Pongal 2026: आज से शुरू हुआ 4 दिन तक चलने वाला पोंगल पर्व, जानें रीति-रिवाज और धार्मिक महत्व

Pongal 2026: पोंगल चार दिनों तक चलने वाला त्योहार है. इसकी शुरुआत आज से शुरू हो रही है. इसमें सूर्य देव, इंद्र देव और पशुओं की पूजा होती है. जानें इस पर्व की परंपरा और महत्व.

Pongal 2026: पोंगल चार दिनों तक चलने वाला त्योहार है. इसकी शुरुआत आज से शुरू हो रही है. इसमें सूर्य देव, इंद्र देव और पशुओं की पूजा होती है. जानें इस पर्व की परंपरा और महत्व.

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Akansha Thakur
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Pongal 2026

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Pongal 2026: पोंगल पर्व का शुभारंभ आज से हो गया है. यह पर्व तमिल समुदाय का प्रमुख फसल पर्व होता है, जिसे चार दिनों तक हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है. पोंगल तमिलनाडु सहित दक्षिण भारत के कई राज्यों में मनाया जाता है. हालांकि, अब इस त्योहार की रौनक देश-विदेश में भी देखने को मिलती है. यहां बसे तमिल परिवार इस त्योहार को उत्साह के साथ मनाते हैं. यह पर्व सूर्य देव, प्रकृति और किसानों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का प्रतीक होता है.

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क्या हैं पोंगल शब्द का मतलब?

पोंगल शब्द का अर्थ है 'नई शुरुआत करने का समय'. इस दिन लोग नए धान, दूध और गुड़ से खीर को पकाते हैं, जिसे पोंगल कहा जाता है. मान्यता है कि जैसे दूध उफनता है, वैसे ही जीवन में सुख-समृद्धि और खुशहाली भी उफान के साथ आए.

4 दिन तक मनाया जाता है पोंगल पर्व

पोंगल का उत्सव चार अलग-अलग दिनों में मनाया जाता है-

पहला दिन

पहले दिन भोगी पोंगल होता है, जो आज है. इस दिन पुराने और अनुपयोगी सामान को त्यागकर नए जीवन की शुरुआत का संकल्प लिया जाता है. लोग घरों की साफ-सफाई करते हैं और भोगी की अग्नि जलाते हैं.

दूसरा दिन

सूर्य पोंगल का दिन पोंगल पर्व का प्रमुख दिन होता है. इस दिन सूर्य देव की पूजा की जाती है. मिट्टी के नए बर्तन में दूध, चावल और गुड़ से पोंगल पकाया जाता है. लोग एक-दूसरे को 'पोंगल-ओ-पोंगल' कहकर शुभकामनाएं देते हैं.

तीसरा दिन

पोंगल के दिन मट्टू पोंगल होता है. इस दिन पशुओं, विशेष रूप से गाय और बैलों की पूजा की जाती है. किसानों के जीवन में पशुओं की भूमिका को सम्मान देने का यह दिन खास महत्व रखता है.

चौथा दिन

पोंगल का अंतिम दिन कन्नुम पोंगल का होता है. इस दिन लोग अपने परिवार और मित्रों के साथ घूमने-फिरने और मेल-मिलाप के लिए जाते हैं. कई स्थानों पर लोक नृत्य और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं. इस दिन लोग नए कपड़े भी पहनते हैं.

पोंगल का महत्व

पोंगल पर्व केवल एक त्योहार नहीं है बल्कि प्रकृति, सूर्य और अन्नदाता किसानों के प्रति आभार प्रकट करने वाला पर्व है. यह नई फसल के आगमन की खुशी का प्रतीक है और सकारात्मक ऊर्जा, समृद्धि तथा आपसी सौहार्द को बढ़ावा देता है. इस दिन महिलाएं अपने भाइयों की रक्षा की भी कामना करती हैं और लोग एक-दूसरे के घर पर मिठाई बांटते हैं. पोंगल के अवसर पर तमिल समुदाय के लोग पारंपरिक परिधान पहनते हैं, घर में रंगोली बनाते हैं और पारंपरिक व्यंजनों का आनंद लेते हैं.

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