Lohri 2026 Katha: इस कथा के बिना अधूरी मानी जाती है लोहड़ी की पूजा, जीवन में बना रहता है खुशहाल

Lohri 2026 Katha: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, लोहड़ी जलाने से बुरी शक्तियों का नाश होता है. साथ ही जीवन खुशहाल बना रहता है. लोहड़ी मनाने वालों को लोहड़ी की कथा सुनना बहुत जरूरी माना जाता है.

Lohri 2026 Katha: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, लोहड़ी जलाने से बुरी शक्तियों का नाश होता है. साथ ही जीवन खुशहाल बना रहता है. लोहड़ी मनाने वालों को लोहड़ी की कथा सुनना बहुत जरूरी माना जाता है.

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Akansha Thakur
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Lohri 2026 Katha

Lohri 2026 Katha

Lohri 2026 Katha: लोहड़ी का पर्व हर वर्ष माघ माह में पूरे उत्साह के साथ मनाया जाता है. यह पर्व विशेष रूप से पंजाब और हरियाणा में सिख समुदाय का प्रमुख त्योहार माना जाता है. इसके साथ ही उत्तर भारत के कई अन्य राज्यों में भी लोग इसे बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं. लोहड़ी के दिन लोग खुले स्थान पर अग्नि जलाते हैं और उसकी परिक्रमा करते हैं. इस दिन लोहड़ी की कथा सुनना अत्यंत आवश्यक माना गया है. मान्यता है कि कथा के बिना लोहड़ी की पूजा अधूरी रहती है.

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कृषि और किसान से जुड़ा है लोहड़ी का पर्व

लोहड़ी मुख्य रूप से कृषि आधारित पर्व है. इस दिन किसान अपनी रबी की फसल की कटाई की खुशी मनाते हैं. नई फसल का अंश लोहड़ी की अग्नि में अर्पित किया जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, लोहड़ी की आग नकारात्मक शक्तियों को दूर करती है. इससे जीवन में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है.

लोहड़ी की पौराणिक कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, द्वापर युग में मकर संक्रांति की तैयारियों के समय कंस ने श्रीकृष्ण को मारने के लिए एक राक्षस भेजा था. उस राक्षस का नाम लोहिता बताया जाता है. भगवान श्रीकृष्ण ने सहज रूप से उसका वध कर दिया. ऐसा माना जाता है कि लोहिता के वध की स्मृति में इस पर्व को लोहड़ी कहा जाने लगा और तभी से यह उत्सव मनाया जाता है. एक अन्य धार्मिक कथा के अनुसार, लोहड़ी की अग्नि माता पार्वती के योगाग्नि दहन की स्मृति से जुड़ी है. कहा जाता है कि इसी कारण इस दिन अग्नि प्रज्वलित कर कथा सुनने का विशेष महत्व माना गया है.

दुल्ला भट्टी की लोककथा

लोहड़ी से जुड़ी सबसे प्रसिद्ध लोककथा दुल्ला भट्टी की है. माना जाता है कि दुल्ला भट्टी का जन्म सन् 1547 में पंजाब में हुआ था. वे गरीबों के रक्षक और अन्याय के विरोधी माने जाते थे. कथा के अनुसार, सुंदर दास नामक किसान की दो बेटियां थीं सुंदरी और मुंदरी. इलाके का नंबरदार उनसे जबरन विवाह करना चाहता था. किसान ने अपनी पीड़ा दुल्ला भट्टी को सुनाई.

लोहड़ी के दिन दुल्ला भट्टी ने नंबरदार के खेतों में आग लगाई और सुंदरी-मुंदरी का भाई बनकर उनका विवाह योग्य वरों से करवाया. इसी घटना की याद में आज भी लोहड़ी की अग्नि जलाई जाती है. कहा जाता है कि बाद में मुगल शासक अकबर के आदेश पर दुल्ला भट्टी को फांसी दे दी गई थी, लेकिन वे आज भी लोकनायक के रूप में याद किए जाते हैं.

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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