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Apara Ekadashi 2024: अपरा एकादशी आज, जानें व्रत रखने का सही तरीका और पूजा का शुभ मुहूर्त

Apara Ekadashi 2024: अपरा एकादशी का व्रत अगर मौन रहकर किया जाए तो इसका कई गुना फल मिलता है. इस साल अपरा एकादशी कब है, पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है और पूजा का सही तरीका क्या है आइए जानते हैं.

Updated on: 02 Jun 2024, 01:07 PM

New Delhi :

Apara Ekadashi 2024: अपरा एकादशी, जिसे ज्येष्ठ मास की एकादशी भी कहा जाता है, हिंदू धर्म के महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है. यह वर्ष में दो बार आती है - एक बार ज्येष्ठ मास में और दूसरी बार कार्तिक मास में. 2024 में अपरा एकादशी 2 जून, रविवार को पड़ रही है. यह भगवान विष्णु की पूजा का विशेष दिन है. इस दिन मौन रहने का विशेष महत्व है. मौन रहने से मन को शांति और पवित्रता प्राप्त होती है. वाणी को नियंत्रित करने से पापों से बचा जा सकता है. मौन रहकर आत्मचिंतन करने से आध्यात्मिक उन्नति होती है. माना जाता है कि अपरा एकादशी का व्रत रखने से सभी पापों का नाश होता है. इस व्रत को मोक्ष की प्राप्ति का साधन भी माना जाता है. भगवान विष्णु की कृपा: इस व्रत को रखने से भगवान विष्णु की असीम कृपा प्राप्त होती है. इस व्रत से मन को शांति और पवित्रता प्राप्त होती है.

अपरा एकादशी पूजा शुभ मुहूर्त 

एकादशी की तिथि 02 जून को सुबह 05 बजकर 04 मिनट से शुरू होगी जो 03 जून को देर रात 02 बजकर 41 मिनट तक रहेगी.

पूजा का शुभ मुहूर्त- सुबह 05:23 बजे से दोपहर 12:12 बजे तक

जो लोग 3 जून को व्रत रखेंगे उन्हें सूर्योदय के बाद भगवान त्रिविक्रम की पूजा करनी चाहिए.

पारण का समय- 3 जून को सुबह 08.05 बजे से 08.10 बजे 

अपरा एकादशी व्रत विधि

व्रत की शुरुआत दशमी तिथि के सूर्यास्त से पहले स्नान करके और हल्का भोजन करके करनी चाहिए. एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें. भगवान विष्णु की पूजा करें और व्रत का संकल्प लें. पूरे दिन निर्जला व्रत रखें. नमक, अनाज, फल, और फलों का रस का सेवन न करें. दिन भर भगवान विष्णु के नाम का जाप करें और धार्मिक ग्रंथों का पाठ करें. शाम के समय फिर से भगवान विष्णु की पूजा करें और आरती उतारें. अगले दिन द्वादशी तिथि के सूर्योदय के बाद पारण करें. पारण में खीर, दही, फल, और सात्विक भोजन ग्रहण करें. 

मौन रहने का महत्व 

अपरा एकादशी के दिन मौन रहने मन शांत होता है और नकारात्मक विचारों से मुक्ति मिलती है. मौन रहकर आत्मचिंतन करने से आत्मज्ञान की प्राप्ति होती है. एकाग्रता बढ़ती है और कार्यों में सफलता मिलती है. मौन रहने से आध्यात्मिक उन्नति होती है और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है. ऐसा भी माना जाता है कि इस दिन जो जातक मौन रहता है उसे वाणी के पापों से मुक्ति मिलती है.

अपरा एकादशी के दिन मौन रहने के लिए सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें. शांत जगह पर बैठकर ध्यान करें. पूरे दिन बोलने से बचें. जरूरत पड़ने पर इशारों में संवाद करें. मन को नकारात्मक विचारों से दूर रखें. भगवान का ध्यान करें और मंत्रों का जाप करें. अपरा एकादशी के दिन मौन रहकर आप आध्यात्मिक और मानसिक रूप से शांति पा सकते हैं. एकादशी के दिन बुराई से दूर रहना चाहिए. क्रोध, लोभ, मोह, और ईर्ष्या जैसी नकारात्मक भावनाओं से बचना चाहिए. दान-पुण्य करना चाहिए. जरूरतमंदों की मदद करनी चाहिए. बड़ों का सम्मान करना चाहिए. 

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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं. न्यूज नेशन इस बारे में किसी तरह की कोई पुष्टि नहीं करता है. इसे सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है.)