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बुजुर्गों में कोविड के जोखिम को कम कर सकता है 100 साल पुराना टीबी का टीका : आईसीएमआर

बुजुर्गों में कोविड के जोखिम को कम कर सकता है 100 साल पुराना टीबी का टीका : आईसीएमआर

IANS | Edited By : IANS | Updated on: 09 Aug 2021, 10:40:01 PM
100-yr-old TB

(source : IANS) (Photo Credit: (source : IANS))

नई दिल्ली:   भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के एक अध्ययन के अनुसार, पिछले 100 वर्षों से तपेदिक के इलाज के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक टीका वृद्ध वयस्कों में कोविड-19 संक्रमण के जोखिम को रोकने में मदद कर सकता है।

बैसिलस कैलमेट-गुएरिन (बीसीजी) को दुनिया में सबसे व्यापक रूप से इस्तेमाल किए जाने वाले टीकों में से एक माना जाता है और हर साल लगभग 13 करोड़ शिशुओं को यह टीका मिलता है। अब बुजुर्ग आबादी के बीच बीसीजी टीकाकरण में रुचि बढ़ी है, विशेष रूप से उन देशों में, जहां रिपोर्ट किए गए कोविड-19 मामलों की संख्या अधिक है।

पिछले अध्ययनों ने बताया है कि बीसीजी टीकाकरण श्वसन पथ के संक्रमण से सुरक्षा प्रदान कर सकता है, जिसमें वायरल संक्रमण शामिल है।

साइंस एडवांसेज जर्नल में प्रकाशित नया अध्ययन बताता है कि बीसीजी संभावित रूप से रक्त में प्रतिरक्षा कोशिकाओं द्वारा सूजन के बायोमार्कर को रोकने के लिए कार्य कर सकता है।

आईसीएमआर-नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च इन ट्यूबरकुलोसिस और आईसीएमआर-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एपिडेमियोलॉजी के शोधकर्ताओं की एक टीम ने कहा, हालांकि, यह साबित होना बाकी है। इसके अलावा, यह अभी भी अज्ञात है कि यह निरोधात्मक प्रभाव कितने समय तक बना रह सकता है।

इसके अलावा, अध्ययन में यह भी बताया गया है कि हाल ही में बीसीजी टीकाकरण हाइपरइन्फ्लेमेशन से जुड़ा नहीं है, लेकिन बदले में, डाउन-मॉड्यूलेटेड बेसल इंफ्लेमेटरी स्थिति से जुड़ा है, जो बुजुर्ग आबादी में सूजन संबंधी बीमारियों के खिलाफ सुरक्षात्मक भूमिका निभा सकता है।

शोध से जुड़े विशेषज्ञों ने कहा कि इसके अलावा, यह बहुत संभव है कि रोगजनक-विशिष्ट प्रतिरक्षा प्रतिक्रियाएं बीसीजी टीकाकरण से प्रभावित न हों या इसके विपरीत, वास्तव में बढ़ी हों।

शोध से जुड़े विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि निष्कर्ष में वर्तमान अध्ययन इस बात पर जोर देता है कि बीसीजी टीकाकरण का प्रभाव सुरक्षित है और इससे बुजुर्ग व्यक्तियों में सूजन नहीं बढ़ती है। इस अध्ययन के परिणाम न केवल बीसीजी टीकाकरण के इम्यूनोमॉड्यूलेटरी गुणों की पुष्टि करते हैं, बल्कि प्रणालीगत सूजन पर बीसीजी टीकाकरण के (गैर) विशिष्ट इम्युनोजेनेसिटी के स्पष्ट प्रभाव को भी प्रकट करते हैं।

टीम ने कहा कि परिणामों की आगे की समझ टीके की प्रभावकारिता का समर्थन कर सकती है और बीसीजी टीकाकरण के नवीन अनुप्रयोगों का पता लगा सकती है।

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

First Published : 09 Aug 2021, 10:40:01 PM

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