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टीआरएस विधायक रोहित रेड्डी को भाजपा में शामिल होने के लिए 100 करोड़ रुपये की पेशकश किसने की?

Pradeep Singh | Edited By : Pradeep Singh | Updated on: 29 Oct 2022, 02:07:25 PM
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तेलंगाना पुलिस (Photo Credit: News Nation)

highlights

  • साइबराबाद पुलिस ने एक फार्महाउस से तीन लोगों को किया गिरफ्तार
  • तेलंगाना विधायक रोहित रेड्डी को 100 करोड़ रुपये की रिश्वत देने का आरोप
  • हिरासत में लिए गए लोगों का नाम रामचंद्र भारती, नंद कुमार और सिंह्याजी स्वामी है

नई दिल्ली:  

भारतीय राजनीति में 'हॉर्स ट्रेडिंग' यानि विधायकों-सांसदों की खरीद-फरोख्त की घटनाएं होती रही है. कई राज्यों में इस माध्यम से सरकार बनायी और गिरायी गई है. हाल फिलहाल में ये ट्रेंड बढ़ गया है. मध्य प्रदेश में कांग्रेस मुख्यमंत्री कमलनाथ की सरकार ऐसे ही गिरी थी. नेकिन इस समय तेलंगाना चर्चे में है. तेलंगाना में टीआरएस नेताओं का आरोप है कि केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा के चंद्रशेखर राव की सरकार गिराने के लिए विधायकों को  पैसों का लालच दे रही है. टीआरएस और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप बढ़ गया है. 
 
तेलंगाना पुलिस ने तीन को किया गिरफ्तार

साइबराबाद पुलिस ने बुधवार को तेलंगाना के रंगा रेड्डी जिले के एक फार्महाउस से तीन लोगों को कथित तौर पर भाजपा में शामिल होने के लिए तेलंगाना विधायक पायलट रोहित रेड्डी को 100 करोड़ रुपये की रिश्वत देने के आरोप में हिरासत में लिया. हिरासत में लिए गए लोगों की पहचान रामचंद्र भारती, नंद कुमार और सिंह्याजी स्वामी के रूप में हुई है. उन पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 120-बी, 171-बी आर/डब्ल्यू 171-ई 506 आर/डब्ल्यू 34 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम-1988 की धारा 8 के तहत मामला दर्ज किया गया है.

गिरफ्तार आरोपियों के भाजपा से जुड़े हैं तार

टीआरएस विधायक रेड्डी ने अपनी शिकायत में कहा कि दिल्ली निवासी भारती और हैदराबाद के नंदा कुमार-दोनों कथित तौर पर भाजपा से जुड़े हैं-ने उन्हें भाजपा में शामिल होने और अन्य विधायकों को ऐसा करने के लिए उकसाने के लिए 100 करोड़ रुपये की पेशकश की. उन्होंने आरोप लगाया कि उन्होंने पार्टी में शामिल होने की इच्छा रखने वाले प्रत्येक विधायक को कथित तौर पर 50 करोड़ रुपये की पेशकश की.

प्राथमिकी के अनुसार, ये लोग चाहते थे कि ऐसे विधायक अगला चुनाव भाजपा से लड़े. उन्होंने कथित तौर पर उसे लुभाने के लिए केंद्र सरकार के अनुबंध की भी पेशकश की. उन्होंने प्रस्ताव को अस्वीकार करने पर उन्हें सीबीआई और ईडी के मामलों की धमकी भी दी.

विधायक ने आरोप लगाया कि तीनों ने बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए उन्हें फार्महाउस पर बुलाया. उन्होंने दावा किया कि वे उन सभी को विधायकों को 50 करोड़ रुपये का भुगतान करेंगे जो टीआरएस को छोड़कर उनके अनुसार काम करेगा.

एफआईआर में किसका-किसका नाम

सिंहयाजी स्वामी तिरुपति के मूल निवासी बताए जाते हैं. एफआईआर के अनुसार, "उन्होंने सूचित किया कि दिल्ली के रामचंद्र भारती उर्फ ​​सतीश शर्मा,  नंद कुमार और तिरुपति के सिंहयाजी स्वामी नाम के तीन लोग टीआरएस पार्टी से इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल होने के सौदे को अंतिम रूप देने के लिए मेरे फार्महाउस आएंगे. इसलिए, उन्होंने टीआरएस पार्टी से इस्तीफा देने का अनुरोध किया. टीआरएस से इस्तीफा देने के लिए रिश्वत की पेशकश करने के लिए उपरोक्त व्यक्तियों और इस साजिश के पीछे व्यक्तियों के खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई और रिश्वत के रूप में बड़ी मात्रा में अनैतिक और अलोकतांत्रिक तरीकों से लिप्त होकर भाजपा में शामिल होने के लिए."

भाजपा ने आरोपों को बताया निराधार

भारतीय जनता पार्टी ने टीआरएस प्रमुख के चंद्रशेखर राव को मुनुगोड़े उपचुनाव हारने के डर से नाटक के लिए जिम्मेदार ठहराया. भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डी के अरुणा ने कहा कि गिरफ्तार किए गए लोग भाजपा से नहीं हैं. सतीश शर्मा उर्फ ​​रामचंद्र भारती हरियाणा के फरीदाबाद में पुजारी हैं. सतीश शर्मा और डी सिम्हायाजी को कुछ तस्वीरों में भाजपा नेताओं के साथ देखा जा सकता है, लेकिन यह सत्यापित नहीं किया जा सकता है कि वे पार्टी से जुड़े थे या नहीं.

केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता जी किशन रेड्डी ने आरोपों से इनकार किया. उन्होंने कहा कि एक विधायक के जाने का फैसला करने से टीआरएस सरकार नहीं गिरेगी. उन्होंने मांग की कि इस मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज के तहत की जाए.

First Published : 29 Oct 2022, 02:03:55 PM

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