Explainer: वेनेजुएला से वसूलेगा भारत अपना 'डूबा' पैसा, एनर्जी सेक्टर में होगी एंट्री, जानें कैसे संकट से होगा फायदा?

वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी से वैश्विक कूटनीति और ऊर्जा बाजार में हलचल है. अमेरिका के रणनीतिक हित, ट्रंप की भूमिका और तेल उत्पादन के पुनर्जीवन की चर्चाएं तेज हैं. सवाल यह है कि बदलते हालात का भारत की ऊर्जा सुरक्षा और विदेश नीति पर क्या असर पड़ेगा.

वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी से वैश्विक कूटनीति और ऊर्जा बाजार में हलचल है. अमेरिका के रणनीतिक हित, ट्रंप की भूमिका और तेल उत्पादन के पुनर्जीवन की चर्चाएं तेज हैं. सवाल यह है कि बदलते हालात का भारत की ऊर्जा सुरक्षा और विदेश नीति पर क्या असर पड़ेगा.

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Ravi Prashant
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वेनेजुएला क्राइसिस Photograph: (ai)

वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है. विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम केवल वेनेजुएला तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका असर अमेरिका, लैटिन अमेरिका और वैश्विक ऊर्जा बाजार तक दिखाई देगा. वर्षों से आर्थिक संकट, प्रतिबंधों और राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहे वेनेजुएला के लिए यह एक बड़ा मोड़ माना जा रहा है.

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अमेरिका का उद्देश्य और ट्रंप फैक्टर

अमेरिकी विश्लेषणों में यह दावा किया जा रहा है कि अमेरिका का लॉन्ग टर्म टारगेट वेनेजुएला के विशाल तेल भंडार को दोबारा वैश्विक बाजार में सक्रिय करना है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से जुड़ी नीतियों में ऊर्जा और टैरिफ को रणनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने का रुख साफ देखा गया है. माना जा रहा है कि ट्रंप की सक्रियता से वेनेजुएला के तेल उत्पादन पर अमेरिकी प्रभाव बढ़ सकता है, जिससे वैश्विक सप्लाई चेन में बदलाव आएगा.

भारत और वेनेजुएला के पुराने रिश्ते

भारत और वेनेजुएला के बीच लंबे समय से व्यापारिक रिश्ते रहे हैं, खासकर कच्चे तेल के क्षेत्र में. एक टाइम पर भारत वेनेजुएला के तेल का सबसे बड़ा खरीदार था. लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों, भुगतान जोखिम और लॉजिस्टिक समस्याओं के चलते हाल के वर्षों में यह व्यापार लगभग ठप हो गया. वर्तमान में भारत वेनेजुएला से बहुत सीमित मात्रा में ही तेल खरीदता है.

बेहद कम हो गया तेल आयात

नवंबर 2025 तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, भारत का वेनेजुएला से तेल आयात कुल आयात का लगभग 0.3 प्रतिशत रह गया था. निवेश स्तर पर ONGC Videsh की कुछ परियोजनाओं में हिस्सेदारी बनी हुई है, जबकि Reliance Industries जैसी निजी कंपनियों के भी पहले व्यावसायिक हित रहे हैं. हालांकि, प्रतिबंधों के कारण इन परियोजनाओं से अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाया है.

रूस से तेल घटा और अमेरिका का दबाव बढ़ा

इस पूरे घटनाक्रम के बीच भारत के रूस से तेल आयात में भी बड़ी गिरावट देखी गई है. जून 2025 में भारत रोजाना करीब 20 लाख बैरल रूसी तेल खरीद रहा था, जो दिसंबर तक घटकर लगभग 12 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया. यानी करीब 40 प्रतिशत की कमी. जानकारों के मुताबिक, इसकी एक बड़ी वजह अमेरिका का दबाव और ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ हैं. ट्रंप ने आरोप लगाया है कि रूस से तेल खरीदकर भारत यूक्रेन युद्ध को अप्रत्यक्ष रूप से फंड कर रहा है और चेतावनी दी है कि खरीद जारी रहने पर और टैरिफ लगाए जाएंगे.

भारत की बैलेंसिंग एक्ट

भारत सरकार इस समय बैलेंसिंग एक्ट की नीति पर काम कर रही है. पीएमओ स्तर पर इस पूरे मामले की निगरानी की जा रही है और रिफाइनरियों से नियमित डेटा मांगा जा रहा है, ताकि अमेरिका के सामने स्थिति स्पष्ट की जा सके. ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि अगर वेनेजुएला में स्थिरता आती है और वहां तेल उत्पादन अमेरिकी प्रभाव में बढ़ता है, तो भारत अमेरिका या अमेरिकी नियंत्रित स्रोतों से ऊर्जा खरीद बढ़ा सकता है.

भारत पर संभावित असर

विशेषज्ञों का मानना है कि वेनेजुएला में राजनीतिक स्थिरता और अतिरिक्त तेल सप्लाई से वैश्विक कीमतों में नरमी आ सकती है. इससे भारत का आयात बिल घट सकता है और ONGC Videsh के फंसे बकायों की वसूली की संभावनाएं भी बेहतर होंगी. हालांकि, यदि अस्थिरता बनी रहती है, तो दवा निर्यातकों और अन्य भारतीय कंपनियों को भुगतान और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है.

भारत का क्या है रुख? 

भारत सरकार ने फिलहाल सतर्क रुख अपनाया है. Ministry of External Affairs ने वेनेजुएला की संप्रभुता के सम्मान और शांतिपूर्ण समाधान पर जोर दिया है. कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार, भारत इस पूरे घटनाक्रम को “वेट एंड वॉच” रणनीति के तहत देख रहा है, ताकि बदलते वैश्विक समीकरणों में अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा की जा सके.

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