/newsnation/media/media_files/2026/03/08/papmochani-ekadashi-2026-2026-03-08-16-42-35.jpg)
Papmochani Ekadashi 2026 (AI Image)
Papmochani Ekadashi 2026: सनातन धर्म में एकादशी व्रत का बहुत बड़ा महत्व माना जाता है. हर महीने दो एकादशी आती हैं. एक कृष्ण पक्ष में और दूसरी शुक्ल पक्ष में पड़ती है. इन दोनों एकादशी के नाम, कथा और फल अलग-अलग होते हैं. चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को पापमोचिनी एकादशी कहा जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन व्रत रखने और पूजा करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिलती है. इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष पूजा करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि प्राप्त होती है.
कब है पापमोचिनी एकादशी?
हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 14 मार्च को सुबह 8 बजकर 15 मिनट से शुरू होगी. यह तिथि 15 मार्च को सुबह 9 बजकर 16 मिनट तक रहेगी. उदयातिथि के आधार पर 15 मार्च 2026 को पापमोचिनी एकादशी का व्रत रखा जाएगा. इस दिन स्मार्त और वैष्णव दोनों संप्रदाय के श्रद्धालु व्रत रख सकते हैं. इस तिथि को व्रत और पूजा करना शुभ माना जाता है.
व्रत पारण का शुभ समय
एकादशी व्रत का पूरा फल पाने के लिए द्वादशी तिथि में व्रत खोलना जरूरी होता है. इसे पारण कहा जाता है. इस साल पापमोचिनी एकादशी का पारण 16 मार्च को किया जाएगा. पारण का शुभ समय सुबह 6 बजकर 30 मिनट से 8 बजकर 54 मिनट तक रहेगा. इस अवधि में व्रत खोलने से व्रत का पूर्ण फल मिलने की मान्यता है.
पापमोचिनी एकादशी के शुभ मुहूर्त
धार्मिक परंपराओं के अनुसार पूजा के लिए कुछ विशेष मुहूर्त भी बताए गए हैं. इन समयों में पूजा करने से अधिक शुभ फल मिलता है.
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:55 से 5:43 तक
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:06 से 12:54 तक
विजय मुहूर्त: दोपहर 2:30 से 3:18 तक
गोधूलि मुहूर्त: शाम 6:27 से 6:51 तक
इन शुभ समयों में भगवान विष्णु की पूजा करने से जीवन में सुख और शांति आने की मान्यता है.
पापमोचिनी एकादशी की पूजा विधि (Papmochani Ekadashi 2026 Puja Vidhi)
इस व्रत की पूजा विधि सरल मानी जाती है. श्रद्धालु निम्न तरीके से पूजा कर सकते हैं. सबसे पहले व्रत वाले दिन सूर्योदय से पहले स्नान करें और व्रत का संकल्प लें. इसके बाद घर के पूजा स्थान में उत्तर-पूर्व दिशा में एक चौकी रखें. चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं. उस पर लक्ष्मी-नारायण की प्रतिमा स्थापित करें. यदि घर में शालिग्राम शिला हो तो उसे भी चौकी पर रखा जा सकता है. इसके बाद गंगाजल और पंचामृत से अभिषेक करें.
भगवान को चंदन, पुष्प और तुलसी पत्र अर्पित करें. फल और दूध से बने व्यंजन का भोग लगाएं. फिर श्रद्धा भाव से आरती करें. आरती के बाद आसन पर बैठकर “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें. इसके साथ विष्णु सहस्त्रनाम या विष्णु चालीसा का पाठ करना भी शुभ माना जाता है. पूजा के अंत में अपनी सामर्थ्य के अनुसार गरीबों और ब्राह्मणों को दान देना चाहिए. कई श्रद्धालु इस दिन रात्रि जागरण भी करते हैं.
पापमोचिनी एकादशी का महत्व
शास्त्रों में इस एकादशी का महत्व बहुत विशेष बताया गया है. मान्यता है कि इस दिन व्रत और पूजा करने से व्यक्ति के जाने-अनजाने में किए गए पापों का नाश होता है. यह व्रत आध्यात्मिक शुद्धि का भी प्रतीक माना जाता है. ऐसा भी कहा जाता है कि यदि इस व्रत का पुण्य पितरों को समर्पित किया जाए तो उन्हें भी मोक्ष की प्राप्ति हो सकती है. भक्तों का भरोसा है कि इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से जीवन के कष्ट दूर हो जाते हैं और अंत में मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है.
यह भी पढ़ें: Chaitra Navratri 2026: खरमास में शुरू हो रही चैत्र नवरात्रि, क्या इस दौरान कर सकते हैं मांगलिक काम? जानिए नियम
/newsnation/media/agency_attachments/logo-webp.webp)
Follow Us