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भारत और तालिबान के बीच पहली औपचारिक बातचीत, रिश्तों की नई पहल

मित्तल ने अब्बास को यह भी बताया कि अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल किसी भी भारत विरोधी गतिविधि या आतंकवाद के लिए नहीं होना चाहिए.

News Nation Bureau | Edited By : Pradeep Singh | Updated on: 01 Sep 2021, 01:09:14 PM
DEEPAK MITTAL

दीपक मित्तल (Photo Credit: NEWS NATION)

highlights

  • दीपक मित्तल ने शेर मोहम्मद आतंकवाद के मुद्दे पर भारत की चिंता जाहिर की
  • तालिबान लीडर शेर मोहम्मद अब्बास तालिबान की पॉलिटिकल विंग का हेड है
  • शेर मोहम्मद 1980 के दशक में भारत में रह चुका है

नई दिल्ली:

तालिबान हमेशा से भारत की राजनीति का एक प्रमुख मुद्दा रहा है. पाकिस्तान तालिबानी आतंकियों के सहारे कश्मीर में आतंकी घटनाओं को अंजाम देता रहा है. अफगानिस्तान में दूसरी बार तालिबान के आने के बाद भारत के साथ उसके क्या रिश्ते होंगे, यह अभी तय नहीं हुआ है. लेकिन तालिबान से बातचीत किया जाये या नहीं भारत इस उहापोह से निकल गया है. भारत और तालिबान के बीच मंगलवार को पहली औपचारिक बातचीत हुई. कतर में भारत के राजदूत दीपक मित्तल ने तालिबान लीडर शेर मोहम्मद अब्बास स्टेनेकजई से बातचीत की. भारतीय राजनयिक मित्तल और तालिबानी नेता शेर मोहम्मद के बीच यह मुलाकात तालिबान की पहल पर हुई है.

अब्बास तालिबान की पॉलिटिकल विंग का हेड है और भारत से उसका पुराना संबंध है. यह मुलाकात दोहा स्थित इंडियन एम्बेसी में हुई. शेर मोहम्मद 1980 के दशक में भारत में रह चुका है. उसने देहरादून स्थित मिलिट्री एकेडमी में ट्रेनिंग ली है. वो अफगान मिलिट्री में रहा, लेकिन बाद में इसे छोड़कर तालिबान के साथ चला गया.

दीपक मित्तल ने शेर मोहम्मद आतंकवाद के मुद्दे पर भारत की चिंता जाहिर की. क्योंकि भारत लंबे समय से सीमापार से जारी आतंकवाद से पीड़ित है. भारत की चिंता है कि तालिबान के आने के बाद वहां की धरती का इस्तेमाल भारत विरोधी आतंकी गतिविधियों के लिए न हो. भारत की इस चिंता पर अब्बास ने भरोसा दिलाया कि इस मामले को तालिबान सरकार पूरी संजीदगी के साथ देखेगी.

मीडिया रिपोर्टस के अनुसार बातचीत का फोकस सुरक्षा और अफगानिस्तान में फंसे भारतीयों की सुरक्षित वतन वापसी पर था. भारत ने तालिबानी नेताओं को बताया कि अफगानिस्तान के जो अल्पसंख्यक भारत आना चाहते हैं, उनको लेकर भी हम फिक्रमंद हैं. मित्तल ने अब्बास को यह भी बताया कि अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल किसी भी भारत विरोधी गतिविधि या आतंकवाद के लिए नहीं होना चाहिए.

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पिछले दिनों भारत में हुई ऑल पार्टी मीटिंग के दौरान विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला ने कहा था कि अफगानिस्तान को लेकर भारत फिलहाल, इंतजार करो और देखो की रणनीति पर चल रहा है. इस बारे में करीबी सहयोगियों के साथ भी बातचीत जारी है.

तालिबान के दो प्रवक्ता पहले ही साफ कर चुके हैं कि नई हुकूमत भारत के साथ ट्रेड और पॉलिटिकल रिलेशन चाहती है और इसे बारे में भारत से संपर्क किया जाएगा. खुद शेर मोहम्मद ने दो दिन पहले कहा था कि अगर पाकिस्तान दोनों देशों के बीच कारोबारी रास्ते को खोलने में आनाकानी करता है तो एयर कॉरिडोर का विकल्प खुला है.

तालिबान से बातचीत पर विपक्ष हुआ हमलावर

काबुल पर तालिबान के कब्जा के बाद जो विपक्ष सरकार को नतीहतें दे रही थी कि भारत सरकार सो रही है और अफगानिस्तान के ताजा घटनाक्रम से अनजान है वही विपक्ष अब सरकार पर हमलावर हो गयी है. तालिबान से बातचीत की खबर सामने आते ही कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि बधाई हो! आतंक के नाम पर कोई समझौता न करने वाली मोदी सरकार ने तालिबान से बातचीत शुरू कर दी है. भारत के राजदूत ने मंगलवार को तालिबान के राजनीतिक प्रमुख से वार्ता करके उन्हें राजनीतिक मान्यता देने की तरफ एक कदम बढ़ा दिया है.

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वहीं, AIMIM के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि क्या इस तरह की बातचीत तालिबान को मान्यता दिलाने में मदद करेगी? भारत संयुक्त राष्ट्र में तालिबान पर प्रतिबंध लगाने वाली कमेटी का अध्यक्ष है. क्या अब उन्हें इस लिस्ट से हटा दिया जाएगा. या आप उन्हें UAPA कानून के तहत आतंकी सूची में डाल देंगे. मेरा सुझाव है कि BJP समर्थक इस तरह की बातचीत पर आगे बढ़ें या चुप रहें और सभी को तालिबान कहना बंद करें.

भारत अफगानिस्तान का संबंध सदियों पुराना है. पिछले 20 वर्षों में भारत ने अफगानिस्तान के पुनर्निर्माण में भारी निवेश किया है. अफगानिस्तान भी भारत से संबंध बनाये रखना चाहता है. ऐसे में दोनों पक्षों की बातचीत आने वाले दिनों में रिश्तों का नया द्वार खोलेगी. 

First Published : 01 Sep 2021, 01:09:14 PM

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