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Wolf Moon Paush Purnima 2026
Supermoon 2026: आज भारत सहित दुनिया भर में आकाश में एक खास नजारा देखने को मिलेगा. 3 जनवरी की रात को चांद का आकार आम दिनों की तुलना में बड़ा होगा. इसकी रोशनी भी अलग ही नजर आएगी. आम लोग भी इस वुल्फ सुपरमून को देख सकते हैं.
क्या होता है वुल्फ सुपरमून?
खगोल शास्त्र के अनुसार, चंद्रमा की कक्षा अंडाकार होती है, इसलिए धरती से उसकी दूरी घटती-बढ़ती रहती है. पूर्णिमा को चंद्रमा धरती से करीब 3 लाख 56 हजार 500 किलोमीटर दूर होता है, यानि के पृथ्वी के बहुत पास होता है. इसे ही सुपरमून कहा जाता है. जनवरी की पूर्णिमा को पड़ने वाले सुपरमून को वुल्फ सुपरमून कहा जाता है. मान्यता है कि जनवरी की कड़ाके की सर्दी में भेड़ियों की तेज आवाज सुनाई देती है. इसी वजह से इसे भेड़ियों से जोड़कर वुल्फ सुपरमून का नाम दिया गया है. इस समय पृथ्वी, सूर्य के भी पास होती है. इसलिए समुद्री इलाकों में ज्वार-भाटे की संभावना बनी रहती है.
भारत में वुल्फ सुपरमून दिखने का समय
आज भारत में शाम 5 बजकर 45 मिनट से सुपरमून को देखा जा सकता है. इस समय पर चंद्रमा पश्चिम दिशा में उदय होगा. आज रात को 10 बजकर 45 मिनट के आसपास इसकी रोशनी भी अलग ही दिखायी देगी. आज चंद्रमा का आकार 14 फीसदी बड़ा होगा साथ ही इसकी रोशनी 30 फीसदी अधिक होगी. आज पूरी रात आप वुल्फ सुपरमून के नजारे को देख सकते हैं. वुल्फ सुपरमून के समय चंद्रमा की रोशनी हल्की पीली या नारंगी रंग की दिखायी देगी.
कैसे देखें वुल्फ सुपरमून?
इस खगोलीय घटना को सामान्य नंगी आंखों से आसानी से देखा जा सकता है. इसे देखने के लिए किसी खास उपकरण की जरुरत नहीं है. आप कैमरा, दूरबीन या टेलीस्कोप की मदद से इसकी फोटो भी खींच सकते हैं.
इस साल कितने सुपरमून होंगे
खगोलशास्त्र के मुताबिक, साल 2026 में कुल तीन सुपरमून की घटना नजर आएगी. आज साल 2026 का पहला वुल्फ सुपरमून होगा. पौष पूर्णिमा पर ये नजारा देखने को मिलेगा. इसके बाद 24 नवंबर 2026 और 24 दिसंबर को भी सुपरमून देखने को मिलेगा.
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