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Mahakaleshwar Temple: श्री महाकालेश्वर मंदिर का ये है इतिहास, भस्म आरती से लेकर दर्शनों तक जानें सब

Shri Mahakaleshwar Temple: उज्जैन में बाबा महाकाल का मंदिर है जो 12 ज्योतिर्लिंगो में से एक है. यहां की भस्म आरती विश्व प्रसिद्ध है. इस मंदिर का इतिहास क्या है और भस्म आरती से लेकर दर्शन तक आप सारी जानकारी चाहते हैं तो ये पढ़ें.

Updated on: 17 May 2024, 09:25 AM

New Delhi :

Mahakaleshwar Temple: श्री महाकालेश्वर मंदिर का इतिहास 500 ईसा पूर्व का है. यह माना जाता है कि मंदिर का निर्माण राजा चंद्रगुप्त मौर्य ने करवाया था. मंदिर का जीर्णोद्धार सम्राट विक्रमादित्य और परमार राजाओं  द्वारा भी किया गया था. श्री महाकालेश्वर भारत के मध्य प्रदेश राज्य में स्थित उज्जैन शहर में स्थित एक प्राचीन और प्रसिद्ध हिंदू मंदिर है. यह भगवान शिव को समर्पित 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और शिवलोक का प्रतीक माना जाता है. श्री महाकालेश्वर मंदिर हिंदू धर्म में सबसे महत्वपूर्ण मंदिरों में से एक है. यह शिव के भस्मेश्वर रूप को समर्पित है, जिसका अर्थ है "राख का भगवान".  यह माना जाता है कि भगवान शिव ने सृष्टि के विनाश के बाद यहां भस्म लगाई थी.

श्री महाकालेश्वर में भस्म आरती का महत्व

श्री महाकालेश्वर मंदिर  में भस्म आरती  हिंदुओं के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान है.  यह प्रतिदिन सुबह 7:00 बजे  की जाती है और इसमें भगवान शिव  को भस्म (राख) अर्पित की जाती है. भस्म सृष्टि के विनाश का प्रतीक है. यह माना जाता है कि भगवान शिव ने सृष्टि के विनाश के बाद यहां भस्म लगाई थी. भस्म आरती इस विनाशकारी शक्ति को स्वीकार करने और उसके रचनात्मक पहलुओं को समझने का एक तरीका है. यह माना जाता है कि भस्म आरती में अर्पित भस्म भक्तों के पापों को नष्ट कर देती है. भस्म राख से बनती है, जो अशुद्धता का प्रतीक है. भस्म को भगवान शिव को अर्पित करके, भक्त उनसे अपने पापों को क्षमा करने और उन्हें शुद्ध करने का अनुरोध करते हैं. भस्म आरती आध्यात्मिक शुद्धि का प्रतीक भी है. भस्म शरीर की अस्थायी प्रकृति का प्रतीक है, और भस्म आरती में इसे भगवान शिव को अर्पित करके, भक्त उनसे अपने अहंकार और आसक्तियों को त्यागने और आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त करने का आशीर्वाद मांगते हैं. ये आरती भगवान शिव के प्रति भक्तों की भक्ति और समर्पण का प्रतीक है. भस्म को अपने शरीर पर लगाकर और भस्म आरती में भाग लेकर, भक्त भगवान शिव के प्रति अपनी पूर्ण आत्मसमर्पण व्यक्त करते हैं. 

भस्म आरती में जाने के लिए क्या करना पड़ता है?

भस्म आरती में भाग लेने के लिए, भक्तों को सुबह 4:00 बजे से सुबह 6:30 बजे के बीच मंदिर में पहुंचना होगा. भक्तों को सफेद कपड़े पहनने चाहिए और नंगे पैर होने चाहिए. महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान आरती में भाग लेने की अनुमति नहीं है. भक्तों को भस्म आरती शुरू होने से पहले गर्भगृह में भगवान शिव के दर्शन करने चाहिए. भस्म आरती के दौरान, पुजारी भगवान शिव को भस्म अर्पित करते हैं और मंत्रों का जाप करते हैं. भक्त भस्म आरती के दौरान भजन गाते हैं और भगवान शिव की स्तुति करते हैं. भस्म आरती के बाद, भक्त भगवान शिव को भस्म प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं.

महाकालेश्वर मंदिर के बारे में क्या खास है?

मंदिर का गर्भगृह भगवान शिव के ज्योतिर्लिंग को समर्पित है. ज्योतिर्लिंग एक स्वयंभू (स्वयं प्रकट) शिवलिंग है, जिसका अर्थ है कि यह मानव निर्मित नहीं है. गर्भगृह के सामने नंदी की एक विशाल मूर्ति है, जो भगवान शिव का वाहन है. प्रतिदिन सुबह भस्म आरती की जाती है, जिसमें भगवान शिव को भस्म (राख) अर्पित की जाती है. यह आरती सुबह 7:00 बजे की जाती है और यह मंदिर का एक प्रमुख आकर्षण है. सिंहस्थ कुंभ मेला हिंदुओं का सबसे पवित्र तीर्थयात्रा है. यह हर 12 साल में एक बार आयोजित किया जाता है और यह माना जाता है कि इस दौरान यहां स्नान करने से सभी पाप धुल जाते हैं. 

श्री महाकालेश्वर से जुड़ी जरूरी जानकारी

श्री महाकालेश्वर मंदिर उज्जैन  शहर में स्थित है, जो मध्य प्रदेश  राज्य का एक प्रमुख शहर है.  उज्जैन इंदौर  शहर से 57 किलोमीटर  दूर है, जो भारत  का एक प्रमुख हवाई अड्डा है.  उज्जैन दिल्ली  और मुंबई  जैसे प्रमुख शहरों से रेल द्वारा भी अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है. श्री महाकालेश्वर मंदिर सुबह 4:00 बजे  से रात 11:00 बजे  तक खुला रहता है.  भस्म आरती  सुबह 7:00 बजे  की जाती है. श्री महाकालेश्वर मंदिर में प्रवेश मुफ्त  है. यह भगवान शिव के भैरव रूप को समर्पित एक मंदिर है. रामघाट शिपरा नदी का एक घाट है, जो हिंदुओं के लिए एक पवित्र स्थान है. महाकालेश्वर मंदिर में संग्रहालय भी है जिसमें मंदिर के इतिहास और संस्कृति को समर्पित एक संग्रहालय है. 
श्री महाकालेश्वर  में भस्म आरती  हिंदुओं के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान है.  यह सृष्टि के विनाश, पापों के नाश, आध्यात्मिक शुद्धि  और भगवान शिव  के प्रति भक्ति  का प्रतीक है.  यदि आप उज्जैन  की यात्रा करते हैं, तो भस्म आरती  में भाग लेने का अवसर अवश्य लें.  यह निश्चित रूप से एक यादगार अनुभव होगा.

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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं. न्यूज नेशन इस बारे में किसी तरह की कोई पुष्टि नहीं करता है. इसे सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है.)