क्या है कामाख्या देवी मंदिर का इतिहास, जानें यहां पूजा के नियम

कामाख्या देवी मंदिर का मुख्य मंदिर सन्दर्भ में अत्यधिक प्रसिद्ध है, जो निर्मित और सजाया गया है रेड स्टोन से. यहां पर अनेक छोटे-बड़े मंदिर भी हैं, जिनमें अनेक देवी-देवताओं की मूर्तियां स्थापित हैं.

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Mohit Saxena
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Kamakhya Devi Temple

Kamakhya Devi Temple( Photo Credit : social media)

कामाख्या देवी मंदिर भारत के असम राज्य में स्थित है और यह हिन्दू धर्म का प्रसिद्ध मंदिर है. यह मंदिर कामाख्या नदी के किनारे स्थित है और यहाँ हर साल बहुत से श्रद्धालुओं की भीड़ आती है. कामाख्या देवी मंदिर तंत्र मंदिर के रूप में भी जाना जाता है और यहाँ पर अनेक तंत्रिक क्रियाएँ आयोजित की जाती हैं. इस मंदिर में कामाख्या देवी की पूजा और अर्चना की जाती है, जो तंत्र मंत्रों और पूजा पद्धतियों के साथ की जाती है. यहाँ पर दिन-रात ध्यान, पूजा, अर्चना, और अन्य धार्मिक अनुष्ठान होते रहते हैं. कामाख्या देवी मंदिर का मुख्य मंदिर सन्दर्भ में अत्यधिक प्रसिद्ध है, जो निर्मित और सजाया गया है रेड स्टोन से. यहाँ पर अनेक छोटे-बड़े मंदिर भी हैं, जिनमें अनेक देवी-देवताओं की मूर्तियाँ स्थापित हैं. कामाख्या देवी मंदिर एक प्रमुख धार्मिक स्थल है और यह भक्तों के लिए महत्वपूर्ण स्थल है, जहाँ उन्हें आध्यात्मिक और मानसिक शांति की प्राप्ति होती है.

कामाख्या देवी मंदिर में पूजा के नियम:

कामाख्या देवी मंदिर में पूजा करने के कुछ नियम हैं जिनका पालन सभी भक्तों को करना चाहिए:

1. वेशभूषा: मंदिर में प्रवेश करने के लिए भक्तों को पारंपरिक वेशभूषा पहननी चाहिए. पुरुषों को धोती-कुर्ता या पजामा-कुर्ता पहनना चाहिए, जबकि महिलाओं को साड़ी या सलवार-कमीज पहनना चाहिए.

2. स्नान: मंदिर में प्रवेश करने से पहले, भक्तों को स्नान करना चाहिए और स्वच्छ कपड़े पहनने चाहिए.

3. प्रसाद: भक्त देवी कामाख्या को विभिन्न प्रकार के प्रसाद चढ़ा सकते हैं, जैसे कि फूल, फल, मिठाई, और धूप-दीप.

4. पूजा: मंदिर में पूजा करने के लिए भक्तों को गर्भगृह के सामने खड़े होकर देवी कामाख्या की मूर्ति को देखना चाहिए. भक्त देवी कामाख्या के मंत्रों का जाप कर सकते हैं और उनसे आशीर्वाद मांग सकते हैं.

5. दान: भक्त अपनी इच्छानुसार मंदिर में दान कर सकते हैं.

मंदिर परिसर में शराब, मांस, और अंडे का सेवन प्रतिबंधित है. यहां धूम्रपान प्रतिबंधित है. मंदिर परिसर में फोटोग्राफी प्रतिबंधित है. शोर-शराबा करने से बचना चाहिए. कामाख्या देवी मंदिर में पूजा करने का सबसे अच्छा समय सुबह जल्दी या शाम को देर से होता है. इन समयों में मंदिर में कम भीड़ होती है और भक्त देवी कामाख्या की पूजा शांति से कर सकते हैं. कामाख्या देवी मंदिर में पूजा करने से भक्तों को देवी कामाख्या का आशीर्वाद मिलता है. देवी कामाख्या शक्ति, प्रजनन क्षमता, और समृद्धि की देवी हैं.

कामाख्या देवी मंदिर एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है और हर साल लाखों भक्त यहां आते हैं. मंदिर का मुख्य आकर्षण गर्भगृह है, जहां देवी कामाख्या की योनि की मूर्ति स्थापित है. मूर्ति को लाल कपड़े से ढका गया है और केवल एक बार एक वर्ष में, अंबुवाची मेले के दौरान, इसे जनता के लिए खोला जाता है. अंबुवाची मेला एक चार दिवसीय त्योहार है जो हर साल जून-जुलाई में मनाया जाता है. यह त्योहार देवी कामाख्या के रजस्वला चक्र का प्रतीक है. त्योहार के दौरान, मंदिर को बंद कर दिया जाता है और भक्तों को प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाती है. कामाख्या देवी मंदिर एक रहस्यमय और शक्तिशाली स्थान है. यह देवी शक्ति और प्रजनन क्षमता का प्रतीक है. मंदिर तंत्रवाद का भी एक महत्वपूर्ण केंद्र है, और कई तांत्रिक यहां देवी कामाख्या की पूजा करने आते हैं.

Source : News Nation Bureau

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