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 म्यांमार की शैडो सरकार ने किया आपातकाल का आह्वान, सैन्य शासन को उखाड़ फेंकने का इरादा

म्यांमार की एनयूजी सरकार ने मंगलवार को देश में आपातकाल की घोषणा कर दी है.

News Nation Bureau | Edited By : Pradeep Singh | Updated on: 08 Sep 2021, 10:05:26 PM
Myanmar

म्यांमार में आपातकाल (Photo Credit: NEWS NATION)

highlights

  • म्यांमार में चीनी निर्माताओं को ग्राहकों से ऑर्डर मिलने बंद हो गये हैं
  • एनयूजी की स्थापना 16 अप्रैल को किया गया था. इसमें अपदस्थ राजनेता और कार्यकर्ता शामिल हैं
  • आंग सान सू की लंबे समय से म्यांमार में चला रही हैं लोकतंत्र बहाली के लिए आंदोलन

नई दिल्ली:

साल 1988 तक बर्मा के नाम से जाना जाने वाला म्यांमार इस समय फिर सुर्खियों में है. म्यांमार की एनयूजी सरकार National Unity Government (NUG) ने मंगलवार को देश में आपातकाल की घोषणा कर दी है. हालांकि म्यांमार का वास्तविक शासन सेना के कब्जे में है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या म्यांमार एक बार फिर अराजकता की तरफ बढ़ेगा. हालांकि चीनी विश्लेषकों का अनुमान है कि सैन्य ताकत के कारण देश अराजकता का शिकार नहीं होगा क्योंकि सेना के सामने 'शैडो सरकार' की तकात बहुत कम है. म्यांमार लंबे समय तक सैनिक शासन के अधीन रहा. आंग सान सू की लंबे समय से वहां लोकतंत्र की बहाली के लिए आंदोलन चलाती रही हैं. 

ग्लोबल टाइम्स ने स्थानीय स्रोतों के हवाले से एक खबर प्रकाशित किया कि म्यांमार में चीनी निर्माताओं को पहले ही ग्राहकों के ऑर्डर मिलने बंद हो गये हैं और पहले के ऑर्डर निलंबित हो रहे हैं. एनयूजी की स्थापना 16 अप्रैल को किया गया था. इसमें अपदस्थ राजनेता, नेता और कार्यकर्ता शामिल हैं -ने मंगलवार को एनयूजी के फेसबुक अकाउंट पर पोस्ट किए गए एक वीडियो के साथ देशव्यापी आपातकाल की घोषणा की, यह कहते हुए कि यह सेना के खिलाफ "रक्षात्मक युद्ध" शुरू कर रहा है.

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वीडियो में, कार्यवाहक एनयूजी अध्यक्ष दुवा लशी ला ने स्टेट काउंसलर आंग सान सू की, राष्ट्रपति यू विन मिंट और अन्य वरिष्ठ राजनेताओं की नजरबंदी के बाद म्यांमार में नागरिकों से 1 फरवरी को राज्य की सत्ता संभालने वाली सेना के शासन के खिलाफ विद्रोह करने का आह्वान किया. 

एनयूजी ने एक नई रणनीति का भी खुलासा किया है. जिसका उद्देश्य मिलिशिया और जातीय ताकतों द्वारा कार्रवाई के माध्यम से सेना पर दबाव डालने के साथ-साथ नौकरशाहों से सरकारी पदों को छोड़ने का आग्रह करना था.

ग्लोबल टाइम्स के अनुसार एनयूजी की घोषणा के जवाब में सेना ने कोई कार्रवाई नहीं की है. फिलहाल सेना ने यांगून में सुरक्षा बढ़ा दी थी. कुछ सैन्य ठिकानों में लड़ाकू विमानों को खंगाला. लेकिन किसी अभियान पर नहीं निकला.   

म्यांमार के विशेषज्ञ और म्यांमार-चीनी यूथ चैंबर ऑफ कॉमर्स के महासचिव हेन खिंग ने मंगलवार को ग्लोबल टाइम्स को बताया कि यांगून के कुछ निवासी सामान जमा करने के लिए सुपरमार्केट में पहुंचे, लेकिन शहर स्थिर बना हुआ है.

मांडले शहर में कई सैनिकों को उतारा गया था, और पीपुल्स डिफेंस फोर्स (पीडीएफ) ने एनयूजी की कॉल का जवाब दिया, जिसमें काचिन इंडिपेंडेंस आर्मी और कोकांग ने एनयूजी को समर्थन दिखाया. स्थानीय स्रोतों के अनुसार, करेन नेशनल यूनियन की सैन्य सरकार के साथ कई झड़पें हुईं.

युन्नान एकेडमी ऑफ सोशल साइंसेज के प्रोफेसर झू झेनमिंग ने मंगलवार को ग्लोबल टाइम्स को बताया, "हालांकि म्यांमार सेना द्वारा सत्ता पर कब्जा करने के बाद से देश भर में बिखरे हुए विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, लेकिन ऐसा कोई नहीं है जो वास्तव में एक वास्तविक खतरा पैदा कर सके." .

झू ने कहा, "जब तक एनयूजी के पीछे विदेशी ताकतें नहीं हैं जो इसे सैन्य हथियार मुहैया करा सके, इस बात की बहुत कम संभावना है कि एनयूजी ठोस कार्रवाई करेगा."

फिलहाल, इस तरह की कॉल म्यांमार की पहले से बिगड़ती महामारी, अराजकता और आर्थिक संकट को बढ़ा सकती हैं. 

साल 1988 का विद्रोह आधुनिक म्यांमार के इतिहास का निर्णायक क्षण था. सत्ता पर अपना कब्जा बरकरार रखने के लिए बेइंतहा हिंसा का सहारा लेने वालों ने अचानक ख़ुद को भारी विरोध के सामने खड़ा पाया. सैनिक शासन ने देश की अर्थव्यवस्था को जिस बुरी तरह से तहस-नहस किया था उसके ख़िलाफ़ जनता का ग़ुस्सा फूट पड़ा था. ऐसे में क्या एक बार फिर म्यांमार की जनता सैन्य शासन को उखाड़ फेंकने का मन बना रही है.

First Published : 08 Sep 2021, 05:31:53 PM

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