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कौन है शाहिद महमूद, जिसे UN में चीन ने वैश्विक आतंकी घोषित होने पर लगाई रोक?

News Nation Bureau | Edited By : Nihar Saxena | Updated on: 19 Oct 2022, 08:21:35 PM
UNSC

चीन ने चौथी बार वैश्विक आतंकी प्रक्रिया रोक पाकिस्तान को बचाया. (Photo Credit: न्यूज नेशन)

highlights

  • लश्कर-ए-तैयबा का कमांडर शाहिद महमूद मुंबई हमलों का साजिशकर्ता
  • अमेरिका ने  शाहिद महमूद के सिर पर रखा है 5 मिलियन डॉलर का ईनाम
  • चीन ने बीते कुछ महीनों में चौथी बार वैश्विक आतंकी की राह में अटकाया रोड़ा

नई दिल्ली:  

चीन (China) ने वैश्विक स्तर पर प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के कमांडर शाहिद महमूद को वैश्विक आतंकवादी (Terrorist) के रूप में सूचीबद्ध करने के संयुक्त राष्ट्र (UN) में भारत और अमेरिका के प्रस्ताव को फिर से रोक दिया. पिछले कुछ महीनों में यह चौथी बार है जब चीन ने संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान (Pakistan) में जड़े जमाए बैठे आतंकवादी को वैश्विक आतंकी बतौर घोषित करने से रोक लगाई है. चीन का यह कदम ऐसे समय आया है जब संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस (Antonio Guterres) भारत दौरे पर हैं. यही नहीं, उन्होंने अपने भारत दौरे की शुरुआत मुंबई आतंकी (Mumbai Attacks) हमलों में जान गंवाने वाले निर्दोष लोगों को श्रद्धांजलि देकर शुरू की, जिसे लश्कर-ए-तैयबा ने ही अंजाम दिया था. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की 1267 अल कायदा (Al Qaeda) प्रतिबंध समिति के तहत भारत और अमेरिका ने 42 साल के आतंकी शाहिद महमूद को वैश्विक आतंकी घोषित करने का प्रस्ताव पेश किया था. 

है कौन लश्कर-ए-तैयबा का कमांडर शाहिद महमूद
2016 में शाहिद महमूद को विशेष रूप से वैश्विक आतंकवादी (एसडीजीटी) नामित करने वाले अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के मुताबिक शाहिद महमूद कराची में रह रहा लश्कर-ए-तैयबा का शीर्ष कमांडर है. शाहिद 2007 से लश्कर-ए-तैयबा के लिए काम कर रहा है. अब चीन ने जिस शाहिद महमूद को बचाया है, वह फलाह-ए-इंसानियत फॉउंडेशन (एफआईएफ) का उपाध्यक्ष भी है. एफआईएफ लश्कर-ए-तैयबा का मानवीय चेहरा है और फंड जुटाने की जिम्मेदारी भी संभालता है. लश्कर ने एफआईएफ को अपने मुखौटा बतौर लांच किया था. 2014 में शाहिद महमूद कराची में एफआईएफ का प्रमुख था. अगस्त 2013 में शाहिद को लश्कर के प्रचार-प्रसार इकाई के सक्रिय सदस्य बतौर भी पहचान की गई थी.  महमूद ने लश्कर की ओर से कई देशों की यात्राएं भी की. उदाहरण के तौर पर एफआईएफ कराची के अध्यक्ष बतौर शाहिद बांग्लादेश गया था. वहां उसका मकसद बर्मा के शरणार्थी कैंपों में रह रहे लोगों को पैसे वितरित कर लश्कर से जोड़ना था. अगस्त 2012 में शाहिद महमूद लश्कर-ए-तैयबा के एक प्रतिनिधिमंडल को बर्मा लेकर गया था. 2014 के मध्य में शाहिद ने सीरिया और तुर्किए की यात्रा की थी. इसके बाद ही उसे दोनों देशों में एफआईएफ के सभी क्रियाकलापों की जिम्मेदारी सौंप दी गई थी. महमूद ने एफआईएफ की ओर से बांग्लादेश और गाजा की यात्रा भी की. इसके पहले शाहिद महमूद साजिद मीर के नेतृत्व में लश्कर-ए-तैयबा के विदेशी ऑपरेशनंस का भी हिस्सा रहा. इसके अतिरिक्त अगस्त 2013 में शाहिद महमूद को बांग्लादेश और बर्मा में इस्लामिक संगठनों से गुपचुप संबंध स्थापित करने के भी दिशा-निर्देश दिए गए थे. अमेरिका की ट्रेजरी विभाग की वेबसाइट के मुताबिक लश्कर की ऑपरेशन टीम के सक्रिय सदस्य शाहिद महमूद को बांग्लादेश और सऊदी अरब की जिम्मेदारी भी सौंपी गई थी. यही नहीं, 2011 के पूर्वाध में शाहिद महमूद ने दावा किया था कि लश्कर-ए-तैयबा की प्रमुख जिम्मेदारी भारत और अमेरिका पर आतंकी हमला करना है. 

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चीन पहले भी आतंकियों को नामित करने में अटकाता रहा रोड़ा
इस साल जून में भी चीन ने भारत और अमेरिका द्वारा पाकिस्तान स्थित आतंकवादी अब्दुल रहमान मक्की को 1267 अल-कायदा प्रतिबंध समिति के तहत वैश्विक आतंकी घोषित करने के प्रस्ताव को रोक दिया. भारत-अमेरिका ने 1267 अल कायदा प्रतिबंध समिति के तहत मक्की को ब्लैकलिस्ट कर वैश्विकआतंकवादी घोषित करने का प्रस्ताव पेश किया था. फिर अगस्त में चीन ने जैश-ए-मोहम्मद के वरिष्ठ कमांडर अब्दुल रऊफ अजहर को काली सूची में डालने के लिए अमेरिका और भारत के प्रस्ताव को रोका. इसके अगले ही महीने सितंबर में चीन ने लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादी साजिद मीर को वैश्विक आतंकवादी के रूप में नामित करने के लिए अमेरिका और भारत द्वारा सह-समर्थित  प्रस्ताव पर फिर से अवरुद्ध किया. मीर भारत में वांछित शीर्ष आतंकवादियों में से एक है, जिस पर अमेरिका ने 5 मिलियन डॉलर का ईनाम भी घोषित किया हुआ है. अमेरिका ने यह कदम साजिद मीर के मुंबई आतंकी हमलों में बतौर साजिशकर्ता और मुख्य आरोपी ठहराने के बाद उठाया था. भारत-अमेरिका के ये प्रस्ताव वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (एफएटीएफ) की बैठकों के आसपास पेश किए गए. एफएटीएफ मनी लॉन्ड्रिंग, आतंकवाद के लिए वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराने के खिलाफ वैश्विक वित्तीय नेटवर्क से जुड़े अन्य खतरों की निगरानी करने वाली एक अंतरराष्ट्रीय संस्था है. पाकिस्तान एफएटीएफ की 'ग्रे' सूची से बाहर निकलने के लिए ऐड़ी-चोटी का जोर लगाए हुए है. एफएटीएफ की ग्रे सूची वास्तव में अंतरराष्ट्रीय वित्तीय और बैंकिंग प्रणालियों के लिए चेतावनी भरा संकेत होता है कि वह आतंकवाद के बढ़ावा देने वाले संदिग्ध देश के साथ लेनदेन कर रहे हैं, जो कि जोखिम भरा काम है. एफएटीएफ की ग्रे सूची में आने से संबंधित देश का आर्थिक विकास बुरी तरह से प्रभावित होता है. एफएटीएफ की ग्रे सूची से बाहर आने के लिए पाकिस्तान को आतंकी संगठनों से जुड़े आतंकवादियों और उनके समर्थकों की संपत्ति जब्त करने जैसी कई कड़ी शर्तों को पूरा करना है, जिसमें वह लगातार नाकाम हो रहा है. संयुक्त राष्ट्र में मक्की से जुड़े प्रस्ताव पर चीन ने ऐसे समय रोड़ा अटकाया, जब एफएटीएफ की बैठक हो रही थी. इसके बाद 17 अगस्त को रऊफ असगर के खिलाफ प्रस्ताव लाया गया, जब एफएटीएफ का एक दल पाकिस्तान के लिए रवाना होने वाला था. 17 सितंबर को साजिद मीर के खिलाफ भी प्रस्ताव उस समय लाया गया, जब एफएटीएफ का दल पाकिस्तान का दौरा कर वापस लौटा था. अब एफएटीएफ की एक और बैठक बुधवार को होने वाली थी.

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1267 अल कायदा प्रतिबंध समिति क्या है 
समिति संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का हिस्सा है और इसका काम आतंकवादियों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को लागू करना है. इस जैसी ही समान भूमिकाओं वाली अन्य दो समितियां हैं आतंकवाद विरोधी समिति और सुरक्षा परिषद समिति. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अल-कायदा समिति को 15 अक्टूबर 1999 को अल-कायदा-तालिबान प्रतिबंध समिति के रूप में स्थापित किया गया था. संयुक्त राष्ट्र में यह कदम सुरक्षा परिषद में लाए गए प्रस्ताव के बाद लाया गया था, जिसमें अलकायदा और तालिबान को 1267 प्रस्ताव के तहत आतंकी संगठन घोषित किया गया था. 2011 में तालिबान के लिए एक अलग से समिति बनाई गई. 1267 प्रस्ताव संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अतुच्छेद आठ के तहत लाया गया था. यह प्रस्ताव संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्य देशों को प्रतिबंधित और वैश्विक आतंकी और संगठन घोषित किए गए लोगों से हर तरह का लेन-देन रोकने की वकालत करता है. साथ ही उनसे जुड़ी संपत्तियों और बैंक खातों को फ्रीज करने की भी अनुशंसा प्रदान करता है. इसके अलावा समिति द्वारा प्रतिबंधित अल कायदा, उसके सरगना रहे ओसामा बिन लादेन या तालिबान से जुड़े आतंकी या संगठनों को हथियारों समेत सैन्य साज-ओ-सामान की बिक्री भी नहीं की जा सकती है. 

First Published : 19 Oct 2022, 08:18:05 PM

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