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Chandrayaan-2 Launch : सोने की परत में लपेटे जाते हैं सैटेलाइट, ये है बड़ी वजह

अब इसे चांद तक पहुंचने में 48 दिनों का वक्त लगेगा. चंद्रयान के एक हिस्से में सोना (Gold) मढ़ा गया है. इसके इस्तेमाल की ये है वैज्ञानिक वजह ..

Updated on: 22 Jul 2019, 06:15 PM

नई दिल्‍ली:

चांद पर जाने वाले भारत के चंद्रयान-2 (Chandrayaan2 ) की लॉन्चिंग सफल हो गई है. भारतीय अंतरिक्ष मिशन के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा चंद्रयान-2 (Chandrayaan2 ) सोमवार दोपहर 2.43 बजे श्रीहरिकोटा (आंध्रप्रदेश) के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से लॉन्च हुआ. यह सैटेलाइट करीब 48 दिन में चंद्रमा पर पहुंचेगा. दिलचस्प बात यह है कि चंद्रयान-2 (Chandrayaan2 ) चांद के दक्षिणी ध्रुव पर उतरेगा. अब इसे चांद तक पहुंचने में 48 दिनों का वक्त लगेगा. चंद्रयान के एक हिस्से में सोना (Gold) मढ़ा गया है. इसके इस्तेमाल की ये है वैज्ञानिक वजह ..

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अंतरिक्ष में भेजे जाने वाले सैटेलाइट को बनाने में सोने (Gold) का अहम खास रोल होता है. सोने के कुछ विशिष्‍ट गुणों के कारण एयरोस्पेस उद्योग में इसका विशेष प्रयोग किया जाता है. दरअसल यह सैटेलाइट की परिवर्तनशीलता, चालकता (कंडक्टिविटी) और जंग के प्रतिरोध को रोकता है. वहीं यह सैटेलाइट में अंतरिक्ष की हानिकारक इनफ्रारेड रेडिएशन को रोकने में मदद करता है. ये रेडिएशन इतना खतरनाक होता है कि वो अंतरिक्ष में सैटेलाइट को बहुत जल्द नष्ट करने की क्षमता रखता है.

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अपोलो लूनर मॉड्यूल में भी नासा ने सैटेलाइट बनाने में सोने का इस्तेमाल किया था. नासा के इंजीनियरों के अनुसार, गोल्ड प्लेट की एक पतली परत ( गोल्ड प्लेटिंग) का उपयोग एक थर्मल ब्लैंकेट की शीर्ष परत के रूप में किया गया था जो मॉड्यूल के निचले हिस्से को कवर कर रहा था. ये ब्लैंकेट अविश्वसनीय रूप से 25 परतों में जटिलता से तैयार किया गया. इन परतों में कांच, ऊन, केप्टन, मायलर और एल्यूमीनियम जैसी धातु भी शामिल की गई. ये गोल्ड दरअसल अलग ही नाम से जाना जाता है.