Hanuman Temple: एक ऐसा अनोखा मंदिर, जहां पत्नी संग विराजमान हैं हनुमान जी, जानें क्यों करना पड़ा उनको विवाह?

Hanuman Temple: देशभर में हनुमान जी के कई प्राचीन और रहस्यमयी मंदिर है जहां अकेले ही उनका पूजन किया जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि देश में एक ऐसा मंदिर हैं, जहां हनुमान जी अपनी पत्नी के साथ विराजमान हैं.

Hanuman Temple: देशभर में हनुमान जी के कई प्राचीन और रहस्यमयी मंदिर है जहां अकेले ही उनका पूजन किया जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि देश में एक ऐसा मंदिर हैं, जहां हनुमान जी अपनी पत्नी के साथ विराजमान हैं.

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Akansha Thakur
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Hanuman Ji Marriage Story:  आपने ऐसे कई अनोखे मंदिर देखें होंगे जहां की परंपरा अलग और अनोखी होती है. फिर चाहे वो हनुमान जी का मंदिर हो या फिर कोई और. देशभर में हनुमान जी के कई प्राचीन और चमत्कारी मंदिर है. शास्त्रों में उन्हें बाल ब्राह्माचारी बताया गया है. इसलिए आमतौर पर मंदिरों में उनका पूजन अकेले ही किया जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक देश ऐसा भी है जहां हनुमान जी की पूजा उनकी पत्नी के साथ किया जाता है. अगर नहीं तो चलिए हम आपको बताते हैं इस मंदिर के पीछे का किस्सा. 

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हनुमान जी का अनोखा मंदिर 

तेलंगाना के खम्मम जिले के एलंदु गांव में स्थित है श्री सुवर्चला सहिता हनुमान मंदिर. यह भारत का एकमात्र मंदिर माना जाता है, जहां हनुमान जी की पूजा उनकी पत्नी सुवर्चला देवी के साथ होती है. इस मंदिर की स्थापना वर्ष 2006 में की गई थी. हर साल यहां ज्येष्ठ शुद्ध दशमी के दिन हनुमान जी के विवाह का उत्सव बड़े श्रद्धा भाव से मनाया जाता है.

कौन थे बजरंगबली के गुरु? 

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, हनुमान जी ने सूर्य देव को अपना गुरु माना था. सूर्य देव के पास कुल नौ विद्याएं थीं. हनुमान जी इन सभी विद्याओं को सीखना चाहते थे. सूर्य देव ने पहले उन्हें पांच विद्याओं का ज्ञान दिया। जब हनुमान जी ने शेष चार विद्याएं भी सीखने की इच्छा जताई, तब एक नई शर्त सामने आई.

विवाह की शर्त क्यों आई?

सूर्य देव ने बताया कि बची हुई चार विद्याएं केवल गृहस्थ जीवन जीने वाले को ही दी जा सकती हैं. उस समय हनुमान जी अविवाहित थे. इसलिए इन विद्याओं को पाने के लिए विवाह आवश्यक था. पहले तो हनुमान जी इस प्रस्ताव से सहमत नहीं हुए. उन्होंने स्वयं को बाल ब्रह्मचारी बताया.

सुवर्चला देवी से विवाह की कथा

सूर्य देव ने समाधान निकालते हुए कहा कि विवाह के बाद भी हनुमान जी ब्रह्मचारी रह सकते हैं. इसके बाद सूर्य देव ने अपनी पुत्री सुवर्चला देवी के साथ हनुमान जी का विवाह संपन्न कराया. यह विवाह सांसारिक सुख के लिए नहीं, बल्कि ज्ञान प्राप्ति के उद्देश्य से हुआ था. इसके बाद सूर्य देव ने हनुमान जी को शेष चार विद्याओं का ज्ञान दिया.

श्री सुवर्चला सहिता हनुमान मंदिर में आज भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं. यह मंदिर हनुमान जी के एक अलग और दुर्लभ स्वरूप को दर्शाता है, जो ज्ञान, त्याग और अनुशासन का प्रतीक है. 

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