/newsnation/media/media_files/2026/02/25/delhi-riots-2020-2026-02-25-10-34-01.jpg)
दिल्ली दंगे 2020 (प्रतिकात्मक फोटो)
Delhi riots 2020: फरवरी 2020 में दिल्ली के उत्तर-पूर्वी इलाकों में सांप्रदायिक हिंसा भड़की थी जिसने पूरे देश को हिला दिया था.23 फरवरी से शुरू हुई यह हिंसा 29 फरवरी तक चली जिसमें कम से कम 53 लोगों की मौत हुई और सैकड़ों घायल हुए.
जानकारी के अनुसार मुख्य रूप से जाफराबाद, मौजपुर, भजनपुरा और शिव विहार जैसे इलाकों में यह हिंसा फैली थी. जहां संपत्ति का भारी नुकसान हुआ, घर जले, दुकानें लूटी गईं और धार्मिक स्थल क्षतिग्रस्त हुए.
It’s been six years since the Delhi riots happened back in 2020, one of the key highlights of AAP’s misdemeanor governance pic.twitter.com/pYVxJVU5Fu
— Varun Uppal (@imvarunuppal) February 25, 2026
दंगों के पीछे गहरी सांप्रदायिक दरारें और राजनीतिक उकसावा
रिपोर्टृस के अनुसार यह हिंसा नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच भड़की थी. लेकिन इसके पीछे गहरी सांप्रदायिक दरारें और राजनीतिक उकसावे की भूमिका थी. आज 25 फरवरी 2026 को इस घटना को ठीक 6 साल पूरे हो चुके हैं लेकिन न्याय की प्रक्रिया अभी भी लंबित है और समाज में घाव बाकी हैं.
दिल्ली दंगों का क्या था कारण? विरोध से हिंसा तक की पूरी कहानी...
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार हिंसा की जड़ें दिसंबर 2019 में पारित सीएए में छिपी हैं जो अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश से आए गैर-मुस्लिम शरणार्थियों को नागरिकता देने का प्रावधान करता है. मुसलमानों को इससे बाहर रखने से कई लोग इसे भेदभावपूर्ण मानते थे जिससे शाहीन बाग जैसे इलाकों में बड़े पैमाने पर शांतिपूर्ण विरोध शुरू हुए.
#WATCH | Delhi | On the 6th anniversary of the 2020 Delhi riots, a victim, Vinod Joshi, says, "Whenever this comes to mind, my soul trembles. It feels as if the incident has just happened right now. We never even dreamed that such devastation would occur. Almost thousands of… pic.twitter.com/68fS9VXPKX
— ANI (@ANI) February 25, 2026
भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने मौजपुर में रैली निकाली जिसके बाद हिंसा भड़क गई
22 फरवरी 2020 को जाफराबाद मेट्रो स्टेशन पर महिलाओं के नेतृत्व में सड़क जाम ने तनाव बढ़ा दिया. फिर अगले दिन भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने मौजपुर में एक रैली निकाली और पुलिस को सड़क खाली कराने का 'अल्टीमेटम' दिया जिसके बाद हिंसा भड़क गई.
मुसलमानों के खिलाफ लक्षित हमला भी बताया गया
कई रिपोर्ट्स में इसे मुसलमानों के खिलाफ लक्षित हमला बताते हैं जहां हिंदू भीड़ ने घरों और मस्जिदों पर हमले किए. वहीं, कुछ दृष्टिकोणों में इसे पूर्वनियोजित मुस्लिम आक्रामकता का नतीजा माना जाता है जहां सीएए विरोध को राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल किया गया और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की यात्रा के समय भारत की छवि खराब करने की साजिश थी.
पश्चिमी मीडिया अक्सर पूर्वाग्रह से रही ग्रसित
पश्चिमी मीडिया को अक्सर पूर्वाग्रहपूर्ण बताया जाता है जो धार्मिक द्वंद्व पर ज्यादा फोकस करता है जबकि भारतीय मीडिया में हिंदू राष्ट्रवाद और सेकुलर दृष्टिकोण के बीच विभाजन दिखता है. पुलिस की भूमिका भी विवादास्पद रही कुछ रिपोर्ट्स में उन्हें निष्क्रिय या पक्षपाती बताया गया जबकि अन्य में पुलिस को ही हमलों का शिकार माना गया.
#WATCH | Delhi | On the 6th anniversary of the 2020 Delhi riots, a victim, Ram Das Gupta, says, "Slogans were being chanted across the road, and the police were standing there. Suddenly, people started breaking the railing and coming towards our pump. Stones were thrown at the… pic.twitter.com/AzwMrsuExj
— ANI (@ANI) February 25, 2026
दिल्ली दंगों में हुई मौतें, विस्थापन और अब आगे न्याय की राह क्या?
मीडियारिपोर्ट्स के अनुसार हिंसा में 53 मौतें हुईं जिनमें ज्यादातर मुसलमान थे. साथ ही मरने वालों में एक पुलिसकर्मी और एक खुफिया अधिकारी भी शामिल था. दंगों में हजारों लोग विस्थापित हुए और करोड़ों में आर्थिक नुकसान हुआ था. घटना के बाद कई जांच कमेटियां बनीं लेकिन न्याय की गति धीमी रही. आज 6 साल बाद भी मुसलमानों में सीएए से जुड़ा डर बाकी है और हाल ही में कानून की अधिसूचना ने फिर इस पर विवाद खड़ा कर दिया है. समाज में ध्रुवीकरण बढ़ा है लेकिन कुछ सकारात्मक पहल जैसे सामुदायिक पुनर्निर्माण भी हुए हैं.
ये भी पढ़ें: 2020 Delhi Riots: दिल्ली दंगों के 6 साल पूरे, 53 लोगों की गई थी जान, सिर्फ एक को ठहराया गया हत्या का दोषी
/newsnation/media/agency_attachments/logo-webp.webp)
Follow Us