logo-image
लोकसभा चुनाव

पहली बार सामने आया इंसानी दिमाग का थ्रीडी नक्शा, होंगे ये फायदे

गूगल (Google) ने इंसानी दिमाग के एक हिस्से के अब तक के सबसे विस्तृत नक्शे को सामने लाकर सभी को चौंका दिया है.

Updated on: 10 Jun 2021, 10:39 AM

highlights

  • सभी तंत्रिका कोशिकाएं बारीक टेंड्रिल्स के जाल से आपस में जुड़ी हुई है
  • नक्शे को तैयार करने में 1.4 पेटाबाइट्स डेटा का इस्तेमाल किया गया

नई दिल्ली:

इंसान के पूरे दिमाग का अध्ययन अभी तक संभव नहीं हो पाया है. इंसानी दिमाग की जटिलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कभी एक हिस्से का अध्ययन होता है तो कभी दूसरे हिस्से का. जानकारी के मुताबिक मौजूदा समय में दुनिया के किसी भी वैज्ञानिक के पास दिमाग के पूरे हिस्से का नक्शा या उसके काम करने की बेहद बारीक जानकारी उपलब्ध नहीं है. ऐसे में गूगल (Google) ने इंसानी दिमाग के एक हिस्से के अब तक के सबसे विस्तृत नक्शे को सामने लाकर सभी को चौंका दिया है.

इस मैप के जरिए न्यूरोसाइंटिस्ट्स को मिल सकती है काफी मदद 
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस नक्शे में न्यूरॉन्स और उनके आपस में जुड़ाव को बेहद बारीकी से दिखाया गया है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक नक्शे से मिली जानकारी के अनुसार एक न्यूरॉन्स से करीब 4000 नर्व फाइबर जुड़े रहते हैं. न्यूरोसाइंटिस्ट्स को इस मैप के जरिए काफी मदद मिल सकती है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इंसानी दिमाग के एक बेहद छोटे हिस्से के नक्शे को गूगल ने बनाया था. जानकारी के मुताबिक इस नक्शे में 50 हजार कोशिकाएं दिखाई दीं और यह सभी कोशिकाएं थ्री-डायमेंशनल थी.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सभी तंत्रिका कोशिकाएं बारीक टेंड्रिल्स के जाल से आपस में जुड़ी हुई है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक टेंड्रिल्स की वजह से 13 करोड़ कनेक्शन बन गए थे जिनको सिनैप्सेस कहा जाता है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस नक्शे को तैयार करने में 1.4 पेटाबाइट्स डेटा यानी आम कंप्यूटर स्टोरेज क्षमता से 700 गुना ज्यादा डेटा का इस्तेमाल किया गया है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कैलिफोर्निया के माउंटेन व्यू में स्थित गूगल रिसर्च के साइंटिस्ट विरेन जैन का कहना है कि चूंकि यह डेटा काफी बड़ा था इसलिए अध्ययनकर्ता इस पर पूरा रिसर्च नहीं कर पाए. उनका कहना है कि इंसान के जीनोम की तरह 20 साल बाद पहली बार इसको डिकोड किया गया है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की साइंटिस्ट कैथरीन डुलैक का कहना है कि पहली बार इंसानी दिमाग के किसी हिस्से की असली तस्वीर देखनने को 
मिली है.