ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट बनेगा भारत का 'नया हांगकांग' या पर्यावरण का कब्रिस्तान? NGT की हरी झंडी के बाद उठ रहे सवाल

Great Nicobar Project: विशेषज्ञों के मुताबिक ग्रेट निकोबार की भौगोलिक स्थिति इसे हांगकांग या सिंगापुर जैसा मुक्त व्यापार क्षेत्र बनाने के लिए आदर्श बनाती है.

Great Nicobar Project: विशेषज्ञों के मुताबिक ग्रेट निकोबार की भौगोलिक स्थिति इसे हांगकांग या सिंगापुर जैसा मुक्त व्यापार क्षेत्र बनाने के लिए आदर्श बनाती है.

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Amit Kasana
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प्रतिकात्मक फोटो

Great Nicobar Project: भारत सरकार की महत्वाकांक्षी ग्रेट निकोबार परियोजना को राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) से हाल ही में मंजूरी मिल गई है. जिससे अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह के इस द्वीप को ग्लोबल व्यापारिक केंद्र में बदलने का मार्ग साफ हो गया है. 

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इस परियोजना को 'भारत का हांगकांग' करार दिया जा रहा है, क्योंकि यह मलक्का जलडमरूमध्य के निकट स्थित होने से अंतरराष्ट्रीय शिपिंग और व्यापार के लिए रणनीतिक हब बन सकता है. हालांकि, पर्यावरणविदों और स्थानीय जनजातियों के विरोध के बीच यह फैसला विवादों को भी हवा दे रहा है. आइए ये मामला क्या है आसान भाषा में आपको समझाते हैं.


क्या है ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट

यह परियोजना जिसका आधिकारिक नाम 'ग्रेट निकोबार द्वीप का समग्र विकास' है, करीब 92 हजार करोड़ रुपये की लागत से बनाई जा रही है. इसका मुख्य उद्देश्य ग्रेट निकोबार द्वीप के दक्षिणी छोर पर एक अंतरराष्ट्रीय कंटेनर ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल, सैन्य और नागरिक उपयोग वाला हवाई अड्डा, बिजली संयंत्र, नया शहर और पर्यटन सुविधाएं विकसित करना है. 

ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट से क्या होगा फायदा

सरकार का दावा है कि इससे भारत विदेशी बंदरगाहों पर निर्भरता कम करेगा और सालाना अरबों रुपये की बचत होगी, क्योंकि वर्तमान में भारत का ज्यादातर ट्रांसशिपमेंट कार्गो सिंगापुर या कोलंबो जैसे विदेशी हब से गुजरता है. यहां व्यापार, पर्यटन और रक्षा सुविधाओं का मिश्रण होगा. यह परियोजना 30 वर्षों में चरणबद्ध तरीके से पूरी होगी. एक रिपोर्ट के अनुसार अनुमान है कि इससे द्वीप की आबादी 6.5 लाख तक पहुंच सकती है, जो वर्तमान में मात्र 8 हजार के आसपास है।

ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट की हांगकांग से तुलना क्यों 

विशेषज्ञों के मुताबिक ग्रेट निकोबार की भौगोलिक स्थिति इसे हांगकांग या सिंगापुर जैसा मुक्त व्यापार क्षेत्र बनाने के लिए आदर्श बनाती है. यह द्वीप इंडियन ओशन रीजन में प्रमुख शिपिंग मार्गों के करीब है, जो चीन की 'स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स' रणनीति का सामना करने में भारत की मदद कर सकता है. यही वजह है कि लोग इसे 'नई दिल्ली का हांगकांग जैसा प्रोजेक्ट' बता रहे हैं. 

ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट का क्यों हो रहा है विरोध

आलोचक इसे पर्यावरणीय आपदा करार दे रहे हैं. परियोजना से लगभग 9.64 लाख पेड़ कटेंगे, जो यूनेस्को द्वारा घोषित बायोस्फियर रिजर्व को प्रभावित करेगा. बताया जा रहा है कि इससे शॉम्पेन और निकोबारी जैसे आदिवासी समुदायों को बाहरी संपर्क से बीमारियों का खतरा है, जो उनके अस्तित्व को संकट में डाल सकता है. वहीं, द्वीप के भूकंप संवेदनशील क्षेत्र होने से इसके डूबने का भी जोखिम है.

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