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Pradosh Vrat 2026
Pradosh Vrat Puja Vidhi: हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत को अत्यंत शुभ माना गया है. यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा पाने के लिए रखा जाता है. पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह का अंतिम प्रदोष व्रत 1 मार्च 2026 को पड़ रहा है. मान्यता है कि इस दिन विधिपूर्वक पूजा करने से पापों का नाश होता है. जीवन की बाधाएं दूर होती हैं. सुख, शांति और समृद्धि का वरदान मिलता है. प्रदोष व्रत हर महीने शुक्ल और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को आता है. प्रदोष का अर्थ है सूर्यास्त के बाद का समय. यही काल शिव पूजा के लिए सबसे शुभ माना जाता है. चलिए जानते हैं भगवान शिव की पूजा करने का तरीका.
प्रदोष व्रत की शाम ऐसे करें भगवान शिव की पूजा
स्नान और शुद्धि
प्रदोष व्रत के दिन सुबह व्रत का संकल्प लें. शाम को प्रदोष काल से पहले स्नान करें. स्वच्छ वस्त्र पहनें. पूजा स्थान को गंगाजल से शुद्ध करें.
शिवलिंग का अभिषेक
घर में शिवलिंग हो तो जल से अभिषेक करें. दूध, दही, शहद और गंगाजल भी अर्पित करें. अभिषेक के समय “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें. संभव हो तो मंदिर जाकर भी अभिषेक करें.
बेलपत्र और पुष्प अर्पण
भगवान शिव को बेलपत्र प्रिय है. तीन पत्तों वाला बेलपत्र चढ़ाएं. धतूरा, आक का फूल और सफेद पुष्प अर्पित करें.
दीप-धूप और पाठ
ज्योतिष के अनुसार, आज प्रदोष व्रत के दिन शिवलिंग के सामने घी का दीपक जलाएं. धूप और अगरबत्ती अर्पित करें. शिव चालीसा या रुद्राष्टक का पाठ करें.
प्रदोष व्रत कथा
पूजा के बाद प्रदोष व्रत कथा अवश्य पढ़ें या सुनें. कथा के बिना व्रत अधूरा माना जाता है.
आरती और प्रार्थना
अंत में भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करें. अपनी भूलों के लिए क्षमा मांगें. परिवार की सुख-शांति की कामना करें.
प्रदोष व्रत पूजा का शुभ समय
प्रदोष काल सूर्यास्त से लगभग 45 मिनट पहले से 45 मिनट बाद तक रहता है. इसी समय पूजा करना सबसे उत्तम माना जाता है.
प्रदोष व्रत करने से मिलने वाले लाभ
- वैवाहिक जीवन में मधुरता आती है
- संतान सुख की प्राप्ति होती है
- कर्ज और आर्थिक संकट कम होते हैं
- मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं
- ग्रह दोषों से राहत मिलती है
प्रदोष व्रत में इन बातों का रखें ध्यान
- दिनभर सात्विक भोजन करें
- क्रोध और नकारात्मक सोच से दूर रहें
- शिवलिंग पर तुलसी न चढ़ाएं
- पूजा के समय मन शांत रखें
प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व
शास्त्रों के अनुसार, प्रदोष काल में भगवान शिव कैलाश पर्वत पर नृत्य करते हैं. इस समय सभी देवता उनकी आराधना करते हैं. मान्यता है कि इस शुभ काल में की गई पूजा से रोग, कर्ज, दोष और शत्रु बाधाएं दूर होती हैं. सच्चे मन से की गई प्रार्थना शीघ्र फल देती है.
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