात कही थी.

जानें क्यों ग्रीनलैंड पर टिकी हैं ट्रंप की नजरें?

बर्फ से ढंका हुआ ग्रीनलैंड डेनमार्क की सदस्यता के जरिए नाटो का हिस्सा है. लेकिन इस आइलैंड पर दुनियाभर के देशों की नजरें है. अमेरिका उनमें पहला देश है जो ग्रीनलैंड पर कब्जा करना चाहता है. क्योंकि के द्वीप अमेरिकी सेना और उसके बैलिस्टिक मिसाइल अर्ली-वॉर्निंग सिस्टम के लिए रणनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण है. वह इसलिए कि यूरोप से उत्तरी अमेरिका तक जाने वाला रास्ता सबसे छोटा है जो इसी द्वीप से होकर जाता है.

ग्रीनलैंड एक्सपर्ट उलरिक प्राम गैड ने न्यूज एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि ग्रीनलैंड भोगोलिक रूप से उत्तरी अमेरिकी महाद्वीप का हिस्सा है. जो अमेरिका के लिए काफी महत्वपूर्ण है और वो नहीं चाहता कि कोई भी अन्य बड़ी शक्ति इस द्वीप पर अपने पैर ना जमा ले. बता दें कि वर्तमान में अमेरिका उत्तर-पश्चिमी ग्रीनलैंड के पिटुफिक स्पेस बेस में मौजूद है. अमेरिका ने सबसे पहले ग्रीनलैंड, आइसलैंड और ब्रिटेन के बीच के पानी की निगरानी के लिए अपनी मौजूदगी का विस्तार करने का विचार किया था. जिसे रूसी नौसेना के जहाजों और परमाणु पनडुब्बियों के लिए एक प्रवेश द्वार भी कहा जाता है. 

ग्रीनलैंड में मौजूद है खनिज तेल, प्राकृतिक गैस का भंडार

ग्रीनलैंड प्राकृतिक संपदाओं से भरा द्वीप है साल 2023 में आई एक रिपोर्ट में बताया कि यूरोपीय यूनियन द्वारा महत्वपूर्ण कच्चा माल माने जाने वाले 34 खनिजों में से 25 इस द्वीप पर पाए गए. इनमें ग्रेफाइट, लिथियम के अलावा इलेक्ट्रिक व्हीकल्स में इस्तेमाल होने वाला दुर्लभ तत्व ग्रीनलैंड में मौजूद है. इसके साथ ही ग्रीनलैंड में खनिज, तेल और प्राकृतिक गैसों का भी विशाल भंडार है. लेकिन ग्रीनलैंड ने पर्यावरण वजहों के चलते तेल और प्राकृतिक गैस निकालने पर रोक लगाई हुई है.

यही वजह है कि इस द्वीप की अर्थव्यवस्था मछली पकड़ने पर निर्भर है. इस द्वीप पर सिर्फ 56 से 57 हजार लोग ही रहते हैं. जो उनके द्वारा पकड़ी जाने वाली मछलियों का 95 फीसदी से ज्यादा निर्यात करते हैं. जो ग्रीनलैंड के बजट का करीब आधा है.

क्या है ग्रीनलैंड की कानूनी स्थिति

अगर बात ग्रीनलैंड की कानूनी स्थिति की करें तो साल 1953 में ग्रीनलैंड डेनमार्क का एक औपचारिक क्षेत्र बना था. जो डेनिश संविधान के अधीन आता है. यानी इस द्वीप की कानूनी स्थित में किसी भी बदलाव के लिए संवैधान में संशोधन की जरूरत पड़ेगी. साल 2009 में ग्रीनलैंड को स्वशासी स्वायत्तता दी गई थी. जिसके लिए जनमत संग्रह कराया गया. जिसमें डेनमार्क द्वारा स्वतंत्रता घोषित करने का अधिकार भी शामिल है. 

ये भी पढ़ें: ग्रीनलैंड पर ट्रंप की नजर से मचा बवाल, फ्रांस, जर्मनी समेत यूरोप के 7 देशों ने एकजुट होकर दिया कड़ा संदेश

Greenland
Advertisment