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Vastu For Wood Mandir In Home: घर में है लकड़ी का मंदिर, तो वास्तु के इन नियमों का करें पालन

Vastu For Wood Mandir In Home: आपके घर में लकड़ी के मंदिर के लिए वास्तुशास्त्र के कुछ नियम हैं, जिनका पालन करने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. आइए जानते हैं ये नियम.

Updated on: 02 May 2024, 12:37 PM

नई दिल्ली :

Vastu For Wood Mandir In Home: लकड़ी में नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने और सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करने की क्षमता होती है. लकड़ी का मंदिर घर में ऊर्जा संतुलन बनाए रखने में मदद करता है, जिससे मन शांत रहता है और तनाव कम होता है. घर में लकड़ी का मंदिर धार्मिक  और आध्यात्मिक  रूप से महत्वपूर्ण है.  यह सकारात्मक ऊर्जा, शांति, समृद्धि  और सुख-शांति  लाता है.  यह देवी-देवताओं  का वासस्थान होता है और धार्मिक अनुष्ठान  करने का एक उपयुक्त स्थान होता है. लकड़ी को प्रकृति का प्रतीक माना जाता है, जो पवित्रता और सकारात्मक ऊर्जा का स्रोत है. ये मन को शांत करता है और आध्यात्मिकता को बढ़ावा देता है. हिंदू धर्म में, लकड़ी को देवी-देवताओं का प्रिय निवास माना जाता है. 

लकड़ी का मंदिर रखने की सही दिशा

पूर्व और उत्तर दिशाएं मंदिर स्थापित करने के लिए सबसे शुभ मानी जाती हैं. पूर्व दिशा सूर्योदय की दिशा होने के कारण यह दिशा सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर होती है. यह ईश्वर और आध्यात्मिकता का प्रतीक भी है.

उत्तर दिशा समृद्धि और बुद्धि का प्रतीक है. स्थापित मंदिर ज्ञान और सफलता प्राप्ति में सहायक होता है. 

दक्षिण और पश्चिम दिशा को अशुभ माना जाता है. यह दिशा अग्नि तत्व का प्रतिनिधित्व करती है. मंदिर स्थापित करने से नकारात्मक ऊर्जा और वादा-विवाद बढ़ सकता है.

पश्चिम दिशा सूर्यास्त की दिशा है. इस दिशा में मंदिर रखने से धन हानि और अनिश्चितता की आशंका रहती है.

मंदिर कितनी ऊंचाई पर रखें ?

मंदिर की ऊंचाई आपकी नाभि से कम होनी चाहिए. मंदिर का फर्श जमीन से थोड़ा ऊँचा होना चाहिए. मंदिर को सदैव स्वच्छ और व्यवस्थित रखना चाहिए. दीपक जलाना चाहिए. धूप और अगरबत्ती जलाना चाहिए. फूल और फल रखना चाहिए.  भगवान की मूर्तियां स्थापित करनी चाहिए. मंदिर के सामने खाली जगह होनी चाहिए ताकि आप आराम से पूजा कर सकें.

मंदिर की लकड़ी का प्रकार

शीशम और सागौन की लकड़ी सबसे शुभ मानी जाती है. आप अपनी पसंद और बजट के अनुसार अन्य प्रकार की लकड़ी भी इस्तेमाल कर सकते हैं.

मंदिर स्थापना का दिन

सोमवार, बुधवार, गुरुवार, और शुक्रवार मंदिर स्थापित करने के लिए शुभ माने जाते हैं. मंगलवार, शनिवार, और रविवार को स्थापना नहीं करनी चाहिए.

इन नियमों का पालन करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है. धन-धान्य की वृद्धि होती है और सुख-समृद्धि आती है. मन शांत रहता है. मंदिर को ब्रह्मस्थान (घर का केंद्र) में रखना अत्यंत शुभ माना जाता है. अगर संभव हो तो मंदिर को एक अलग कमरे में रखें. मंदिर के चारों ओर हरे-भरे पौधे लगाएं. मंदिर में नकारात्मक विचार या भावनाएं न लाएं. यह विश्वास  है कि वास्तु के नियमों का पालन करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है और इससे सुख-समृद्धि  आती है.

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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं. न्यूज नेशन इस बारे में किसी तरह की कोई पुष्टि नहीं करता है. इसे सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है.)