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Explainer: आखिर क्या चाहता है चीन, ताइवान में फिर ड्रैगन की 'घुसपैठ', दाखिल हुए  41 एयरक्राफ्ट और 7 युद्धपोत! 

ताइवान की बढ़ती ताकत देखकर चीन बुरी तरह बौखला गया है, जिस तरह से अमेरिका लगातार ताइवान को सैन्य तौर पर मजबूत कर रहा है, उससे ड्रैगन परेशान हो गया, इसीलिए तो ताइवान के इलाके में घुसपैठ करके तनाव को हवा दे रहा है.

Updated on: 22 Jun 2024, 09:12 PM

New Delhi:

China-Taiwan Dispute: ताइवान की बढ़ती ताकत देखकर चीन बुरी तरह बौखला गया है, जिस तरह से अमेरिका लगातार ताइवान को सैन्य तौर पर मजबूत कर रहा है, उससे ड्रैगन परेशान हो गया, इसीलिए तो बार बार ताइवान के इलाके में घुसपैठ करके तनाव को हवा दे रहा है. अब एक बार फिर उसने ताइवान में 'घुसपैठ' की है. ताइपे के रक्षा मंत्रालय ने आज यानी शनिवार को दावा किया ताइवान के आसपास चीन एयरक्राफ्ट और युद्ध पोतों को देखा. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर चीन क्या चाहता है और क्यों वह बार-बार ऐसा कर रहा है.

चीन के 41 एयरक्राफ्ट घुसे

इस बार चीन ने ताइवान स्ट्रेट में एक साथ 41 जंगी विमान और 7 युद्धपोत के साथ घुसपैठ को अंजाम दिया है. इसमें 34 एयरक्राफ्ट ने तो मीडियन लाइन को पार भी कर लिया था, जिसके चलते चीन और ताइवान के बीच तनाव चरम पर है. दरअसल अमेरिका ने दो दिन पहले ही ये ऐलान किया है कि वो ताइवान को 1000 कामिकेज ड्रोन देने जा रहा है. इसी बात से चीन तिलमिला उठा और ताइवान को धमकाने के लिए घुसपैठ को अंजाम दिया. 

7 चीनी युद्धपोत ने की घुसपैठ

ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि, 'सुबह 6:00 बजे (2200 GMT) तक 24 घंटे की अवधि के दौरान ताइवान के आसपास 41 चीनी सैन्य विमानों और सात नौसैनिक जहाजों का संचालन करते हुए पाया है. 32 विमानों ने ताइवान जलडमरूमध्य (Taiwan Strait) की मीन लाइन को पार किया. ये लाइन ताइवान को चीन से अलग करने वाले 180 किलोमीटर (110 मील) जलमार्ग को दो भागों में विभाजित करती है. मंत्रालय ने कहा कि उसने 'स्थिति की निगरानी की' और उसके रिएक्शन दी. 

क्या है चीन-ताइवान विवाद 

चीन और ताइवान के बीच विवाद सालों से चला आ रहा है. चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है, जबकि ताइवान उसके इस दावे को खारिज करता है. वह खुद को एक स्वतंत्र देश मानता है. यही वजह है कि चीन उस पर कब्जा करना चाहता है. अगर चीन ऐसा करने में कामयाब हो जाता है तो वह पश्चिमी प्रशांत महासागर इलाके में अपना दबदबा दिखाने के लिए आजाद हो जाएगा. इससे गुआम और हवाई जैसे अमेरिकी मिलिट्री बेस के लिए खतरा पैदा हो जाएगा. 

ताइवान पर नियंत्रण से क्षेत्र में चीन की ताकत में इजाफा होगा. इससे जापान और साउथ कोरिया जैसे प्रमुख अमेरिकी सहयोगियों के लिए खतरा पैदा हो सकता है. इसलिए अमेरिका तनाव के मौकों पर ताइवान के साथ खड़ा हुआ दिखता है. चीन का कहना है कि दुनिया में सिर्फ एक चीन है और ताइवान चीन का ही एक हिस्सा है, जो एक दिन उसमें मिल जाएगा. हालांकि, ताइवान खुद को एक स्वतंत्र देश मानता है.

आखिर क्या चाहता है चीन?

चीन ताइवान को अपना क्षेत्र मानता है और उसने कहा है कि वह इसे बीजिंग के नियंत्रण में लाने के लिए बल प्रयोग से कभी पीछे नहीं हटेगा. ताइवान को अपने कब्जे में लाने के लिए चीन बेताब है. यही वजह है कि हाल के वर्षों में चीन लगातार ताइवान पर दवाब बढ़ा रहा है. पिछले महीने नए ताइवानी नेता लाई चिंग-ते के शपथ ग्रहण के बाद द्वीप के चारों ओर चीन ने युद्ध अभ्यास किया था. इसके बाद भी दोनों देशों के भी तनाव चरम पर पहुंच गया था.

चीन का कहना है कि ताइवान में जो भी अलगाववादी ताकतें पनप रही हैं, वो उनका खून बहा देगा. चीन ताइवानी राष्ट्रपति लाई चिंग-ते से बहुत चिढ़ता है. वो उनको 'खतरनाक 'अलगावादी मानता' है. इन 'सैन्य कार्रवाईयों' के पीछे चीन का मकसद ताइवान को उसकी मांग के आगे झुकने और चीन के कब्जे को मानने के लिए मजबूर करना है.