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चांद के बाद अब इसरो की नजर सूरज पर, जानिए क्‍या है मिशन का नाम

चांद के बाद अब इसरो की नजर सूरज पर है. चंद्रयान-2 के सफल प्रेक्षेपण के बाद अब भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी ISRO का अगला लक्ष्य सूर्य है.

News Nation Bureau | Edited By : Drigraj Madheshia | Updated on: 22 Jul 2019, 09:17:51 PM
प्रतिकात्‍मक चित्र

नई दिल्‍ली:  

चांद के बाद अब इसरो की नजर सूरज पर है. चंद्रयान-2 के सफल प्रेक्षेपण के बाद अब भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी ISRO का अगला लक्ष्य सूर्य है. सोमवार को एक न्यूज एजेंसी ने इसरो के हवाले से बताया कि इसे 2020 के मध्य तक लॉन्च करने की योजना है. इसका मकसद यह पता लगाना है कि सूर्य के सतह के तापमान 6000 कैलविन से कोरोना का तापमान 300 गुना ज्यादा क्यों है. जबकि कोरोना इससे काफी ऊपर है.

इसरो ने अपनी वेबसाइट पर इस मिशन से संबंधित जानकारी साझा की है. सूर्य की इस बाहरी परत को तेजोमंडल कहते हैं, जो हजारों किमी तक फैली है. इसरो चीफ के.सिवन  ने कहा- आदित्य-एल1 पृथ्वी से 1.5 मिलियन किमी की दूरी पर स्थित होगा. वहां से यह हमेशा सूर्य की ओर देखेगा.

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सूर्य की इस बाहरी परत ‘तेजोमंडल’ का विश्लेषण देगा. इसका क्लाइमेट चेंज पर इसका खासा प्रभाव है. डॉक्टर सिवन के मुताबिक, 'इसरो की नजर अब सूरज तक है. इसरो इसके लिए एक मिशन ला रहा है. इस मिशन में सूरज के लिबरेशन पॉइंट 1 पर एक सैटलाइट भेजने की योजना है.' भारत की अंतरिक्ष में भविष्य की योजनाओं पर डॉक्टर सिवन ने कहा कि भारत की नजर अंतरिक्ष ताकत बनने पर भी है.

आदित्य-एल1 कई अध्ययन कर सकता है

रिपोर्ट के मुताबिक- आदित्य-एल1, सूर्य के फोटोस्फेयर, क्रोमोस्फेयर और तेजोमंडल का अध्ययन कर सकता है. यह सूर्य से निकलने वाले विस्फोटक कणों का अध्ययन भी किया जाएगा. इसरो के अनुसार यह कण पृथ्वी के नीचे वाले ऑरबिट में किसी काम के नहीं होते. इन्हें पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र से बाहर रखने की जरूरत है.

भविष्य में मिशन वीनस का लक्ष्य

भविष्य की योजनाओं पर इसरो चेयरमैन ने कहा- 'मिशन गगनयान दिसंबर 2021 तक पूरा होगा. इस मिशन में इसरो पहली बार भारत में बने रॉकेट को स्पेस में भेजेगा. इसकी बेसिक ट्रेनिंग भारत में होगी, लेकिन अडवांस ट्रेनिंग विदेश में होगी. 

  • इस मिशन का बजट 10,000 करोड़ तक का है.
  • भविष्य में हमारी योजना मिशन वीनस 2023 के लिए है.
  • पिछले कुछ वक्त में ग्लोबल वॉर्मिंग की समस्या वैश्विक स्तर पर विकराल हुई है.
  • इसरो ग्लोबल वॉर्मिंग की चुनौती से निपटने के लिए भी खास मिशन पर काम कर रहा है.'

First Published : 22 Jul 2019, 09:16:59 PM

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