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फिर टला नासा का आर्टेमिस II मिशन Photograph: (X@disclosetv)
Artemis II Mission: अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का आर्टेमिस II मिशन एक बार फिर से टल गया. इस मिशन के तहत नासा एक बार फिर से इंसान को चंद्रमा के चारों ओर भेजने की तैयारी कर रहा है. इस मिशन के तहत नासा अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा के पास भेजेगा और उन्हें सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर भी वापस लेकर आएगा. बता दें कि 50 से अधिक वर्षों में यह पहली बार होगा जब मनुष्य अंतरिक्ष में इतनी दूर की यात्रा करेगा.
यह मिशन नासा के आर्टेमिस कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य मनुष्यों को चंद्रमा पर वापस भेजना है साथ ही वहां लंबे समय तक इंसान की उपस्थिति स्थापित करना है. इस मिशन के तहत नासा चार अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा के सुदूर भाग के चारों ओर 10 दिनों की यात्रा पर भेजने की तैयारी कर रहा है. हालांकि ये मिशन चंद्रमा पर लैंड नहीं करेगा, लेकिन यह भविष्य में चंद्रमा पर उतरने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा.
6 मार्च 2026 को होनी थी मिशन की लॉन्चिंग
बता दें कि इस मिशन की लॉन्चिंग के लिए नासा ने 6 मार्च 2026 की तारीख तय की थी, लेकिन, अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी ने अब कहा है कि यह तिथि अब विचाराधीन नहीं है. यानी मिशन इस तारीख को लॉन्च नहीं किया जाएगा. नासा के प्रशासक जेरेड आइजैकमान ने कहा कि, मिशन की अंतिम जांच के दौरान इंजीनियरों को एक तकनीकी समस्या मिली. इस वजह से रॉकेट के सुरक्षित रूप से उड़ान भरने से पहले उस पर और काम करने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि वह इस बात को समझते हैं कि मिशन में हुई देरी से कई लोग निराश होंगे.
As an update to my earlier post.
— NASA Administrator Jared Isaacman (@NASAAdmin) February 21, 2026
- The ICPS helium bottles are used to purge the engines, as well as for LH2 and LOX tank pressurization. The systems did work correctly during WDR1 and WDR2.
- Last evening, the team was unable to get helium flow through the vehicle. This… https://t.co/Qte3nEXwQb
जानें क्यों हुई मिशन में देरी?
जानकारी के मुताबिक, रॉकेज के परीक्षण के दौरान पाया गया कि उसमें हीलियम के प्रवाह में रुकावट हो रही है. बता दें कि रॉकेट लॉन्चिंग में हीलियम की महत्वपूर्ण भूमिका होती है. यह ईंधन टैंकों को दबाव में रखने और रॉकेट प्रणाली के कुछ हिस्सों को ठंडा रखने में मदद करती है. नासा हीलियम से जुड़ी किसी भी समस्या को गंभीर मानता है. हालांकि पहले की जांच में कोई खराबी नहीं पाई गई थी, लेकिन अब इंजीनियरों ने दोबारा से की गई जांच के दौरान इस समस्या को भांप लिया.
उसके बाद नासा ने मिशन की लॉन्चिंग रोककर कोई जोखिम नहीं लेने का फैसला किया. बता दें कि मिशन के टालने की घोषणा करने से एक दिन पहले नासा ने कैनेडी अंतरिक्ष केंद्र में एक पूर्ण "वेट रिहर्सल" परीक्षण किया गया था. बता दें कि इस परीक्षण के दौरान, प्रक्षेपण की स्थितियों को जाने के लिए रॉकेट में करीब 730,000 गैलन ईंधन भरा गया था. टीम का मानना ​​था कि रिहर्सल सफल रहा. फिल्टर और सील संबंधी समस्याओं के कारण हाइड्रोजन रिसाव समेत पिछली समस्याओं को ठीक करने के बाद यह उनकी दूसरी कोशिश थी.
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