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Explainer: क्या होता है डिजिटल अरेस्ट? पहले नहीं सुना होगा क्राइम का ऐसा चौंकाने वाला मामला! ऐसे बचें

Digital Arrest: नोएडा से साइबर क्राइम का चौंकाने वाला मामला सामने आया है. ठगों ने एक बुजुर्ग महिला को डिजिटल अरेस्ट कर उससे सवा करोड़ रुपये ठग लिए. डिजिटल अरेस्ट क्या होता है और उससे कैसे बचें. जानें

Updated on: 22 Jun 2024, 06:10 PM

New Delhi:

Digital Arrest Scams: देश में साइबर क्राइम के मामले बढ़ते जा रही हैं. साइबर अपराधी दिन पर दिन खुद को हाइटेक बना रहे हैं. वे वारदातों को अंजाम देने के लिए नए-नए तरीके अपना रहे हैं. उत्तर प्रदेश के नोएडा से साइबर क्राइम का ऐसा चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसके बारे में शायद ही आपने पहले कभी सुना होगा! यह मामला सेक्टर 49 का है, जिसमें साइबर ठगों एक बुजुर्ग महिला को 'डिजिटल अरेस्ट' कर उससे सवा करोड़ रुपये ठग लिए. ऐसे में आइए जानते हैं कि 'डिजिटल अरेस्ट' क्या होता है और इसमें फंसने से खुद को कैसे बचाएं.

क्या है डिडिटल अरेस्ट? (What is Digital Arrest)

- साइबर क्रिमिनल संभावित पीड़ित को कॉल करते हैं. वे उसको बताते हैं कि उसने अवैध सामान, ड्रग्स, नकली पासपोर्ट या अन्य प्रतिबंधित वस्तु वाले पार्सल को भेजा है या ऐसा पार्सल उसको मिलने वाला है.    

- कुछ मामलों क्रिमिनल पीड़ित के रिश्तेदारों या दोस्तों को कॉल करते हैं. उनको बताते हैं कि पीड़ित किसी क्राइम/एक्सीडेंट में लिप्त है और उनकी हिरासत में है.

- इन मामलों में क्रिमिनल अक्सर प्रामाणिकता बताने के लिए पुलिस कर्मियों की तस्वीरों या पहचान का उपयोग करते हैं. वे व्हाट्सएप के डीपी और स्काइप वीडियो कॉलिंग के दौरान प्राफोइल में पुलिसकर्मियों की फोटो लगाते हैं.

- आमतौर पर क्रिमिनल मामले को समझौता' करने और क्लॉज करने के लिए पीड़िक से पैसे मांगते हैं. 

- कुछ मामलों में पीड़ितों को 'डिजिटल अरेस्ट' किया जाता है. जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, तब तक पीड़ित को स्काइप या अन्य वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग प्लेटफॉर्म पर सामने दिखाई देने के लिए मजबूर किया जाता है. 

- 'डिजिटल अरेस्ट' के दौरान क्रिमिनल पीड़ित को घर से बाहर नहीं निकलने देते हैं. क्रिमिनल पीड़ित से कहते हैं कि वे   डिजिटली तौर पर लगातार उससे जुड़े रहेंगे और किसी को इसकी जानकारी नहीं देंगे. 

- साइबर अपराधियों को पुलिस स्टेशन या सरकारी कार्यालयों जैसे दिखने वाले स्टूडियो का उपयोग करने और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के समान वर्दी पहनने के लिए भी जाना जाता है.

- साइबर क्रिमिनल्स खुद को पुलिस ऑफिसर, सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (सीबीआई), नारकोटिक्स डिपार्टमेंट, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई), और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) का अधिकारी बताते हुए पीड़ित को धमकाते हैं.

- पीड़ित डर की वजह से साइबर अपराधियों के झांसे में आकर उन्हें पास रुपये भेज देता है.

चौंकाने वाला है नोएडा का मामला (Shocking Case of Digital Arrest)

अब चलिए नोएडा के सेक्टर 49 में हुए साइबर क्राइम की बात करते हैं. क्रिमिनल्स ने एक पार्सल में ड्रग्स समेत अन्य गैरकानूनी सामान होने का डर दिखाकर एक महिला से एक करोड़ 30 लाख रुपये ठग लिए. पीड़ित महिला 73 वर्षीय है. आपको जानकर ये हैरानी होगी कि साइबर क्रिमिनल्स ने पीड़ित महिला को स्काइप कॉप पर वीडियो कॉल कर पांच दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखा. उन्होंने पीड़ित से दस अलग-अलग बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर करवाए. अब पीड़ित महिला की शिकायत पर पुलिस ने अज्ञात बदमाशों के खिलाफ मामला दर्ज किया है. मामले में जांच जारी है.

ठगों के झांसे में कैसे आई पीड़ित महिला

पीड़ित महिला का नाम शुचि अग्रवाल है. उसने पुलिस में दर्ज कराई एफआईआर में बताया कि 13 जून को उसके मोबाइल पर अनजान नंबर से कॉल आई. कॉलर ने बताया कि वह फेडिक्स कंपनी की अंधेरी ब्रांच से बात कर रही है. उसने कहा कि उनके नाम से भेजा जा रहा पार्सल पकड़ा गया है, जिसमें एलसीडी, एक्सपायर्ड पासपोर्ट और अन्य सामान हैं. कॉलर ने फिर आगे बताया पूछताछ के लिए या तो उन्हें मुंबई आना पड़ेगा या फिर ऑनलाइन ही मुंबई पुलिस के नारकोटिक्स डिपार्टमेंट के ऑफिसर्स से जुड़ना होगा. इसके बाद उसे स्काइप कॉल पर जोड़ा गया. इसके बाद उन्होंने पूरी वारदात को अंजाम दिया. डिजिटल अरेस्ट के दौरान ठगों महिला की हर गतिविधि पर नजर रखी.

ऐसे अपराधों से खुद को ऐसे बचाएं (Precautions Against Digital Arrest Scams)

- कूरियर पार्सल के नाम से कॉल आए तो उस पर ध्यान न दें

- इस तरह की कॉल से डरें नहीं, शिकायत करें

- अपनी कोई भी पसर्नल डिटेल किसो भी न बताएं 

- मोबाइल में आए किसी भी लिंक पर क्लिक न करें

- ठगी होने पर साइबर थाने या 1930 पर शिकायत करें