Vinayak Chaturthi Vrat Katha: भगवान गणेश को प्रसन्न करने के लिए विनायक चतुर्थी पर जरूर पढ़े ये व्रत कथा, जीवन के सभी कष्ट होंगे दूर

Vinayak Chaturthi Vrat Katha: आज विनायक चतुर्थी पर पूजा के समय व्रत कथा का पाठ जरूर करना चाहिए. इससे विघ्नहर्ता प्रसन्न होकर व्यक्ति के जीवन के सभी दुखों को दूर करते हैं. आइए पढ़ते हैं विनायक चतुर्थी की व्रत कथा.

Vinayak Chaturthi Vrat Katha: आज विनायक चतुर्थी पर पूजा के समय व्रत कथा का पाठ जरूर करना चाहिए. इससे विघ्नहर्ता प्रसन्न होकर व्यक्ति के जीवन के सभी दुखों को दूर करते हैं. आइए पढ़ते हैं विनायक चतुर्थी की व्रत कथा.

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Akansha Thakur
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Vinayak Chaturthi Vrat Katha

Vinayak Chaturthi Vrat Katha

Vinayak Chaturthi Vrat Katha: हर माह की चतुर्थी तिथि पर भगवान गणेश को समर्पित विनायक चतुर्थी का व्रत किया जाता है. साथ ही विधि-विधान से उनका पूजन किया जाता है. फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि के दिन ढुण्ढिराज चतुर्थी का व्रत रखा जाता है. आज  ढुण्ढिराज चतुर्थी का व्रत रखा जाएगा. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार,  ढुण्ढिराज चतुर्थी पर गणेश जी की पूजा और व्रत रखने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं. खुशहाली का आशीर्वाद मिलता है.  ढुण्ढिराज चतुर्थी में पूजा के समय व्रत कथा का पाठ जरूर किया जाता है. इससे भगवान गणेश प्रसन्न होकर जीवन के सभी कष्टों को दूर करते हैं. आइए पढ़ते हैं  ढुण्ढिराज चतुर्थी व्रत की कथा. 

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ढुण्ढिराज चतुर्थी व्रत कथा 

पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक समय की बात है एक दिन भगवान शिव के मन में एक बात आई कि काशी को अपना निवास स्थान बना लिया जाए. उस समय काशी में राजा दिवोदास का शासन था. वो बहुत धर्मात्मा राजा थे. वो बहुत ही दयालु और धर्मप्रिय राजा थे. ब्रह्मा जी ने राजा को उस समय वरदान दिया था कि जब तक उसके राज्य में कुछ गलत नहीं होगा तब तक राज्य में कोई कमी नहीं रहेगी. कोई भी देवता वहां प्रवेश नहीं कर पाएगा. 

गणेश जी ने ज्योतिषी का रूप किया धारण 

हालांकि भगवान शिव को जगह बेहद पसंद आई. उन्होंने अपने पुत्र भगवान गणेश को काशी भेजा ताकि वो काशी को अच्छे से जान सकें. काशी जाने से पहले गणेश जी ने एक ज्योतिषी का रूप धारण किया और अपना नाम ढुण्ढि रखा. कुछ ही समय में काशी के लोग उनकी बुद्धिमत्ता से काफी प्रभावित हो गए. इससे काशी में गणेश जी चर्चा का केंद्र बन गए. इधर राजा दिवोदास के शासन में कमी आने लगी. ऐसे में भगवान शिव काशी में आ गए. 

भगवान शिव ने रखा गणेश जी का नाम 

उन्होंने गणेश जी को ढुण्ढिराज नाम से बुलाया और कहा कि काशी आने वाले भक्तों की यात्रा ढुण्ढिराज गणेश की पूजा करने के बाद ही पूरी मानी जाएगी. कहा जाता है कि जिस दिन शिव जी ने गणेश जी को ढुण्ढिराज नाम से बुलाया वो दिन फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि का था. इसलिए इस दिन को ढुण्ढिराज चतुर्थी के रूप में मनाया जाने लगा. 

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