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Somnath Temple History (AI)
Somnath Temple History: एक बार नहीं, दो बार नहीं, 10 बार भी, 15 बार भी नहीं, सोमनाथ मंदिर पर कुल 17 बार हमले किए गए. जनवरी 1026 यानी आज से 1000 साल पहले अफगानिस्तान के तुर्क बादशाह मोहम्मद गजनवी ने सोमनाथ मंदिर पर हमला किया था. हमले का उद्देश्य मंदिर को लूटना या फिर मंदिर से जुड़ी आस्था को खत्म करना नहीं था, बल्कि भारत की महान धार्मिक और सभ्यतागत प्रतीक को नष्ट करना था. गजनवी ने मंदिर में विराजमान ज्योतिर्लिंग को भी नष्ट कर दिया. उसने पूरे मंदिर को लूट लिया. मंदिर का पूरा वैभव वह अपने साथ ले गया. गजनवी के हमले को सबसे बर्बर और खतरनाक माना जाता है.
इन आक्रांताओं ने किया हमला
महमूद गजनवी के बाद सन् 1299 में अलाउद्दीन खिलजी के आदेश पर दिल्ली सल्तनत ने गुजरात पर आक्रमण किया और मंदिर को लूट लिया. इसके बाद सन् 1395 में जफर खान ने मंदिर पर हमला किया. जफर बाद में गुजरात सल्तनत का संस्थापक बना. इसके बाद सन् 1451 में महमूद बेगड़ा ने मंदिर को अपवित्र किया. उसने मंदिर को मस्जिद तक बनाने की कोशिश की. इसके बाद सन् 1665 और सन् 1706 में दो बार मुगल शासक औरंगजेब ने मंदिर पर हमला किया और मंदिर को जमकर लूटा. इसके अलावा, समय-समय पर पुर्तगाली सहित अन्य व्यापारियों और शासकों ने मंदिर को क्षति पहुंचाई. अब तक कुल 17 बार मंदिर पर हमला किया.
खास बात है कि ये कहानी मंदिर पर बार-बार हुए हमले की नहीं है बल्कि मंदिर के बार-बार उठ खड़े होने की है.
- 1299 ईस्वी- अलाउद्दीन खिलजी की सेना का हमला
- 1395 ईस्वी- जफर खान का हमला
- 1451 ईस्वी- महमूद बेगड़ा का हमला
- 1665 ईस्वी- औरंगजेब का आदेश
- 1706 ईस्वी- औरंगजेब का आदेश
देवताओं ने करवाया मंदिर का निर्माण
हिंदू धर्मग्रंथों और लोककथाओं के अनुसार, मंदिर का सबसे पहला निर्माण इंसानों ने नहीं बल्कि खुद देवताओं ने करवाया था. मंदिर का सबसे पहला निर्माण सोने से हुआ था, चूंकि ये निर्माण सोमराज यानी चंद्रदेव ने करवाया था इसलिए मंदिर का नाम सोमनाथ पड़ा. कहा जाता है कि त्रेतायुग में मंदिर का निर्माण चांदी से रावण ने करवाया था. द्वापर युग में खुद भगवान श्रीकृष्ण ने चंदन की लकड़ी से मंदिर को पुननिर्माण करवाया.
इन-इन राजाओं ने करवाया मंदिर का पुननिर्माण
ईश्वर द्वारा बनाए गए मंदिर 815 तक थोड़े खंडित हो गए. इस वजह से सन् 815 में राजा नागभट्ट द्वितीय ने लाल पत्थर से मंदिर का दूसरी बार निर्माण करवाया. इस मंदिर को सन् 1026 ईस्वी में मोहम्मद गजनवी ने पूरी तरह से नष्ट कर दिया. इसका पुुननिर्माण 1026 से 1042 ईस्वी में मालवा के राजा भोज और गुजरात के सोलंकी राजा भीमदेव ने मिलकर करवाया. इसके बाद कुमारपाल ने सन् 1143 से 1172 ईस्वी तक मंदिर का फिर से निर्माण करवाया, उन्होंने मंदिर को पत्थर की एक भव्य संरचना बनवाया. मंदिर पर कई हमले हुए, मंदिर का मूल स्थान काफी क्षतिग्रस्त हो गया था. वहां पूजा-पाठ नहीं हो पा रही थी, जिस वजह से इंदौर की महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने मुख्य मंदिर से थोड़ी दूर पर नए मंदिर का निर्माण करवााया, जिससे श्रद्धालु अपने आराध्य की पूजा-पाठ कर सकें.
वल्लभ भाई पटेल ने मंदिर को दोबारा खड़ा करने का लिया संकल्प, नेहरू ने किया मना
साल 1947 में देश ब्रिटिश राज से आजाद हुआ. 1947 में तत्कालीन केंद्रीय गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल जूनागढ़ के दौरे पर आए. उन्होंने इस दौरान, सोमनाथ मंदिर के खंडहरों को देखा. उन्होंने इसे सदियों का अपमान माना और इसे फिर से बनाने का संकल्प किया. हालांकि, तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने इसे हिंदू पुनरुत्थानवाद बताया और पटेल को सलाह दी की मंदिर के पुननिर्माण और उद्घाटन से दूरी बनाए. पटेल और अन्य नेताओं ने इसे राष्ट्रीय स्वाभिमान का प्रतीक बताया. के.एम. मुंशी और राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने पटेल के संकल्प का समर्थन किया.
मंदिर के वजह से राजेंद्र प्रसाद और नेहरू में बहस
नेहरू का कहना था कि आधुनिक और धर्मनिरपेक्ष राज्य को धार्मिक मामलों से आधिकारिक रूप से खुद को अलग रखना चाहिए. उन्होंने परियोजना में केंद्र सरकार के धन और भागीदारी का कड़ा विरोध किया. मंदिर के उद्घाटन समारोह के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को भी आमंत्रण गया लेकिन नेहरू ने समारोह में जाने में आपत्ति जताई. देश के प्रथम राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने तर्क दिया कि मंदिर का पुनर्निर्माण पूर्ण रूप से निजी दान से किया जा रहा था, न कि सरकारी धन से. नेहरू की सलाह को नजरअंदाज करते हुए उन्होंने कहा कि वे वह राष्ट्रपति के रूप में नहीं, बल्कि एक व्यक्ति के रूप में मंदिर जा रहे हैं. प्रसाद का मानना था कि मंदिर का पुनर्निर्माण भारतीय सभ्यता के गौरव को बहाल करने का प्रतीक था. इसके बाद तत्कालीन राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद 11 मई 1951 को सोमनाथ मंदिर के उद्घाटन समारोह में शामिल हुए.
पीएम मोदी ने लिखा भावनात्मक लेख
11 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमनाथ जाएंगे. मंदिर में 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' आयोजित हो रहा है. 8 से 11 जनवरी के बीच मंदिर में विभिन्न कार्यक्रम किए जाएंगे. मंदिर पर हुए आक्रामण के एक हजार साल पूरे होने पर पीएम मोदी ने एक भावनात्मक लेख लिखा है.
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