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जानें क्या होता है ऑप्टिकल फाइबर? दूसरों से फास्ट होता है फाइबर इंटरनेट?

मौजूदा समय इंटरनेट का है. इन दिनों फाइबर इंटरनेट काफी पॉपुलर है. देश-दुनिया की खबरें सोशल मीडिया पर हलचल जानने के लिए इंटरनेट का होना बहुत आवश्यक है. कुछ सालों तक ब्रॉडबैंड कनेक्शन फाइबर बेस्ड कम ही होते थे. 

News Nation Bureau | Edited By : Sushil Kumar | Updated on: 07 Dec 2020, 03:57:50 PM
प्रतीकात्मक फोटो

प्रतीकात्मक फोटो (Photo Credit: फाइल फोटो)

नई दिल्ली:

मौजूदा समय इंटरनेट का है. इन दिनों फाइबर इंटरनेट काफी पॉपुलर है. देश-दुनिया की खबरें सोशल मीडिया पर हलचल जानने के लिए इंटरनेट का होना बहुत आवश्यक है. कुछ सालों तक ब्रॉडबैंड कनेक्शन फाइबर बेस्ड कम ही होते थे. वायरलेस, वाईमैक्स का यूज किया जाता था. केबल के जरिए इंटरनेट यूजर्स को दिया जाता था. लेकिन वर्तमान समय में फाइबर इंटरनेट की डिमांड काफी बढ़ गई है. इसकी खास वजह ये है कि फाइबर इंटरनेट से स्पीड ज़्यादा हासिल की जा सकती है. इससे तेजी से डेटा ट्रांसफ़र होता है.

बता दें कि एक आम यूज़र के लिए फ़ाइबर इंटरनेट नया है, लेकिन इंटरनेट की दुनिया में फाइबर काफी पुराना है. इसे बहुत पहले से यूज किया जाता रहा है. दरअसल फ़ाइबर केबल्स को 1950 में मेडिकल यूज के लिए तैयार किया गाया था. बिना सर्जरी किए हुए फाइबर केबल के जरिए डॉक्टर्स मरीज की बॉडी के अंदर देख सकें, इसके लिए इसका अविष्कार किया गया था. दुनिया में जो इंटरनेट का जाल है वो फाइबर के बिना मुमकिन नहीं है. फाइबर दुनिया भर में एक स्पाइडर वेब की तरह बिछे हैं और यही वजह है की आपके पास इंटरनेट पहुंच रहा है.

फाइबर-ऑप्टिक्स

फाइबर-ऑप्टिक संचारण एक प्रणाली है, जिसमें सूचनाओं की जानकारी एक स्थान से दूसरे स्थान में ऑप्टिकल फाइबर के माध्यम से प्रकाश बिन्दुओं के रूप में भेजी जाती हैं. प्रकाश एक विद्युत चुम्बकीय तरंग वाहक विकसित करता है जो विधिवत् रूप से जानकारी को साथ ले जाते हैं.

ऑप्टिकल फाइबर कैसे काम करता हैै

ऑप्टिकल फाइबर पर जहां डाटा रिसीव किया जाता है, वहां एक ट्रांसमीटर लगा होता है. बता दें कि यहीं से डाटा ऑप्टिकल फाइबर लाइन से जाता या आता है. यह ट्रांसमीटर इलेक्ट्रॉनिक पल्स इनफार्मेशन को सुलझाता है और इसको प्रोसेस करके लाइट पल्स के रूप में ऑप्टिकल फाइबर लाइन में ट्रांसमिट कर देता है. डिजिटल डाटा लाइट पल्स के रूप में केबल के अंदर भेजा जाता है. इनको रिसीवर एन्ड पर बाइनरी वैल्यू में बदल लिया जाता है. इसी को आपका कंप्यूटर समझ पता है और आपको जानकारी दे पता है.

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First Published : 07 Dec 2020, 03:57:50 PM

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