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प्रतिकात्मक फोटो
Prenuptial Agreement India: आज की तेज रफ्तार जिंदगी में जहां रिश्ते जितनी जल्दी बनते हैं, उतनी ही जल्दी टूट भी रहे हैं. ऐसे में इन दिनों प्रेनप्चुअल एग्रीमेंट (Prenuptial Agreement) का कॉन्सेप्ट युवा जोड़ों के बीच चर्चा का विषय बन रहा है. लेकिन क्या भारत जैसे देश में जहां शादी को एक पवित्र संस्कार माना जाता है ये समझौते कानूनी तौर पर वैध हैं? आइए जानते हैं इसकी हकीकत...
क्या होता है Prenuptial Agreement, भारत में क्या हैं नियम?
दरअसल, प्रेनप्चुअल एग्रीमेंट असल में शादी से पहले किया जाने वाला एक लिखित समझौता होता है जिसमें जोड़े अपनी संपत्ति, कर्ज, अलिमनी (भरण-पोषण) और बच्चों की कस्टडी जैसे मुद्दों पर पहले से सहमति जता लेते हैं. इसका मकसद तलाक या अलगाव की स्थिति में विवादों से बचना है. पश्चिमी देशों में ये आम हैं. लेकिन भारत में इसकी कहानी कुछ अलग है.
The New Romantic Essential? Why Gen Z Canadians are Saying “I Do” to Prenups: In the past, bringing up a prenuptial agreement was considered a “romance killer”—a sign that you were already planning for the end before the beginning. But for Gen Z… https://t.co/4jqNejtJuApic.twitter.com/KuFO3gT6PQ
— Weekly Voice (@Weeklyvoice) February 9, 2026
भारत के इस राज्य में मिली Prenuptial Agreement को मान्यता
भारतीय कानूनों के मुताबिक प्रेनप्चुअल एग्रीमेंट को सीधे तौर पर कानूनी मान्यता नहीं मिली है. हिंदू मैरिज एक्ट 1955 स्पेशल मैरिज एक्ट 1954 या अन्य पर्सनल लॉज में इनका कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है. कई कानून विशेषज्ञों का मानना है कि ये समझौते 'पब्लिक पॉलिसी' के खिलाफ माने जाते हैं क्योंकि वे शादी को एक 'कॉन्ट्रैक्ट' की तरह देखते हैं जबकि यहां इसे एक धार्मिक बंधन के रूप में लिया जाता है. हालांकि, गोवा राज्य अपवाद है जहां पुर्तगाली सिविल कोड के तहत ऐसे एग्रीमेंट्स को कानूनी तौर पर मान्यता मिलती है.
हाई-नेटवर्थ फैमिलीज में इस नियम से हो रहा फायदा
हाल के कुछ अदालती फैसलों ने इस क्षेत्र में रोशनी डाली है. जैसे मुंबई हाई कोर्ट ने एक मामले में कहा कि भले ही ये एग्रीमेंट्स बाध्यकारी न हों लेकिन वे जोड़ों की 'इंटेंशन' (इरादे) को साबित करने के लिए सबूत के तौर पर इस्तेमाल किए जा सकते हैं. इससे साफ है कि पूरी तरह से अमान्य होने के बावजूद ये दस्तावेज तलाक की सुनवाई में मददगार साबित हो सकते हैं. खासकर हाई-नेटवर्थ फैमिलीज में इसे आगे समझौतों में आसानी होती है.
क्या मुसलमानों में पहले से है ऐसा प्रावधान?
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर एग्रीमेंट दोनों पक्षों की सहमति से बिना दबाव के और फेयर तरीके से बनाया गया हो तो कोर्ट इसे विचार में ले सकती है. लेकिन मुस्लिम पर्सनल लॉ में 'मेहर' जैसे प्रावधान पहले से ही कुछ हद तक इसी काम को करते हैं. कानून के जानकारों की युवा जोड़ों को सलाह है कि अगर आप ऐसा एग्रीमेंट बनाना चाहते हैं तो लीगल एक्सपर्ट से सलाह लें.
हाई इनकम वाली जॉब्स रिलेशनशिप्स की सोच कैसे बदल रही हैं
एक खबर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है जिसमें बताया गया है कि ओपनएआई में काम करने वाली 31 साल की गुजरि सिंह सालाना 2 करोड़ रुपये से ज्यादा कमाती हैं, साथ ही कंपनी में इक्विटी भी है. न्यूयॉर्क टाइम्स की इस खबर के अनुसार गुजरि बिना प्रेनप्चुअल एग्रीमेंट के शादी नहीं करेंगी. इसके पीछे उन्होंने कारण बताते हुए बताया कि अपनी मेहनत से कमाए पैसे, प्रॉपर्टी और फ्यूचर एसेट्स को डिवोर्स या अलग होने की स्थिति में सुरक्षित रखना चाहती हैं. सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है इस खबर में बताया गया है कि हाई इनकम वाली जॉब्स रिलेशनशिप्स की सोच कैसे बदल रही हैं!
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