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Surya Grahan 2024: साल 2024 का आखिरी सूर्य ग्रहण कब, क्या भारत पर पड़ेगा कोई असर

Surya Grahan 2024: आइए जानते हैं इस साल का आखिरी सूर्य ग्रहण कब लगेगा और इसका सूतक काल कब तक मान्य होगा. क्या भारत में ये ग्रहण दिखाई देगा या नहीं.

Updated on: 21 Jun 2024, 06:27 PM

नई दिल्ली:

Surya Grahan 2024: हमारे ब्रह्मांड में ऐसी कई अहम घटनाएं घटती रहती है, जिसका असर हमारी जिंदगी पर जरूर पड़ता है- उन्हीं में एक है सूर्य ग्रहण. सूर्य ग्रहण को लेकर विज्ञान और धर्म अलग अलग मत देते हैं. एक तरफ जहां विज्ञान इसे मात्र एक खगोलिय घटना कहता है तो वहीं धर्म में इसे विशेष दृष्टि से देखा जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूर्य को विश्व देवता माना जाता है. यही कारण है कि लोग सूर्य ग्रहण वाले दिन आजतक भी अपनी धार्मिक परंपराओं को  खूब मानते हैं. तो आइए जानते हैं कि इस साल का आखिरी सूर्य ग्रहण कब लगेगा और इसका सूतक काल कब तक मान्य होगा. क्या भारत में ये ग्रहण दिखाई देगा या नहीं. 

साल का आखिरी सूर्य ग्रहण कब?

साल 2024 का आखिरी सूर्य ग्रहण अक्टूबर के महीने में लगने वाला है. ये सूर्य ग्रहण 2 अक्टूबर को रात के समय लगने वाला है. लगभग 6 घन्टे तक चलने वाले इस सूर्य ग्रहण का समय 2 अक्टूबर की रात 9 बजे से लेकर 3 अक्टूबर की सुबह 3 बजे तक होगा. इस ग्रहण को दुनिया के कई अलग अलग हिस्सों में देखा जा सकेगा. जिनमें अमेरिका, अंटार्कटिका, आइलैंड, और अर्जेंटीना आदि शामिल है. लेकिन क्योंकि ये ग्रहण रात के समय लगेगा इसलिए इसे भारत में नहीं देखा जा सकेगा. 

क्या है सूतक काल का महत्व
 
किसी भी ग्रहण के लिए उसके सूतक काल का बहुत महत्त्व होता है. सूतक काल के दौरान लोग किसी भी मंगल कार्य को नहीं करते. यहां तक कि मंदिरों के कपाट भी सूतक काल के दौरान बंद कर दिए जाते है. कहा जाता है कि सूतक काल के दौरान भोजन भी नहीं करना चाहिए. इसके अलावा गर्भवती महिलाओं को भी सूतक काल के दौरान सावधान रहने की जरूरत होती है वरना इसका असर बच्चे पर पढ़ता है. 

भारत में नही होगा सूतक काल मान्य 

बात करें साल के आखिरी सूर्य ग्रहण की तो ये ग्रहण भारत में नही दिखाई देगा. इसलिए इसका सूतक काल भी भारत में मान्य नहीं होगा. हालांकि अपनी संतुष्टि के लिए इस दौरान अपने मंगल कार्यों को थोड़ी देर के लिए टाल सकते हैं, लेकिन इस सूतक काल का प्रभाव भारत में देखने को नहीं मिलेगा.

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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं. न्यूज नेशन इस बारे में किसी तरह की कोई पुष्टि नहीं करता है. इसे सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है.)