Artemis II Mission: फिर टला नासा का आर्टेमिस II मिशन, 6 मार्च को होनी थी लॉन्चिंग; जानें क्या आई खराबी

Artemis II Mission: नासा का आर्टेमिस II मिशन की लॉन्चिंग को एक बार फिर से टाल दिया गया. इस मिशन को 6 मार्च को लॉन्च किया जाना था, लेकिन रॉकेट की जांच में मिली एक तकनीकी खराबी के बाद मिशन की लॉन्चिंग टालने का फैसला लिया गया है.

Artemis II Mission: नासा का आर्टेमिस II मिशन की लॉन्चिंग को एक बार फिर से टाल दिया गया. इस मिशन को 6 मार्च को लॉन्च किया जाना था, लेकिन रॉकेट की जांच में मिली एक तकनीकी खराबी के बाद मिशन की लॉन्चिंग टालने का फैसला लिया गया है.

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Suhel Khan
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NASA Artemis II Mission

फिर टला नासा का आर्टेमिस II मिशन Photograph: (X@disclosetv)

Artemis II Mission: अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का आर्टेमिस II मिशन एक बार फिर से टल गया. इस मिशन के तहत नासा एक  बार फिर से इंसान को चंद्रमा के चारों ओर भेजने की तैयारी कर रहा है. इस मिशन के तहत नासा अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा के पास भेजेगा और उन्हें सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर भी वापस लेकर आएगा. बता दें कि 50 से अधिक वर्षों में यह पहली बार होगा जब मनुष्य अंतरिक्ष में इतनी दूर की यात्रा करेगा.

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यह मिशन नासा के आर्टेमिस कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य मनुष्यों को चंद्रमा पर वापस भेजना है साथ ही वहां लंबे समय तक इंसान की उपस्थिति स्थापित करना है. इस मिशन के तहत नासा चार अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा के सुदूर भाग के चारों ओर 10 दिनों की यात्रा पर भेजने की तैयारी कर रहा है. हालांकि ये मिशन चंद्रमा पर लैंड नहीं करेगा, लेकिन यह भविष्य में चंद्रमा पर उतरने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा.

6 मार्च 2026 को होनी थी मिशन की लॉन्चिंग

बता दें कि इस मिशन की लॉन्चिंग के लिए नासा ने 6 मार्च 2026 की तारीख तय की थी, लेकिन, अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी ने अब कहा है कि यह तिथि अब विचाराधीन नहीं है. यानी मिशन इस तारीख को लॉन्च नहीं किया जाएगा. नासा के प्रशासक जेरेड आइजैकमान ने कहा कि, मिशन की अंतिम जांच के दौरान इंजीनियरों को एक तकनीकी समस्या मिली. इस वजह से रॉकेट के सुरक्षित रूप से उड़ान भरने से पहले उस पर और काम करने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि वह इस बात को समझते हैं कि मिशन में हुई देरी से कई लोग निराश होंगे.

जानें क्यों हुई मिशन में देरी?

जानकारी के मुताबिक, रॉकेज के परीक्षण के दौरान पाया गया कि उसमें हीलियम के प्रवाह में रुकावट हो रही है. बता दें कि रॉकेट लॉन्चिंग में हीलियम की महत्वपूर्ण भूमिका होती है. यह ईंधन टैंकों को दबाव में रखने और रॉकेट प्रणाली के कुछ हिस्सों को ठंडा रखने में मदद करती है. नासा हीलियम से जुड़ी किसी भी समस्या को गंभीर मानता है. हालांकि पहले की जांच में कोई खराबी नहीं पाई गई थी, लेकिन अब इंजीनियरों ने दोबारा से की गई जांच के दौरान इस समस्या को भांप लिया.

उसके बाद नासा ने मिशन की लॉन्चिंग रोककर कोई जोखिम नहीं लेने का फैसला किया. बता दें कि मिशन के टालने की घोषणा करने से एक दिन पहले नासा ने कैनेडी अंतरिक्ष केंद्र में एक पूर्ण "वेट रिहर्सल" परीक्षण किया गया था. बता दें कि इस परीक्षण के दौरान, प्रक्षेपण की स्थितियों को जाने के लिए रॉकेट में करीब 730,000 गैलन ईंधन भरा गया था. टीम का मानना ​​था कि रिहर्सल सफल रहा. फिल्टर और सील संबंधी समस्याओं के कारण हाइड्रोजन रिसाव समेत पिछली समस्याओं को ठीक करने के बाद यह उनकी दूसरी कोशिश थी.

इन अंतरिक्ष यात्रियों को चांद के पास भेजेगा नासा

आर्टेमिस II मिशन के तहत नासा जिन अंतरिक्ष यात्रियों को चांद के पास भेज रहा है उनमें तीन अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं. जिनमें रीड वाइजमैन, विक्टर ग्लोवर और क्रिस्टीना कोच का नाम शामिल है. जबकि एक कनाडाई अंतरिक्ष यात्री जेरेमी हैनसेन को भी इस मिशन के तहत चांद के पास भेजा जाएगा. सभी अंतरिक्ष यात्री नासा के शक्तिशाली स्पेस लॉन्च सिस्टम रॉकेट द्वारा लॉन्च किए गए ओरियन अंतरिक्ष यान में यात्रा करेंगे.
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