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इसरो के नेविगेशन सैटलाइट लॉन्च की उल्टी गिनती शुरू

इसरो पहली बार निजी कंपनियों के सहयोग से बने अपने किसी उपग्रह को लॉन्च करने जा रहा है। उपग्रह का नाम आईआरएनएसएस-1 एच है।

IANS | Updated on: 30 Aug 2017, 09:13:57 PM

highlights

  • अंतरिक्ष क्षेत्र में काम करने वाली भारतीय कंपनियों के लिए गुरुवार का दिन काफी अहमियत रखता है।
  • इसरो पहली बार निजी कंपनियों के सहयोग से बने अपने किसी उपग्रह को लॉन्च करने जा रहा है।
  • उपग्रह का नाम आईआरएनएसएस-1 एच है।

 

नई दिल्ली:

अंतरिक्ष क्षेत्र में काम करने वाली भारतीय कंपनियों के लिए गुरुवार का दिन काफी अहमियत रखता है। इसरो पहली बार निजी कंपनियों के सहयोग से बने अपने किसी उपग्रह को लॉन्च करने जा रहा है। उपग्रह का नाम आईआरएनएसएस-1 एच है।

भारत के आठवें नौवहन उपग्रह आईआरएनएसएस-1एच के प्रक्षेपण की 29 घंटे की उलटी गिनती यहां से लगभग 80 किलोमीटर दूर श्रीहरिकोटा रॉकेट केंद्र पर बुधवार अपराह्न् दो बजे शुरू हो गई है।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के एक अधिकारी ने बताया कि भारतीय क्षेत्रीय नौवहन उपग्रह प्रणाली (आईआरएनएसएस) के हिस्से, 1,425 किलोग्राम वजनी उपग्रह को ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी) का रॉकेट एक्सएल अंतरिक्ष में लेकर जाएगा, जिसे गुरुवार शाम लगभग सात बजे छोड़ा जाएगा।

यह आठवां आईआरएनएसएस उपग्रह होगा और इसका प्रक्षेपण आईआरएनएसएस-1ए के स्थान पर किया जा रहा है, क्योंकि आईआरएनएसएस-1ए की रूबीडियम परमाणु घड़ियां खराब हो रही हैं और सटीक स्थिति डेटा प्रदान करने के लिए परमाणु घड़ियां जरूरी होती हैं।

सीधे शब्दों में कहें तो आईआरएनएसएस या नाविक (नेविगेशन विद इंडियन कांस्टेलेशन) अमेरिका के स्वामित्व वाले जीपीएस के समान है।

1,420 करोड़ रुपये लागत वाला भारतीय उपग्रह नौवहन प्रणाली, नाविक में नौ उपग्रह शामिल हैं, जिसमें सात कक्षा में और दो विकल्प के रूप में हैं। एक विकल्प में आईआरएनएसएस-1एच है।

आईआरएनएसएस-1एच का नौवहन पेलोड उपयोगकर्ताओं को नौवहन सर्विस सिग्नल प्रेषित करेगा। यह पेलोड एल 5-बैंड और एस-बैंड पर काम करेगा।

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आईआरएनएसएस-1एच पेलोड में एक सी-बैंड ट्रांसपोंडर भी शामिल है, जो उपग्रह की सीमा के सटीक निर्धारण की सुविधा देता है। आईआरएनएसएस-1एच लेजर रेंजिंग के लिए कॉर्नर क्यूब रेट्रो रिफ्लेक्टर भी लेकर जा रहा है।

इसरो के अनुसार, नाविक मछुआरों को मछली पकड़ने के लिए संभावित क्षेत्र में पहुंचने में मददगार साबित होगा। वह मछुआरों को खराब मौसम, ऊंची लहरों और अंतर्राष्ट्रीय समुद्री सीमा के पास पहुंच पहुंचने से पहले सतर्क होने का संदेश देगा। यह सेवा स्मार्टफोन पर एक सॉफ्टवेयर एप्लीकेशन के द्वारा उपलब्ध होगी।

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First Published : 30 Aug 2017, 07:25:19 PM

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