उज्जैन के महाकाल मंदिर में आज दोपहर को होगी अनोखी भस्म आरती, साल में सिर्फ एक ही दिन मिलता है यह अवसर

Mahakal Bhasm Aarti: महाशिवरात्रि पर महाकाल मंदिर में चार प्रहर पूजन और अभिषेक के बाद आज दोपहर 12 बजे साल में एक बार होने वाली भस्म आरती होगी. पूरी रात रुद्राक्ष पाठ और पंचामृत अभिषेक के बाद भगवान महाकाल को सेहरा अर्पित किया गया.

Mahakal Bhasm Aarti: महाशिवरात्रि पर महाकाल मंदिर में चार प्रहर पूजन और अभिषेक के बाद आज दोपहर 12 बजे साल में एक बार होने वाली भस्म आरती होगी. पूरी रात रुद्राक्ष पाठ और पंचामृत अभिषेक के बाद भगवान महाकाल को सेहरा अर्पित किया गया.

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Akansha Thakur
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Ujjain Mahakaleshwar Temple

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Mahakal Bhasm Aarti: उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में इन दिनों महाशिवरात्रि पर्व की भव्यता देखने लायक है. बीते 10 दिनों से मंदिर में विशेष आयोजन चल रहे हैं. बाबा महाकाल के दर्शन पिछले 44 घंटों से लगातार जारी हैं. अब तक लाखों श्रद्धालु बाबा के दर्शन कर चुके हैं. लेकिन आज सुबह महाकालेश्वर मंदिर में बाबा महाकाल की भस्म आरती नहीं की गई. भस्म आरती होगी, मगर दोपहर 12 बजे.

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दोपहर 12 बजे होगा भस्म आरती 

सोमवार को मंदिर में सुबह होने वाली भस्म आरती नहीं की गई. आज एक विशेष परंपरा के तहत भस्म आरती दोपहर 12 बजे होगी. यह संयोग साल में केवल एक ही दिन बनता है, जो महाशिवरात्रि के अगले दिन आता है.

दूल्हा बने बाबा महाकाल

आज बाबा महाकाल को दूल्हा स्वरूप में सजाया गया. उन्हें 11 फीट ऊंचे पुष्प सेहरे से श्रृंगारित किया गया. मंदिर में चार प्रहर की पूजा संपन्न हुई. इसके बाद बाबा का महाभिषेक किया गया.

पूजन के दौरान बाबा को सप्तधान्य अर्पित किए गए. इनमें चावल, गेहूं, मूंग, उड़द, तिल और मसूर शामिल हैं. सेहरे में फूलों के साथ सोने-चांदी के आभूषण भी लगाए गए. मान्यता है कि इस पूजन से घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है. दर्शन के बाद सेहरे की सामग्री श्रद्धालुओं में वितरित भी की जाती है.

साल में सिर्फ एक बार क्यों होती है भस्म आरती? 

महाकालेश्वर ज्योर्तिर्लिंग पर साल में सिर्फ एक बार दोपहर 12 बजे शिव नवरात्रि के आखिर में खास भस्म आरती होती है. इस दिन बाबा महाकाल का दूध दही, घी, शहद और गंगाजल से अभिषेक किया जाता है और उन्हें खास श्रृंगार से सजाया जाता है. मान्यता है कि इस दोपहर की भस्म आरती में शामिल होने से भक्तों को साल भर के दर्शन का फायदा मिलता है. महाकाल की इस अनोखी परंपरा को आस्था, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनोखा संगम माना जाता है. महाशिवरात्रि उत्सव बुधवार, 18 फरवरी को पंचमुखारविंदा (पांच रूपों का एक साथ) के दर्शन के साथ समाप्त होगा, जो साल में एक बार होता है.

श्रद्धालु बोले-ऐसे दर्शन पहले कभी नहीं किए

सेहरा स्वरूप में बाबा महाकाल के दर्शन कर श्रद्धालु भावुक हो उठे. भक्तों का कहना है कि साल में सिर्फ एक बार होने वाला यह श्रृंगार अद्भुत अनुभूति देता है. मंदिर परिसर में “जय श्री महाकाल” के जयकारे गूंजते रहे.

भस्म आरती के लिए विशेष व्यवस्था

दोपहर 12 बजे होने वाली भस्म आरती में भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचेंगे. नंदी हॉल, कार्तिक मंडपम और गणेश मंडपम में सीमित स्थान होने के कारण बैठकर दर्शन की अनुमति नहीं होगी. हालांकि, चलायमान दर्शन व्यवस्था जारी रहेगी ताकि सभी भक्त बाबा के दर्शन कर सकें.

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